आरजीएचएस में गड़बड़ी:मेडिसिन और कार्डियोलॉजी में मरीज की पर्चियों पर डॉक्टरों के फर्जी साइन और मुहर लगा क्लेम पेश किए

राजस्थान राज्य हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी (आरजीएचएस) के तहत भुगतान के लिए पेश किए गए क्लेम की जांच में गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। बीकानेर की एक प्राइवेट लैब पर आरोप है कि क्लेम लेने के लिए डॉक्टरों के फर्जी साइन कर उनकी मुहर का इस्तेमाल किया। इस प्रकरण में अब पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। पवनपुरी स्थित डॉ. बोथरा डायग्नोस्टिक एंड इमेजिंग सेंटर की ओर से एक नवंबर 2024 से लेकर 15 नवंबर 2025 तक पेश किए गए क्लेम की जांच के दौरान गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। मसलन एक ही परिवार के सभी सदस्यों का एचआईवी टेस्ट कराया गया है। कम उम्र के मरीजों के भी गठिया, ब्लड इंफैक्शन, रेंडम ब्लड ग्लूकोज टेस्ट कराए गए। मरीज की पर्ची में टी2डीएम यानी ग्लूकोज से लेपित हीमोग्लोबिन के प्रतिशत की जांच लिखी है, जबकि एचबी1सी टेस्ट नॉर्मल पाया गया। ओपीडी स्पिल पर डॉक्टर के साइन नहीं हैं या अलग-अलग साइन पाए गए हैं। क्लेम की ऑडिट में इसे गंभीर अनियमितता माना गया है। इस मामले में कॉर्डियोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुनील बुढ़ानिया सहित चार डॉक्टरों से पूछताछ की गई है। इनमें तीन जूनियर डॉक्टर इंटर्नशिप के लिए आए हुए थे। इन सभी ने साइन और मुहर की तस्दीक नहीं की। फर्जीवाड़े को देखते हुए परियोजना निदेशक डॉ. निधि पटेल ने लैब को आरजीएचएस योजना से डी एम्पैनल करते हुए एफआईआर दर्ज कराने के आदेश सीएमएचओ को दिए हैं। पीबीएम अधीक्षक ने भी जताई थी मुहर के दुरुपयोग की संभावना आरजीएचएस के तहत डॉ. बोथरा डायग्नोस्टिक एंड इमेजिंग सेंटर की ओर से पेश क्लेम में गड़बड़ी को लेकर पीबीएम अधीक्षक ने भी दिसंबर में जांच कराई थी। उन्होंने मुहरों के दुरुपयोग की संभावना जताते हुए लिखा था कि काफी डॉक्टर कोर्स पूरा होने के बाद अपनी मुहर कार्यालय में जमा नहीं कराते। रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि पीबीएम में 500 से ज्यादा डॉक्टर हैं। सभी की ओपीडी स्लिप खोजकर मिलान करना संभव नहीं है। कोई डॉक्टर आवश्यकता से अधिक जांच नहीं लिखता। डॉ. बोथरा डायग्नोस्टिक लैब एंड इमेजिंग सेंटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की जिम्मेदारी अर्जेंट टेम्प्रेरी बेस पर कार्यरत कर्मचारी ईशान पुष्करणा को सौंपी गई है, जबकि वो अधिकृत ही नहीं है। योजना के नोडल ऑफिसर डिप्टी सीएमएचओ डॉ. लोकेश गुप्ता हैं। आरजीएचएस की परियोजना निदेशक डॉ. निधि पटेल के आदेश 13 फरवरी को जारी हुए थे। चार दिन बाद भी सीएमएचओ ऑफिस तय नहीं कर पाया है कि एफआईआर किस प्रकार दर्ज कराई जाए? जो डॉक्टर मौजूद नहीं थे उनके भी साइन मिले डॉ. बोथरा डायग्नोस्टिक एंड इमेजिंग सेंटर पर पाए गए संदिग्ध पर्ची पर डॉ. सेजल बेनीवाल के साइन थे, जबकि वे नवंबर 2024 तक ही पदस्थापित रहीं। डॉ. संजू देशपाल ने 29 फरवरी 24 से 28 फरवरी 25 तक इंटर्नशिप की थी। वे ओपीडी स्लिप नहीं लिख सकतीं ना ही उनकी मुहर होती है। डॉ. निशा 22 अगस्त 24 से 22 नवंबर 24 तक जूनियर रेजिडेंट के रूप में कार्यरत थीं। उन्होंने अपने साइन और सील होने से इंकार किया है। कॉर्डियोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुनील बुढ़ानिया ने भी साइन और मुहर की तस्दीक नहीं की। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि टीआईडी वाली पर्चियां उनकी लिखी हुई नहीं हैं। इस फर्जीवाड़े में डायग्नोस्टिक सेंटर के साथ हॉस्पिटल के ही किसी कार्मिक की मिली भगत हो सकती है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *