राजस्थान पर्यटन विकास निगम (आरटीडीसी) ने नई करवट ली है। दशकों से 12 करोड़ रुपए से अधिक के घाटे में चल रहा यह निगम इस वित्तीय वर्ष में लाभ में आ गया है। यह बदलाव बाजार के अनुसार मार्केटिंग करने, इवेंट्स की गुणवत्ता पर फोकस करने और कुछ होटलों के प्रबंधकों के कुशल प्रबंधन के बलबूते पर आया है। कुछ वर्ष पूर्व तक निगम को बंद करने की नौबत जैसे हालात बन गए थे। आरटीडीसी के अधिकारी-कर्मचारियों के विरोध के कारण यह टलता रहा। हालांकि होटलों की बड़ी संख्या ऐसी है, जो अब भी घाटे में हैं, लेकिन उनकी लोकेशन के आधार पर अब सरकार नई रणनीति बनाने जा रही है। लंबे समय बाद लाभ में आए निगम की खबर से प्रबंधन में उत्साह है और वह अब पर्यटन विकास की नई संभावनाएं तलाशने में जुटा है। 90.38 करोड़ रुपए का व्यवसाय, नियंत्रित खर्च का असर 2025-26 में आरटीडीसी ने 90.38 करोड़ रुपए से ज्यादा का व्यवसाय किया। इसके बाद निगम ने बेहतर प्रबंधन से खर्च में कमी लाते हुए करीब 90.14 करोड़ रुपए खर्च किए। असर यह हुआ कि निगम 23.69 लाख रुपए के लाभ में आ गया। न केवल कमाई बढ़ाई, बल्कि खर्च भी बढ़ाया। अच्छे संकेत, बदल सकती है छवि: आरटीडीसी की वित्तीय उन्नति से पर्यटन उद्योग की छवि में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। देश-विदेश से बढ़ते पर्यटकों की संख्या और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार इसकी बड़ी वजह हो सकती है। निगम ने एक-दो सालों में पर्यटन की आधुनिक अवधारणाएं अपनाई हैं। इस पर नीतिगत फैसले भी किए गए हैं। पर्यटन विकास को लेकर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सोमवार को ही पर्यटन की बैठक लेकर इनोवेशन पर जोर दिया है। नए व्यापार मॉडल, आधुनिक सेवाओं का विस्तार और पर्यटन से जुड़े विविध क्षेत्रों में नवाचार ने निगम की आय में स्थायी बढ़ोतरी सुनिश्चित की है। RTDC: 75 में से 26 रनिंग में वर्तमान में आरटीडीसी के पास 75 प्रॉपर्टी हैं। इनमें से 26 होटल्स का संचालन किया जा रहा है। पिछली सरकार के समय 15 होटल बंद कर भी दी गई थीं। इनमें से दो को फिर चालू करा लिया गया। पिछली सरकारों के समय लगातार यह मांग उठती रही कि घाटे में या बंद पड़ी होटलों की प्रॉपर्टी बेच दी जाए। हालांकि कर्मचारियों के विरोध के कारण ऐसा संभव नहीं हो पाया। अब इन होटलों में क्षमता बढ़ाने, सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और डिजिटल बुकिंग प्लेटफॉर्म को सुदृढ़ से बदलाव आया है।


