इलाज के लिए कोई बाहर न जाए, यही टार्गेट:SGPGI के 41वें स्थापना दिवस पर बोले प्रो. आरके धीमन-‘मैं यहां के फर्स्ट बैच का स्टूडेंट’

यूपी के टॉप मेडिकल संस्थान, संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) आज 41 साल का हो गया। देश-दुनिया के कई दिग्गज डॉक्टर यहीं से पढ़ाई कर निकले और नाम रोशन किया। यहां के कई बड़े डॉक्टर्स की दुनिया भर में पहचान है। दैनिक भास्कर ने संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमन से बातचीत की और SGPGI के 41 साल के सफर को जाना। साथ ही चुनौतियों के बारे में भी चर्चा की। कैंपस@लखनऊ सीरीज के 66वें एपिसोड में SGPGI लखनऊ के निदेशक पदमश्री प्रो. आरके धीमन से खास बातचीत… संस्थान ने हर क्षेत्र में बहुत तरक्की की है। विशेषतौर पर पेशेंट केयर, टीचिंग एंड ट्रेनिंग, रिसर्च तीनों से क्षेत्र में काम हुआ है। संस्थान की शुरुआत में जितने डिपार्टमेंट थे आज के समय उसमें दोगुना से तीन गुना तक का इजाफा हुआ है। पेशेंट केयर भी लगातार बढ़ रही है और कैपेसिटी केयर में भी लगातार इजाफा हो रहा। एडवांस्ड डायबीटिक सेंटर
एडवांस्ड डायबीटिक सेंटर खोलने का यही मकसद है कि डायबिटीज के मरीजों को जब आंख की बीमारी या किडनी की बीमारी होती है, तो उन्हें प्रदेश से बाहर जाना पड़ता है। इसके खुलने से आप उन्हें एक छत के नीचे ही डायबिटीज और उसके बाद डायबिटीज के कारण होने वाले कई गंभीर रोगों का इलाज मिल रहा है। यूपी की जनसंख्या 25 करोड़ में से 40 फीसदी आबादी बच्चों की है, यानी 10 करोड़। उनके लिए कोई विशेष फैसिलिटी का हॉस्पिटल नहीं था। हमने उसके एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर बनाया। उनके लिए 24 डिपार्टमेंट के साथ 575 बेड का एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर खुल रहा। अभी से ही उसके डिपार्टमेंट भी खुलने शुरू हो गए है। पेशेंट को उसकी डिमांड के अनुसार फैसिलिटी दे रहे। एक सप्ताह पहले ही 8 नए डिपार्टमेंट शुरू हो रहे हैं। इनमें से 4 पीडियाट्रिक के हैं। टीचिंग में भी हमारा भी फोकस है। एमडी, डीएम, एमसीएच और पीएचडी की सीटों में इजाफा हो रहा। पहले बैच का पहला स्टूडेंट और आज यहां का डायरेक्टर
ये सही है कि मैं यहां के पहले बैच का पहला स्टूडेंट गैस्ट्रो इंट्रोलॉजिस्ट विभाग का रहा हूं। 5 सालों से यहां का डायरेक्टर भी हूं। यहां से अटूट संबंध है। इससे पहले मैं PGI चंडीगढ़ में था। वहां भी मेरे पास बहुत कुछ था। हेपेटाइटिस C और वायरल हेपेटाइटिस के लिए मैं पूरे पंजाब के लिए काम करता था। वो प्रोग्राम इतना प्रसिद्ध हुआ कि नेशनल वायरल प्रोग्राम लांच किया गया। इसके अलावा भी कई चीजें वहां कर रहा था। इसके बावजूद मैं यहां आया। अब 5 साल पूरे हो रहे हैं। हर कोई जानता है कि पिछले 5 सालों में बहुत काम हुआ है। मेरे लिए इतना ही बहुत है। इन क्षेत्रों में काम करना बाकी
एक्सपेंशन की कोई लिमिट नही होती है। मैटरनल और चाइल्ड केयर यहां नहीं है। फार्माकोलॉजी यहां नहीं है। आउट रीच प्रोग्राम के लिए भी कोई इनिशिएटिव नहीं है। पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट भी नहीं है। इन क्षेत्रों में भी काम किया जाना चाहिए। इससे न केवल SGPGI पूरे प्रदेश की आबादी को फायदा मिलेगा। प्रदेश वासियों के लिए मैसेज
सीएम योगी के कार्यकाल में प्रदेश में मेडिकल सेवाओं में बहुत इजाफा हुआ है। आने वाले दिनों में यहां कई और सुविधाओं का इजाफा होगा। मैं ये चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश से कोई भी गंभीर मरीज ये कहकर इलाज कराने बाहर ना जाए कि उसका यहां पर इलाज नहीं हो सकता। देखें पूरा वीडियो…

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