भास्कर न्यूज | बाड़मेर राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम पेंशनर्स के लिए राहत का सहारा बनने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है। उम्र के पड़ाव पर जिन दवाइयों की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, वही दवाइयां योजना की सूची में उपलब्ध नहीं हैं। इन समस्याओं को लेकर आरजीएचएस से पंजीकृत दवा विक्रेताओं की बैठक राजस्थान पेंशनर समाज बाड़मेर के कार्यालय में डॉ. बी डी तातेड़ की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में पेंशनरों को आ रही परेशानियों पर विस्तार से चर्चा की गई। दवा विक्रेताओं ने बताया कि आरजीएचएस के तहत पिछले लगभग 8 माह से करीब 6 करोड़ रुपए का भुगतान बकाया है। चर्चा के दौरान यह भी सामने आया कि शुगर, बीपी व अन्य बीमारियों के मामलों में सही डायग्नोसिस और मरीज की पुरानी हिस्ट्री पर्ची पर अंकित होना जरूरी है। प्रक्रिया लंबी होने और तकनीकी कारणों से कई बिल रिजेक्ट हो जाते हैं। चर्म रोग के मरीजों की दो हजार रुपए से अधिक की दवाइयों का भुगतान पोर्टल स्वीकार नहीं करता, जिससे दवा उपलब्ध कराने में दिक्कत आती है। कई मामलों में डॉक्टर की मुहर और आरएमसी नंबर पर्ची पर नहीं होने से भी दवा नहीं मिल पाती। इस संबंध में पीएमओ से संपर्क कर आवश्यक निर्देश जारी कराने का निर्णय लिया गया। बैठक में राजेन्द्र सुखानी, महावीरसिंह, घेवरसिंह राजपुरोहित, अशोक सोनी, दीपेन्द्र छंगाणी, दिलीपसिंह, हरीश जांगिड़, अनिल के साथ राजस्थान पेंशनर समाज के मंत्री बाबूलाल संखलेचा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष शंकरलाल मोदी, कोषाध्यक्ष विमल जोशी, सह कोषाध्यक्ष मांगीलाल गोठी, संगठन-मीडिया प्रभारी पीराराम शर्मा आदि मौजूद रहे।


