इंदौर में ऑटो ड्राइवर चुकाएगा 16 लाख का मुआवजा:6 सवारियों से भरे रिक्शे को मारी थी टक्कर; काटना पड़ा था फरियादी का पैर

इंदौर की कोर्ट ने एक ऑटो रिक्शा चालक को 16 लाख रुपए से ज्यादा का मुआवजा देने का आदेश दिया है। उसने साढ़े तीन साल पहले 6 सवारियों से भरे ऑटो रिक्शा को टक्कर मार दी थी। हादसे में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था। इलाज के दौरान पैर काटना पड़ा। उसका रिश्तेदार भी घायल हुआ था। पीड़ित व्यक्ति ने मुआवजे के लिए कोर्ट में क्लेम किया। इसमें उसने दोनों रिक्शा मालिकों-ड्राइवर से 15 लाख रुपए मुआवजा देने की गुहार लगाई थी। सुनवाई के दौरान सवारी रिक्शा में मोटर यान अधिनियम का उल्लंघन करने पर इंश्योरेंस कंपनी की कोई जवाबदेही नहीं पाई गई। दूसरी ओर, टक्कर मारने वाले रिक्शे का इंश्योरेंस नहीं था। कोर्ट ने उसके मालिक (ड्राइवर) को जिम्मेदार माना और जिसका पैर काटना पड़ा, उसे 15.68 लाख रुपए और दूसरे घायल को 50 हजार रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया है। लापरवाही से ऑटो चलाते हुए टक्कर मारी थी
घटना 15 मार्च 2021 की है। इस दिन बड़वानी जिले के सेंधवा निवासी मंशाराम बरडे (40), पत्नी काशी, रिश्तेदार चंपा लाल बरडे, राकेश, किरण सहित 6 लोग ऑटो रिक्शा (MP46-R0323) में बैठकर जा रहे थे। तभी चाचरिया रोड (सेंधवा) पर एक ऑटो (MP46-R0563) के ड्राइवर ने लापरवाही से रिक्शा चलाते हुए टक्कर मार दी। रिक्शा पलटी खा गया। हादसे में मंशाराम का एक पैर बुरी तरह जख्मी हो गया। शरीर पर भी काफी चोटें आईं। उसे इलाज के लिए पहले सेंधवा के सरकारी अस्पताल, फिर एमवाय हॉस्पिटल इंदौर रेफर किया गया। यहां से उसे एक प्राइवेट हॉस्पिटल रेफर किया गया, जहां उसका पैर घुटने के ऊपर से काटना पड़ा। इसी तरह चंपा लाल का भी इलाज चला। हर महीने 15 हजार रुपए की कमाई थी
पेशे से किसान मंशाराम हर महीने 15 हजार रुपए कमाता था, लेकिन हादसे में पैर गंवाने से वह काम करने में असमर्थ हो गया। इस पर उसने और चंपा लाल ने 30 मार्च 2022 को कोर्ट में मुआवजे के लिए दोनों रिक्शा चालकों के खिलाफ केस लगाया। इसमें बताया गया कि मंशाराम के इलाज में 4 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। अब परिवार की आजीविका चलाना मुश्किल हो गया। 15 लाख रुपए मुआवजे की मांग की गई। सुनवाई के दौरान कोर्ट में ये दलील दी
मामले में बड़वानी जिले के फाल्याखेड़ी निवासी और रिक्शा (MP46-R0323) के मालिक मुन्ना सिंह वास्कले और रिक्शा चालक अकरम नरगावे निवासी वासवी (बड़वानी) के खिलाफ श्रीराम जनरल इंश्योरेंस की ओर से एडवोकेट राजेश चौरसिया ने तर्क दिए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि ऑटो रिक्शा की क्षमता 3+1 (एक चालक) की है। हादसे के दौरान ऑटो रिक्शा में 6 लोग सवार थे। यह मोटर यान अधिनियम का उल्लंघन हैं। इंश्योरेंस पॉलिसी में भी इसका जिक्र है। इसकी कॉपी भी रिक्शा मालिक को दी गई थी और कंपनी ने शर्तों से अवगत कराया था। दूसरा तर्क यह दिया कि रिक्शा का परमिट और फिटनेस नहीं था। ऐसे में कंपनी का इस मुआवजे लिए कोई उत्तरदायित्व नहीं बनता। इस तरह कंपनी की ओर से प्रमाणित किया गया कि रिक्शे में 6 लोग सवार थे और उसका परमिट-फिटनेस नहीं था। इस पर कोर्ट ने इंश्योरेंस कंपनी को इस केस के उत्तरदायित्व से मुक्त किया। दूसरी ओर, ऑटो रिक्शा (MP46-R0563) का इंश्योरेंस ही नहीं था। उसे सेंधवा निवासी रिक्शा मालिक राजेश सोलंकी खुद चला रहा था। ऑर्थोपेडिक सर्जन ने बताई स्थायी अपंगता
मंशाराम का ऑपरेशन करने वाले ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. राहुल चौधरी ने बयान दिया कि मंशाराम के दायीं जांघ की हड्‌डी, कटोरी और उंगलियों में फ्रैक्चर थे। साथ ही दाएं हाथ की उंगलियों और बाएं हाथ की उंगलियों में भी फैक्चर थे। मरीज का ऑपरेशन कर दायीं जांघ के ऊपर से काट दिया गया। परीक्षण कर 80% स्थायी अपंगता और बाएं हाथ के लिए 10% अपंगता का सर्टिफिकेट जारी किया गया था। सारी दलीलों के बाद कोर्ट ने दिया यह आदेश
सारे तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने 13 दिसंबर को आदेश दिया कि मंशाराम को 15.68 लाख रुपए का मुआवजा दावा पेश करने की तारीख 20 अप्रैल 2022 से अदायगी तक मय 6% के सालान दर से पाने का हकदार है। रिक्शा (MP46-R0563) के मालिक (ड्राइवर) को यह राशि एक माह में ट्रिब्यूनल के सामने जमा करनी होगी। यह राशि जमा होने के बाद मंशाराम के खाते में आधी राशि भुगतान की जाएगी। बाकी आधी राशि दो साल के लिए एफडी के रूप में जमा होगी। कोर्ट ने रिक्शा मालिक रिक्शा (MP46-R0563) को यह भी आदेश दिया है कि वह श्रीराम जनरल इंश्योरेंस को भी वकील पत्र, फीस आदि खर्च के एक हजार रुपए अदा करें। इंश्योरेंस कंपनी को क्षतिपूर्ति से ऐसे मिली छूट
इंश्योरेंस कंपनी के एडवोकेट राजेश चौरसिया के मुताबिक पीड़ित पक्ष ने दोनों ऑटो रिक्शा के खिलाफ केस पेश किया था। इसमें रिक्शा (MP46-R0563) की श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने बचाव में तर्क दिया कि ऑटो रिक्शा में 6 सवारियों को बैठाया गया था। यह मोटर यान अधिनियम का उल्लंघन है और कंपनी क्षतिपूर्ति लिए उत्तरदायी नहीं है। सुनवाई में कंपनी की ओर से जवाब पेश करने के साथ साक्ष्यों का क्रॉस किया गया। इसमें प्रार्थी ने खुद स्वीकार किया कि उसके सहित छह लोग रिक्शा में सवार थे। इस पर कोर्ट ने माना कि मोटर यान अधिनियम का उल्लंघन होने से इंश्योरेंस कंपनी क्षति पूर्ति के लिए उत्तरदायी नहीं है और दायित्व से मुक्त किया। महंगा पड़ा गाड़ी का इंश्योरेंस नहीं कराना
कोर्ट ने मंशाराम को 15.68 लाख रुपए और चंपालाल को 50 हजार रुपए देने का आदेश दिया है। यह भुगतान रिक्शा (MP46-R0563) के मालिक को करना होगा क्योंकि गाड़ी का इंश्योरेंस नहीं था। इंश्योरेंस ​​​​​​कंपनी के​ एडवोकेट राजेश चौरसिया के मुताबिक यह केस वाहन मालिकों और चालकों के लिए एक नजीर है। इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के बाद वाहन मालिक और चालक यह मान लेते हैं कि अब उनका क्षति पूर्ति का कोई दायित्व नहीं है। यह खबर भी पढ़ें… इंदौर कोर्ट में फरियादी ने हादसे को हमला बताया तीन लोगों ने एक व्यक्ति के साथ मारपीट की। उसे डंडे-सरिए से पीटा। मारपीट के दौरान पैर में सरिए से छेद हो गया। आरोपियों ने उसकी बाइक को आग लगाकर जला दिया। पुलिस ने घटना की शिकायत पर तीन आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया। 6 महीने बाद धारा 326 बढ़ा दी। कोर्ट में केस की सुनवाई हुई लेकिन यहां शिकायतकर्ता की कहानी झूठी साबित हो गई। यहां खबर भी पढ़ें…

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