राजधानी का मोवा क्षेत्र इन दिनों अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा विमर्श का केंद्र बना हुआ है। कालड़ा बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय राइनो-प्लास्टी (नाक की कॉस्मेटिक सर्जरी)वर्कशॉप में इंग्लैंड से आए मशहूर प्लास्टिक सर्जन डॉ. नासिर ने शिरकत की। डॉ. नासिर और डॉ. सुनील कालड़ा ने मिलकर 10 जटिल मामलों की सफल सर्जरी की। वर्कशॉप में देशभर से पहुंचे प्लास्टिक सर्जनों ने आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण लिया। नाक की बनावट को सुधारने और उसे नया आकार देने की बारीकियों को लेकर दैनिक भास्कर के लिए डॉ. सुनील कालड़ा ने डॉ. नासिर से विशेष बातचीत की। डॉक्टर नासिर ने बताया कि यूके में नशे के चलते, जबकि भारत में जन्मजात विकृति, दुर्घटना में लगी चोट से बिगड़े नाक के आकार को ठीक करने के चलते राइनो-प्लास्टी के मामले ज्यादा हैं। यहां पेश हैं दोनों के बीच हुई बातचीत के प्रमुख अंश- बतौर सर्जन आप किस तरह के मामले देख रहे हैं?
– यूके में कॉस्मेटिक राइनो-प्लास्टी का चलन काफी बड़ा है। भारत में भी अब इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। यहां जन्मजात विकृति, चोट या कटे होंठ-तालू के बाद नाक की डिफॉर्मिटी के केस ज्यादा मिलते हैं। वहीं इंग्लैंड में कोकीन जैसे नशे के कारण सेप्टम खराब होने के मामले अधिक हैं, जिसे ‘कोकीन राइनोप्लास्टी’ कहा जाता है। क्या अधिकतर केस जन्मजात होते हैं या दुर्घटना के बाद के?
– दोनों तरह के केस आते हैं। कुछ लोग जन्म से ही चौड़ी, टेढ़ी या मोटी नाक के साथ होते हैं। कई बार बचपन में चोट लगने से हड्डी टेढ़ी हो जाती है। बड़े होने पर वे कॉस्मेटिक सुधार के लिए आते हैं।
क्या सुंदर दिखने की चाहत से केस बढ़े हैं?
– बिल्कुल। आज लोग अपने चेहरे को लेकर जागरूक हैं। नाक चेहरे का प्रमुख आकर्षण है। कई लोग अपने पसंदीदा सेलिब्रिटी जैसी प्रोफाइल चाहते हैं, जिससे कॉस्मेटिक सर्जरी के केस बढ़े हैं।
सर्जरी में जोखिम कितना है?
– यह कॉस्मेटिक सर्जरी की सबसे जटिल प्रक्रियाओं में से एक है। इसमें हड्डी, कार्टिलेज और त्वचा की संरचना को ध्यान में रखना पड़ता है। प्रशिक्षित प्लास्टिक सर्जन और अच्छे सेटअप में सर्जरी कराने से जोखिम न्यूनतम रहता है, अन्यथा संक्रमण या विकृति की आशंका हो सकती है।
सर्जरी की प्रक्रिया और रिकवरी कैसी रहती है?
– जरूरत पड़ने पर पसली की कार्टिलेज, कान के पीछे या सेप्टम से टिश्यू लेकर नाक का आकार दिया जाता है। जिन मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होती है, उनमें सेप्टोप्लास्टी भी की जाती है। सर्जरी के बाद 1–2 सप्ताह तक पट्टी लगती है। सूजन तीन माह तक रह सकती है और जरूरत होने पर दूसरी स्टेज की सर्जरी 9 माह बाद की जाती है।


