इंदौर शहर में अवैध रूप से संचालित निजी अस्पतालों को लेकर दायर जनहित याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, इंदौर खंडपीठ में हुई सुनवाई के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। नगर निगम इंदौर ने कोर्ट में जवाब पेश कर स्वीकार किया कि शहर में 16 निजी अस्पताल बिना वैध भवन अनुमति के संचालित हो रहे हैं। मंगलवार को जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद अपना जवाब प्रस्तुत नहीं कर सके, जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। आवासीय और कोचिंग अनुमति पर चल रहे अस्पताल नगर निगम की ओर से कोर्ट को बताया गया कि कई अस्पताल ऐसे भवनों में संचालित हो रहे हैं, जिन्हें आवासीय अथवा कोचिंग संस्थान की अनुमति दी गई थी। इन भवनों में अस्पताल संचालन के लिए आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां नहीं ली गईं। 31 अस्पताल संचालकों को नोटिस मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने शहर के 31 निजी अस्पताल संचालकों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई में सभी संबंधित पक्षों को उपस्थित रहने के आदेश भी दिए गए हैं। कूटरचित दस्तावेजों का आरोप याचिकाकर्ता चर्चित शास्त्री की ओर से एडवोकेट ने कोर्ट को बताया कि कुछ अस्पताल नगर निगम और फायर सेफ्टी शाखा के कथित कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर संचालित किए जा रहे हैं। इस पर कोर्ट ने सभी पक्षों के तर्क सुनते हुए विस्तृत जवाब तलब किया है।


