भास्कर न्यूज | अमृतसर दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा मानावाला आश्रम में 3 दिवसीय आध्यात्मिक सत्संग किया जा रहा है। जिसमें दूसरा दिन की शुरुआत करते भाई रविंदर सिंह ने वहां उपस्थित संगत के समक्ष अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि हमारे संत-महापुरुष कहते हैं कि इस संसार में इंसान का कुछ भी नहीं है, लेकिन आज का इंसान यही भूल कर बैठा है कि यह संसार उसका अपना है। वह इस अनमोल जीवन की अनमोलता को भूल गया है। हमारे महापुरुषों का कहना है कि यह मनुष्य जन्म 84 लाख योनियों को भुगतने के बाद प्राप्त होता है। आज इंसान ‘मेरे’ और ‘मुझे’ के चक्कर में ऐसा फंस गया है कि वह भूल गया है कि कठिनाइयों से प्राप्त हुए इस मानव जीवन को कैसे सार्थक बनाया जाए। इंसान अपने कर्मों के कारण ही सुख और दुख प्राप्त करता है। कर्म हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग हैं, लेकिन हमें विचार करना है कि हमें कौन से कर्म करने चाहिए और कौन से नहीं। उन्होंने कहा कि यह शरीर एक पिंजरा है, जिसमें आत्मा रूपी पक्षी निवास करता है। पिंजरा टूटने पर पक्षी जैसे उड़ जाता है, वैसे ही मृत्यु के बाद आत्मा इस शरीर से निकल जाती है। इस मौके पर तरलोचन सिंह, हरदीप सिंह, तरुणदीप सिंह ने गुरबाणी के शबदों का गायन किया।


