आरजीएचएस में अनियमितताओं का मामला:भरतपुर -डीग के 7 कार्मिक निलंबित भरतपुर नर्सिंग होम पर मुकदमा दर्ज

राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) में घोर अनियमितताओं के मामले में राज्य स्तर से बड़ी कार्रवाई की गई है। शनिवार को भरतपुर और डीग जिले में कार्यरत 7 कार्मिकों को निलंबित कर दिया गया। आरोप है कि इन्होंने आरजीएचएस कार्ड का दुरुपयोग कर फर्जी क्लेम उठाए और सरकार को लाखों रुपए की चपत लगाई।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं राजस्थान जयपुर के निदेशक (अराजपत्रित) ने अलग-अलग आदेश जारी कर इन कार्मिकों को निलंबित किया। निलंबित होने वालों में आरबीएम अस्पताल के नर्सिंग ऑफिसर सौरभ कुमार रावत और सुरेश चंद गुप्ता, उप स्वास्थ्य केंद्र नगला माय की मंजू कुमारी, उप जिला चिकित्सालय बयाना के सत्यप्रकाश छावड़ी, उप स्वास्थ्य केंद्र खुडासा की एएनएम मीना कुमारी चौधरी, सीएचसी उच्चैन की अनुपमा तथा डीग जिले के उप स्वास्थ्य केंद्र कुचावटी की किशन देई शामिल हैं। सभी का मुख्यालय संयुक्त निदेशक कार्यालय जोन भरतपुर किया गया है। आदेश में विभागीय जांच प्रस्तावित होने के चलते निलंबन आवश्यक बताया गया है। इसके अलावा भरतपुर के भरतपुर नर्सिंग होम के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश सीएमएचओ को दिए गए हैं। भास्कर इनसाइट – अब तक 2 डॉक्टर सहित तीन जनों के खिलाफ हो चुकी एफआईआर, 500 कार्मिकों के कार्ड हो चुके ब्लॉक आरजीएचएस में दवाइयों के नाम पर काजू-बादाम और घरेलू सामान तक लेने के मामलों में पहले भी कार्रवाई हो चुकी है। अब तक सीएमएचओ डॉ. गौरव कपूर 3 जनों कशिश फार्मेसी के राकेश कुमार, पक्का बाग शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर जनता क्लिनिक के डॉ. विकास फौजदार, अपेक्स डेंटल के संचालक डॉ. मनीष गोयल के खिलाफ अटलबंध थाना में एफआईआर दर्ज करा चुके हैं। जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई जांच में 500 कार्मिकों के आरजीएचएस कार्ड ब्लॉक किए जा चुके हैं। 13 डॉक्टरों को जयपुर तलब कर बयान लिए गए हैं। इससे पहले एसपी दिगंत आनंद 7 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर चुके हैं। कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय 2 प्रोफेसरों को निलंबित कर चुका है। शिक्षा विभाग ने भी भरतपुर के 6 और डीग के 2 कार्मिकों को निलंबित किया है। लाभार्थियों के कार्ड से फर्जी क्लेम राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के सीईओ हरजीलाल अटल ने बताया कि जांच में सामने आया है कि भरतपुर स्थित कशिश फार्मेसी और भरतपुर नर्सिंग होम ने मिलीभगत कर आरजीएचएस में फर्जीवाड़ा किया। आरोप है कि अस्पताल की डॉक्टर द्वारा पूर्व अनुमोदन नहीं होने के बावजूद आरजीएचएस का बोर्ड लगाकर लाभार्थियों को सुविधा देने का प्रलोभन दिया गया। मरीजों के एसएसओ आईडी-पासवर्ड लेकर टीआईडी जनरेट किए गए और उपचार के बाद अपनी ही फार्मेसी से दवाइयों व जांचों को पोर्टल पर एडजस्ट कर भुगतान प्राप्त किया गया दोनों ने फर्जी बिल बनाकर क्लेम स्वीकृत करवाने की कोशिश की। अस्पताल को पहले ही डी-एम्पेनल किया जा चुका है। अब एफआईआर की कार्रवाई की जा रही है।

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