नेशनल डेयरी बोर्ड 3 साल में 2500 नई समितियां बनाएगा नेशनल डेयरी बोर्ड ने छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ के ब्रांड देवभोग का अधिग्रहण कर लिया है। एक जनवरी से इसकी प्रक्रिया चल रही थी। एक अप्रैल से यहां के कर्मचारी बोर्ड के अधीन काम करने लगे हैं। कोरोना के बाद से खराब हुई आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए यह निर्णय लिया गया है। अधिग्रहण के साथ ही आने वाले तीन साल में 2500 नई समितियां बनाने का निर्णय लिया गया है, ताकि दुग्ध उत्पादक किसानों की संख्या बढ़े और उन्हें ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके। रायपुर और बिलासपुर स्थित प्लांट की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी। प्रदेश में बिलासपुर व रायपुर में देवभोग के संयंत्र हैं। रायपुर के संयंत्र की क्षमता 50 हजार और बिलासपुर की क्षमता 30 हजार लीटर दूध के प्रोसेसिंग की है। कोरोना के बाद देवभोग की आर्थिक स्थिति बिगड़नी शुरू हुई। पिछले तीन सालों में घाटे की स्थिति बनी हुई थी। केंद्र सरकार द्वारा नेशनल डेयरी बोर्ड के जरिए घाटे में चल रहे दुग्ध संघों की आर्थिक स्थिति सुधारने की पहल की जा रही है, ताकि दुग्ध उत्पादन बढ़े और किसानों को भी लाभ हो। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश व झारखंड में दुग्ध संघों के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई। देवभोग के अधिग्रहण के संबंध में जनवरी में ही सहमति बन गई थी। राज्य दे रहा ढाई रुपए दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा पशुपालन विभाग के जरिए योजनाएं चलाई जा रही हैं। पशुपालकों को सब्सिडी के साथ लोन दिया जा रहा है। दुग्ध उत्पादकों को परेशानी न हो, इसलिए डेयरी फॉर्म से ही सीधे प्रोसेसिंग यूनिट तक पहुंचाने की सुविधा दी जाती है। किसानों को दूध की गुणवत्ता के आधार पर 32.36 रुपए से 55.56 रुपए प्रति लीटर तक भुगतान किया जा रहा है। इसमें ढाई रुपए राज्य सरकार अलग से देती है। बता दें कि बिलासपुर स्थित देवभोग संयंत्र 1987 से संचालित हो रहा है। पहले इसे सांची के नाम से जाना जाता था।
दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा, कर्मचारियों को भी लाभ
कोरोना के बाद देवभोग की आर्थिक स्थिति बिगड़ी थी। करीब तीन साल से नुकसान में चल रहा था। केंद्र सरकार की दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहन देने की योजना के तहत नेशनल डेयरी बोर्ड को देने की योजना पर सहमति बनी। एक जनवरी से इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई थी। एक अप्रैल से देवभोग अब नेशनल डेयरी बोर्ड के अधीन काम करेगा। इससे दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। दुग्ध उत्पादक किसानों के साथ-साथ कर्मचारियों को भी लाभ होगा। ज्यादा क्षमता वाले संयंत्र लगाए जाएंगे।
-कानू सिंह बेहरा, एचआर देवभोग


