ईरान-इजराइल जंग से जेट-फ्यूल मार्च में 6% महंगा:रुपया गिरने से भी भारतीय एयरलाइंस के मुनाफे पर असर; एअर इंडिया की 40% इंटरनेशनल उड़ानें प्रभावित

भारतीय एविएशन इंडस्ट्री एक बार फिर मुश्किल दौर से गुजर रही है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में उछाल, डॉलर के मुकाबले गिरता रुपया और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने एयरलाइंस की प्रॉफिटेबिलिटी यानी मुनाफे पर दबाव बढ़ा दिया है। हालांकि, ग्राउंडेड विमानों की संख्या में कमी आने से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन इंटरनेशनल रूट्स पर उड़ानों के रद्द होने और रूट बदलने से एयरलाइंस का खर्च बढ़ गया है। मार्च में 6% महंगा हुआ जेट फ्यूल, ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ी एयरलाइंस के लिए फ्यूल सबसे बड़ा खर्च होता है। कुल ऑपरेटिंग खर्च में इसकी हिस्सेदारी 30% से 40% तक होती है। फरवरी 2026 तक 11 महीनों में ATF की एवरेज कीमत 91,173 रुपए प्रति किलोलीटर (KL) थी, लेकिन मार्च 2026 में यह 6% बढ़कर 96,638 रुपए प्रति KL पर पहुंच गई है। अगर कोविड से पहले (वित्त वर्ष 2020) के स्तर से तुलना करें, तो तब कीमत 64,715 रुपए प्रति KL थी। यानी अब भी कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। मिडिल ईस्ट में तनाव और ईरान-इजराइल जंग के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है, जो एयरलाइंस के लिए बड़ा रिस्क है। रुपया 9% कमजोर हुआ, डॉलर में पेमेंट करना महंगा वित्त वर्ष 2026 में भारतीय रुपया करीब 9% तक कमजोर हुआ है। एयरलाइंस के कई बड़े खर्च डॉलर में होते हैं, जैसे… रुपया गिरने से इन सभी खर्चों का बोझ बढ़ गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि घाटे में चल रही एयरलाइंस के लिए कम मार्जिन के बीच यह दोहरी मार जैसा है। ईरान-इजराइल युद्ध और पाकिस्तान एयरस्पेस बंद होने से खर्च बढ़ा मिडिल ईस्ट में तनाव और पाकिस्तान एयरस्पेस के लगातार बंद रहने से भारतीय एयरलाइंस को अपने इंटरनेशनल रूट्स बदलने पड़ रहे हैं। एमके ग्लोबल की रिपोर्ट के मुताबिक, रूट बदलने से फ्लाइट टाइम बढ़ गया है और इससे फ्यूल की खपत भी ज्यादा हो रही है। हालांकि एयरलाइंस इस बढ़े हुए खर्च का कुछ हिस्सा पैसेंजर्स से वसूलने की कोशिश करेंगी, लेकिन घरेलू बाजार में बढ़ते कॉम्पिटिशन की वजह से किराए में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी करना मुश्किल होगा। एअर इंडिया और इंडिगो की क्षमता पर असर HSBC की रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्ट संकट का सबसे ज्यादा असर एअर इंडिया, स्पाइसजेट और इंडिगो की इंटरनेशनल उड़ानों पर पड़ रहा है… यूरोप और मिडिल ईस्ट के कई रूट्स पर उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं, जिससे एयरलाइंस का रेवेन्यू घट रहा है। ग्राउंडेड विमानों की संख्या में कमी आई इंडस्ट्री के लिए एक अच्छी खबर यह है कि खड़े हुए यानी ग्राउंडेड विमानों की स्थिति सुधर रही है। ICRA की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट किंजल शाह के मुताबिक, इंजन की खराबी और सप्लाई चेन की दिक्कतों की वजह से सितंबर 2023 में 20-22% विमान खड़े थे। फरवरी 2026 तक यह घटकर 13-15% रह गया है। फिलहाल देश में करीब 117 विमान ही ग्राउंडेड हैं। जैसे-जैसे नए विमान बेड़े में शामिल होंगे, सप्लाई और डिमांड के बीच तालमेल बेहतर होगा।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *