आस्था, शक्ति, संस्कृति और सभ्यता को कैनवास पर जीवित:’आरम्भम और सुरम्य’ का जेकेके की सुकृति और सुरेख आर्ट गैलरी में आयोजन

भरतनाट्यम, कत्थक, बेले जैसी ट्रेडिशनल और वेस्टर्न डांस फॉर्म्स की मुद्राएं और हरकतों को बारीकी से कैनवास पर उकेरा। कुछ ऐसा ही नजारा था जवाहर कला केंद्र के सुकृति और सुरेख आर्ट गैलरी में शुरू हुई आर्ट एग्जीबिशन ‘आरम्भम और सुरम्य’ का। शहर में स्थित द अटेलिएर्स हब आर्ट स्टूडियो की ओर से आयोजित हुए पहले एनुअल एग्जीबिशन में लगभग 70 पेंटिंग्स डिस्प्ले की गई। जिसमें आठ यंग आर्टिस्ट्स ने अपनी क्रिएटिविटी शोकेस की। साथ ही आर्टिस्ट हेमल कंकरवाल ने भी अपने पहले सोलो शो में जीवंत भावनाओं का अनावरण किया। 23 दिसंबर तक चलने वाली चार दिवसीय कला प्रदर्शनी में योगेंद्र सिंह, शिवानी गुर्जर, मोहित राठौड़, सलोनी सोनी, पूजा प्रजापत, प्रियंका सोखल, ख़ुशी मीणा और युवराज सिंह ने चारकोल और ऑइल पेंटिंग के माध्यम से आस्था, शक्ति, संस्कृति और सभ्यता को अपनी कलाकृतियों में दर्शाया। वहीं आर्टिस्ट हेमल कंकरवाल ने भी चारकोल और ऑइल पेंटिंग के माध्यम से तैयार की 20 पेंटिंग्स में हिंदुस्तानी नृत्य सभ्यता को जीवित किया। अपने कलेक्शन के बारे में हेमल ने बताया कि बचपन से पेंटिंग, भरतनाट्यम और आर्टवर्क का काफी शौक था मगर छोटी उम्र में शादी हो गई थी। जिम्मेदारियों के दबाव के चलते पेंटिंग से नाता टूट गया, अब 19 साल बाद फिर एक बार अपने अधूरे सपने पूरे करने की कोशिश कर रही हूं। जिसके चलते ये मेरे जीवन की पहली सोलो आर्ट एग्जीबिशन है, डांस के प्रति अपने प्रेम को मैंने कैनवास पर भी दिखाया है। उन्होंने बताया- मुझे फिर से पेंटिंग ब्रश उठाने में मेरे परिवार, पति और बच्चों ने मुझे काफी मोटीवेट किया जहां बच्चें मेरे सबसे बड़े क्रिटिक है और मेरी सबसे बड़ी बेटी ने मुझे आर्ट को प्रोफेशन के तौर पर जारी रखने में काफी हिम्मत दी।

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