जो मेरे भीतर शुद्ध परमात्मा है वह में हूं” जो इस “भावना” का शुद्ध भाव से ध्यान करता है, वह सम्यक दर्शन ज्ञान चरित्र को प्राप्त कर मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। मुनि प्रमाण सागर महाराज ने शनिवार को प्रातःकालीन धर्मसभा में “भावना योग” कराते हुए छत्रपति नगर दलालबाग में यह बात कही। इसके बाद दोपहर में 1:30 बजे शंका समाधान के पश्चात मुनिसंघ का मंगल विहार छत्रपति नगर से रेवतीरेंज की ओर हुआ। रात्रि विश्राम सिद्ध विहार कॉलोनी में होकर रविवार को प्रातः नवीन जिनालय की आधारशिला रखने के उपरांत मुनिसंघ रेवतीरेंज की ओर प्रस्थान करेंगे तथा आहार चर्या वहीं संपन्न होगी। यहां पर दौपहर एक बजे सहस्त्रकूट जिनालय की आधारशिला मुनि प्रमाणसागर महाराज ससंघ एवं मुनि विनम्र सागर महाराज ससंघ एवं आर्यिका दुर्लभ मति संसघ सानिध्य में रखी जाएगी। मुनिश्री ने कहा “भावना योग”तन को तो स्वस्थ करता ही है, यह मन को भी मस्त कर आत्मा को पवित्र बनाता है। इसके नियमित प्रयोग से केंसर जैसे रोग पर भी विजय प्राप्त की जा चुकी है। ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं। में तो यहां तक कहता हूं कि नियमित भावना योग करने वालों की “अकाल मृत्यु” नहीं होगी। इससे इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होता है तथा खोया हुआ आत्मविश्वास बढ़ता है। यह प्रमाणित हो चुका है जिन लोगों ने नियमित भावना योग किया उनके विचारों में सकारात्मकता आई,तथा नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिली। उन्होंने कहा कि आप लोग गुरु से आशीर्वाद लेते हो और आपका मन प्रसन्न हो जाता है यह क्या है? यह भी हमारे अवचेतन मन पर पड़ने बाला एक प्रभाव ही तो है, अवचेतन मन पर आशीर्वाद से अंतः स्रावी ग्रंथियां में परिवर्तन आता है तो हमारे अंदर उत्साह और नवऊर्जा का संचार होता है तथा आनंद कीअनुभूति होती है और सभी कार्य सहज में होते चले जाते हैं। उन्होंने आशीर्वाद की चर्चा करते हुए कहा कि हमारे अंदर जितनी भी मनोविकृतियां हैं यहां तक कि जो लोग मानसिक अवसाद से ग्रसित होकर आत्महत्या की भावना तथा अनिद्रा जैसी बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं, उन्हें इन बीमारियों से मुक्ति मिली है। मुनिश्री ने एक प्रयोग कराते हुए कहा कि ऐसा कोई व्यक्ति सभा में नहीं होगा, जिसे कभी गुस्सा नहीं आया हो अथवा किसी के गुस्से का शिकार ना बना हो। जिन लोगों को बात-बात पर गुस्सा आता हो ऐसे लोगों को नियमित भावना योग करना चाहिए। “मुझे शांत रहना है” इस एक बोध वाक्य ने लोगों की जिंदगियां बदल दी उन्होंने कहा कि “मुझे शांत रहना है” का बोध वाक्य जब हम बारबार दोहराते हैं तो उसका असर हमारे अवचेतन मन पर पड़ता है और धीरे धीरे हमारा गुस्सा शांत हो जाता है,उन्होंने कहा कि ऐसे कयी प्रमाण सामने आऐ है, अनेक लोग जो प्रचंड क्रोधी थे वह शांतमूर्ति बन गए। सभा में यदि कोई हों तो वह भी नियमित 90 दिन का अभ्यास करें तो उनके जीवन में वह भी व्यापक परिवर्तन महसूस करेंगे। उन्होंने कहा कि “भावनायोग” से जिन बच्चों का पड़ने में मन नहीं लगता था उन विद्यार्थियों की एकाग्रता बढ़ी और आत्मविश्वास के साथ परफॉर्मेंस मजबूत हुआ वह नीट तथा आईआईटी जैसी परिक्षा में अच्छी रेंक के साथ उत्तीर्ण हुए। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू एवं प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया तेज ठंड का प्रभाव के बाबजूद भी बहुत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हुए। भावनायोग के पश्चात “मंगलभावना” के साथ सभा का समापन हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री निर्वेगसागर महाराज, मुनि श्री संधान सागर महाराज सहित समस्त क्षुल्लक विराजमान थे। धर्मसभा के श्रीजी की शोभा यात्रा निकली। इसमें शोधर्म इन्द्र भूपेंद्र जैन हाथी पर सवार होकर धर्म ध्वजा के साथ एवं कुबेर इन्द्र नरेंद्र नायक, राकेश नायक, राजेन्द्र नायक रथ पर विराजमान श्रीजी को लेकर जिनालय पहुंचे। इस अवसर डॉ जैनेन्द्र जैन, कमल जैन, डीएल जैन. प्रकाश दलाल, कैलाश वेद, अनिल जैन, परवार समाज महिला संगठन की अध्यक्ष मुक्ता जैन आदि समाज जन उपस्थित हुए।


