इंदौर को सीधे खंडवा से जोड़ने वाली इंदौर-सनावद रेलवे लाइन गेज परिवर्तन को लेकर अब वन विभाग ने भी सक्रियता दिखाई है। दरअसल, चल रहे काम में मुक्तियारा-बलवाड़ा के बीच काटे जाने वाले पेड़ों की जगह उसकी तुलना में 10 गुना पेड़ लगाना है। जिसके लिए जगह की जरूरत है। इंदौर के मुख्य वन संरक्षक (क्षेत्रीय) को एचएस मोहंता अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने पत्र लिखा है। जिसमें एक माह में कार्रवाई करने के लिए कहा है। पत्र में यह भी लिखा है कि इस प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग सीधे पीएमओ से हो रही है। कई बार इस प्रकरण के संबंध में शासन स्तर पर भी चर्चा की जा चुकी है। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 3 फरवरी को लिखे पत्र में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मोहंता ने कहा कि इंदौर डीएफओ ने जानकारी दी है कि इस योजना में 454.127 हेक्टेयर वनभूमि प्रभावित हो रही है। जिसमें से इंदौर वन मंडल की 407.922 हेक्टेयर एवं बड़वाह वन मंडल की 46.2050 हेक्टेयर जमीन है। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार इस तरह प्रकरणों में दो गुने वन क्षेत्र में रोपण किया जाना है। इस प्रकरण में प्रभावित वन भूमि 454.127 हेक्टेयर का दुगना 909.00 हेक्टेयर रोपण के लिए दोगुने बिगड़े वन क्षेत्र की जरूरत होगी। एक माह में प्रस्ताव भिजवाएं इंदौर के डीएफओ ने अपने पत्र में बताया है कि झाबुआ वन मंडल में 571 हेक्टेयर की रोपण योजना तैयार करा ली गई है। शेष 338 हेक्टेयर बिगड़े वन क्षेत्र चयन की आवश्यकता है। योजना जल्द तैयार करवाएं। एक माह में समस्त औपचारिकताएं पूर्ण कराते हुए प्रस्ताव इस कार्यालय को भिजवाएं, ताकि प्रकरण में स्वीकृति प्राप्त करने की कार्रवाई की जा सके। जंगलों से गुजरेगी लाइन
नई रेलवे लाइन इंदौर, महू, चोरल, बड़वाह व खरगोन के जंगलों से गुजरेगी। नई रेलवे लाइन परियोजना के लिए इंदौर वन विभाग के अधीन इंदौर, महू, चोरल की 300 से ज्यादा हेक्टेयर जमीन वन विभाग दे रहा है। नई रेलवे लाइन डालने के लिए जितने पेड़ कटेंगे, उसकी क्षतिपूर्ति के लिए इंदौर वन विभाग को रेलवे 10 गुना पेड़ लगाने के लिए भारी-भरकम राशि देगा, मगर सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इंदौर वन विभाग को शासन 10 गुना ज्यादा जमीन इंदौर जिले में कहां से देगा, इसलिए अब जमीन तलाशना सबसे बड़ी चुनौती है।


