छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित राजस्व निरीक्षक (आरआई) विभागीय परीक्षा-2024 पेपर लीक कांड में ईओड्ब्ल्यू-एसीबी ने मंगलवार को 3000 पन्नों का पहला चालान पेश किया। इसमें वीरेंद्र जाटव और हेमंत कुमार कौशिक को आरोपी बनाया गया है। एजेंसी का दावा है कि परीक्षा से पहले ही सुनियोजित साजिश के तहत प्रश्नपत्र लीक कर चुनिंदा अभ्यर्थियों को मोटी रकम लेकर उपलब्ध कराया गया था। यह पूरा नेटवर्क रायपुर से लेकर प्रदेश के कई जिलों तक फैला हुआ था। दरअसल, राजस्व निरीक्षक विभागीय परीक्षा 7 जनवरी 2024 को आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद जब परिणाम घोषित हुए, तब असामान्य रूप से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के अंकों और उत्तर पुस्तिकाओं में एक जैसी प्रवृत्ति देखने को मिली। कई उत्तर पुस्तिकाओं में सही और गलत उत्तरों का क्रम लगभग समान पाया गया, जिससे परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठे। इसी आधार पर शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके बाद ईओडब्ल्यू-एसीबी ने विस्तृत जांच शुरू की।
6 जनवरी को एक ही लोकेशन पर कई अभ्यर्थी मौजूद थे
ईओडब्ल्यू-एसीबी को मामले में पुख्ता डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन ट्रैकिंग के जरिए यह सामने आया कि परीक्षा से ठीक पहले की रात 6 जनवरी 2024 को आरोपी और कई अभ्यर्थी एक ही लोकेशन पर मौजूद थे। इससे स्पष्ट हो गया कि उसी रात प्रश्नपत्र का वितरण किया गया और अंतिम तैयारी कराई गई। डिजिटल साक्ष्यों से यह भी साबित हुआ कि प्रश्नपत्र अलग-अलग माध्यमों से अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया और इसके बदले बड़ी रकम वसूली गई।
परीक्षा से कई दिन पहले मिले प्रश्नपत्र
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने परीक्षा से कई दिन पहले ही प्रश्नपत्र हासिल कर लिया था और उसे चुनिंदा उम्मीदवारों तक पहुंचाया गया था। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए अभ्यर्थियों को रायपुर के विभिन्न होटल, फार्महाउस और रिसॉर्ट में ठहराया गया, जहां उन्हें लीक प्रश्नपत्र पढ़वाकर सवाल रटवाए गए। अभ्यर्थियों से नोट्स तैयार कराए गए और परीक्षा से पहले लिखे गए प्रश्नों को जलाने के निर्देश दिए गए, ताकि किसी प्रकार का सबूत न बच पाए। जानिए, किस तरह से प्रमोशन परीक्षा में की गई गड़बड़ी


