UPSC की ओर से जारी सिविल सर्विस एग्जाम-2025 के फाइनल रिजल्ट में हाड़ौती संभाग (कोटा-बूंदी) के दो युवाओं ने अच्छी रैंक हासिल की है। कोटा निवासी माधवेंद्र प्रताप सिंह ने 153वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने बीटेक करने के बाद जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी में जॉब की। एक लाख रुपए महीने सैलरी थी। वर्ष 2021 में जॉब छोड़कर सिविल सर्विस की तैयारी शुरू की। अब सफलता मिली। वहीं बूंदी निवासी सौरभ शर्मा ने 146वीं रैंक हासिल की। सौरभ का जन्म बूंदी में हुआ है। उनकी पढ़ाई जोधपुर में हुई है। उन्होंने बताया- मैंने वर्ष 2021 में CA क्लियर किया था। दो इंश्योरेंस कंपनियों में जॉब का ऑफर था। लेकिन जॉब करने की बजाय मैंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। माधवेंद्र प्रताप सिंह और सौरभ शर्मा ने भास्कर से बातचीत में बताया कि इंटरव्यू के दौरान उनसे इंटरेस्टिंग सवाल पूछे गए। माधवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया- इंटरव्यू में मुझसे पूछा गया कि आप अपने नाम के आगे क्या देखना चाहते हो IAS या IPS… नेम प्लेट मन में बनाना जरूरी है या बाहर बनाना ज्यादा जरूरी है। वहीं सौरभ शर्मा ने बताया- इंटरव्यू में मुझसे पहला सवाल 1857 की क्रांति के विभिन्न पहलुओं पर पूछा गया। इंटरव्यू में पूछा- नेम प्लेट मन में बनाना जरूरी या बाहर बनाना
153वीं रैंक हासिल करने वाले माधवेंद्र प्रताप सिंह ने भास्कर से बातचीत में इंटरव्यू से जुड़े अनुभव बताए। माधवेंद्र ने बताया- मेरे पिता रेलवे में जॉब करते हैं। इसलिए मुझसे रेलवे से जुड़े सवाल पूछे गए। वहीं किसानों पर भी सवाल पूछे। इंटरव्यू के दौरान लोकसभा चल रही थी तो चुनाव प्रक्रिया से संबंधित सवाल पूछे गए। उन्होंने कहा- सबसे इंटरेस्टिंग सवाल मुझसे पूछा गया कि आप अपने नाम के आगे क्या देखना चाहते हो IAS या IPS… नेम प्लेट मन में बनाना जरूरी है या घर के बाहर बनाना ज्यादा जरूरी है। ज्यादा मुश्किल कहां होता है। मैंने जवाब दिया- मन में बनाना ज्यादा मुश्किल होता है। वो मेहनत से बनती है। माधवेंद्र ने कहा- कोटा कोचिंग के बारे में भी पूछा कि कोचिंग इंडस्ट्री का क्या करना चाहिए? बंद करना चाहिए? आपके हिसाब से क्या होना चाहिए। गणित और प्रशासनिक सेवाओं को जोड़कर सवाल पूछा गया। भ्रष्टाचार को कम करने के लिए आप अपने क्षेत्र में क्या करेंगे क्या कदम उठाएंगे। सौरभ शर्मा से पूछा- 1857 की क्रांति पहला स्वतंत्रता संग्राम था या सिपाहियों का विद्रोह
UPSC फाइनल में 146वीं रैंक हासिल करने वाले सौरभ शर्मा ने भी इंटरव्यू से जुड़े अनुभव शेयर किए। सौरभ ने बताया- मेरा बैकग्राउंड कॉमर्स सब्जेक्ट से है, लेकिन इंटरव्यू के दौरान पहला प्रश्न 1857 क्रांति के बारे में पूछा गया। इतिहास पर भी प्रश्न पूछा। इसके अलावा मेरे बैकग्राउंड कॉमर्स और राजस्थान से जुड़े सवाल भी पूछे गए। सौरभ शर्मा ने कहा- पहला सवाल 1857 की क्रांति के विभिन्न पहलुओं पर था। मुझसे पूछा गया कि कुछ लोग इसे पहला स्वतंत्रता संग्राम कहते हैं। कुछ लोग इसे सिपाहियों का विद्रोह बताते हैं, यह विरोधाभास क्यों है? मैंने इसके बारे में पढ़ा हुआ था तो मैंने उसके बारे में बता दिया। माधवेंद्र प्रताप सिंह को पांचवे प्रयास में मिली सफलता
माधवेंद्र प्रताप सिंह को 5वें प्रयास में सफलता मिली। इससे पहले 4 प्रयास में प्री ही क्लियर हुआ था। माधवेंद्र के पिता नरेंद्र प्रताप सिंह रेलवे में जॉब करते हैं। वे सवाई माधोपुर में चीफ टिकट इंस्पेक्टर (CTI) हैं। मां रेनू सिंह हाउस वाइफ हैं। माधवेंद्र प्रताप सिंह ने वर्ष 2016 से 2020 तक आईआईटी खड़गपुर से बीटेक किया। इसके बाद 1 साल मुंबई में रहकर जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी में टेक्निकल इंजीनियरिंग पोस्ट पर जॉब की। एक लाख रुपए महीने सैलरी थी। वर्ष 2021 में जॉब छोड़कर सिविल सर्विस की तैयारी शुरू की। सिविल सर्विस में जाने का ख्याल कॉलेज के आखिरी 2 साल में आया था। माधवेंद्र ने बताया- मेरी पब्लिक डीलिंग ज्यादा थी। साथ ही जॉब करते समय मुझे लगा कि सिविल सर्विस में जाकर बहुत कुछ किया जा सकता है। चार प्रयासों में सफलता नहीं मिलने के बावजूद मन में कभी सिविल सर्विस छोड़ने का ख्याल नहीं आया। मेरा एक ही फोकस था। या तो सिविल सर्विस क्लियर करूंगा या वापस प्राइवेट सेक्टर में जाऊंगा। जब मैं दोस्तों और दूसरों को देखता था कि सब सक्सेसफुल हैं, आगे बढ़ रहे हैं। कहा- मम्मी और पापा का मिला सपोर्ट
माधवेंद्र ने बताया- विश्वास के साथ अपना फोकस रखता। मम्मी-पापा और दोस्तों का सपोर्ट मिला। मेरे मन में था कि मुझे यह करना ही है और मैंने किया। मैंने तैयारी कोटा से की है। कोचिंग से ऑनलाइन टेस्ट ले रखे थे, वो टेस्ट देता था। इंटरव्यू की तैयारी के लिए दिल्ली चला गया। वहां कोचिंग में करीब 1 महीने तक मॉक इंटरव्यू दिए। सुबह उठकर 15 मिनट में स्टडी टेबल पर बैठ जाता था। दिन के 8 घंटे पढ़ाई की। मेंस में 11-12 पढ़ाई की। पिछले चार साल से मोबाइल से दूरी बनाए रखी। समय मिलने पर मूवी देखता, गाने सुनता था। सौरभ शर्मा ने 2021 में CA क्लियर की, लेकिन यूपीएससी की तैयारी की
सौरभ ने बताया- उनका जन्म बूंदी में हुआ है, लेकिन पढ़ाई जोधपुर में हुई। 5वें प्रयास में उन्हें यूपीएससी में सफलता मिली। इससे पहले तीन प्रयास में प्री क्लियर किया, एक में मेन क्लियर हुआ। सिविल सर्विसेज के बारे में वर्ष 2021 में टीचर क्षितिज महर्षि ने बताया था। उन्होंने बताया था कि इसके जरिए समाज सेवा, देश सेवा, नीति निर्माण में योगदान, लोगों के जीवन को बदल सकते हैं। तब मुझे लगा UPSC की तैयारी करनी चाहिए। उन्होंने बताया- मैंने वर्ष 2021 में CA क्लियर किया था। दो इंश्योरेंस कंपनियों में जॉब का ऑफर था। लेकिन जॉब करने की बजाय मैंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। चार प्रयासों में सफलता नहीं मिली। जब सफलता नहीं मिलती तो कभी-कभी नर्वसनेस लगता है। थोड़े व्याकुल हो जाते हो, लेकिन जब लक्ष्य आपके सामने हो तो लक्ष्य निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। मेरे साथ भी यही हुआ। जब भी मुझे थोड़ी निराशा हुई। तब मैं अपने लक्ष्य के बारे में सोचता था। तीसरे प्रयास में मेन्स में कम नंबर आए थे। इसके बाद मुझे राइटिंग की काफी प्रैक्टिस करनी पड़ी। लेखन शैली में सुधार लाना पड़ा। 5वें प्रयास में मेन्स के बाद सितंबर 2025 में अहमदाबाद EFPO में अकाउंट ऑफिसर पद पर जॉब लग गई थी। सौरभ ने बताया- मैंने पढ़ाई के लिए कोचिंग नहीं की, लेकिन कुछ कोचिंग से टेस्ट सीरीज जॉइन की। इंटरव्यू तैयारी के लिए कुछ कोचिंग में जाकर मॉक इंटरव्यू दिए थे। घर पर ही पढ़ाई की। पढ़ाई के अलावा योग करना, गिटार बजाना, गाने सुनना और बर्ड वॉचिंग में टाइम स्पेंड करता हूं।


