उदयपुर के खेमली स्थित कंटेनर डिपो से गुजरात के मोरबी के लिए सीधी कंटेनर रेल परिवहन सेवा का आगाज हो गया है। भारतीय कंटेनर निगम लिमिटेड (कॉनकोर) की इस पहल से मेवाड़ के खनिज और टाइल्स उद्यमियों को बड़ा लॉजिस्टिक सपोर्ट मिलेगा। उदयपुर से खेमली की दूरी करीब 20 किलोमीटर है। इस सेवा के तहत पहली कंटेनर ट्रेन 28 फरवरी 2026 को खेमली से रवाना की गई, जो रिकॉर्ड 28 घंटे के भीतर मोरबी के राफलेश्वर स्थित गति शक्ति कार्गो टर्मिनल (जीसीटी) पहुंच गई। इसका मुख्य उद्देश्य मोरबी के सिरेमिक उद्योग में इस्तेमाल होने वाले फेल्डस्पार जैसे कच्चे माल को किफायती दरों पर पहुंचाना है। भारतीय कंटेनर निगम लिमिटेड (कॉनकोर) की इस पहल से उदयपुर और आसपास के क्षेत्र के खनिज कारोबारियों को बड़ा फायदा होने वाला है। अब यहां से निकलने वाला कच्चा माल बेहद कम समय और सस्ती दरों पर मोरबी के विश्व प्रसिद्ध सिरेमिक हब तक पहुंच सकेगा। इस नई सेवा के जरिए खेमली डिपो से मोरबी के राफलेश्वर स्थित गति शक्ति कार्गो टर्मिनल (जीसीटी) तक मालगाड़ी का संचालन शुरू किया गया है। इसका सबसे बड़ा मकसद मोरबी के टाइल्स और सिरेमिक उद्योग में इस्तेमाल होने वाले फेल्डस्पार जैसे कच्चे माल को रेल के जरिए सुगमता से पहुंचाना है। अब तक उद्यमियों को सड़क मार्ग के भरोसे रहना पड़ता था, जो न केवल महंगा था बल्कि उसमें समय की अनिश्चितता भी रहती थी। रेल सेवा शुरू होने से लॉजिस्टिक्स की यह बड़ी बाधा दूर हो गई है। कॉनकोर का खेमली डिपो पहले से ही देश के दूरदराज के इलाकों जैसे कोलकाता, गुवाहाटी, गाजियाबाद, बैंगलोर और चेन्नई के लिए नियमित रूप से कंटेनर ट्रेनों का परिचालन कर रहा है। अब मोरबी को इस सूची में शामिल करने से मेवाड़ के कारोबारियों के लिए सस्ती और सुगम दरों पर माल भेजने का नया रास्ता खुल गया है। इस सुविधा से मेवाड़ क्षेत्र के उद्यमियों को कई स्तर पर सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। सबसे बड़ा फायदा ‘कॉस्ट कटिंग’ के रूप में होगा। थोक परिवहन के लिए रेल हमेशा से सबसे किफायती माध्यम रहा है, जिससे उद्यमियों की सप्लाई चेन की दक्षता में सुधार होगा। इसके अलावा, परिवहन समय में कमी आने से व्यापार चक्र तेज होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रेल आधारित लॉजिस्टिक्स पर्यावरण के अनुकूल है, जिससे ‘ग्रीन ट्रांसपोर्ट’ को बढ़ावा मिलेगा और सड़क पर भारी वाहनों का दबाव कम होगा। उदयपुर-मोरबी कंटेनर ट्रेन सेवा न केवल मेवाड़ के खनिज उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी, बल्कि यह हरित परिवहन की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। स्थानीय कारोबारियों का मानना है कि इस सीधी कनेक्टिविटी से उनके उत्पादों की पहुंच बढ़ेगी और लागत कम होने से वे बाजार में ज्यादा मजबूती से टिक पाएंगे। यह रेल सेवा आने वाले समय में मेवाड़ और गुजरात के औद्योगिक रिश्तों को और ज्यादा मजबूत करेगी।


