भाजपा नेत्री के कुछ भाजपा नेताओं संग एआई से आपत्तिजनक वीडियो-फोटो बनाकर ब्लैकमेल करने के आरोपी अधिवक्ता विशाल गुर्जर की मंगलवार को जमानत अर्जी खारिज हो गई है। यह फैसला अपर सेशन न्यायाधीश क्रम संख्या-4 के पीठासीन अधिकारी जितेंद्र गोयल ने सुनाया। अदालत ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है। इस स्तर पर जमानत दिए जाने से साक्ष्यों से छेड़छाड़ व गवाहों को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद अधिवक्ता विशाल की जमानत अर्जी जोधपुर हाईकोर्ट में दायर की जाएगी। आरोपी के अधिवक्ता ने दलील दी कि एफआईआर कथित घटना के 4-5 माह बाद दर्ज हुई। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल नहीं किए। अधिवक्ता ने केस डायरी में आरोपी की निशानदेही पर मेमोरी कार्ड, आपत्तिजनक वीडियो एवं कार्यालय में लगे हिडन कैमरे की जब्ती का उल्लेख है। दूसरे पक्ष ने एफएसएल जांच लंबित होने व अपराध की गंभीरता कोदेखते हुए जमानत का विरोध किया। दूसरी ओर, अधिवक्ता विशाल को गत 11 फरवरी की रात 4 बजे घर से उठाने के दौरान पुलिस के साथ औजारों से लैस दिखने वाले लोगों के खिलाफ भी पुलिस की चुप्पी की चर्चा रही। हालांकि, यह मामला मुख्यमंत्री कार्यालय जयपुर तक पहुंच चुका है। वहीं, कोर्ट परिसर व बाहर अधिवक्ताओं के बीच दबी जुबान में मंगलवार को दिनभर चर्चा चलती रही कि आरोपी अधिवक्ता विशाल को उसके घर से तथाकथित लोगों के साथ पुलिस ऐसे कैसे उठाने पहुंची? भाजपा में उदयपुर से जयपुर तक मंथन, निर्णय नहीं इस मामले में शहर भाजपा से लेकर प्रदेश भाजपा में सियासी मंथन चलता रहा। जिन तथाकथित भाजपा नेताओं के नेत्री संग आपत्तिजनक वीडियो-फोटो होने का दावा किया जा रहा है, उन्होंने अब प्रदेश स्तर पर बोल दिया है कि वीडियो-फोटो बाहर नहीं आएंगे। कुछ ने तो यह तक बोल दिया कि वीडियो-फोटो हैं ही नहीं। वहीं, विरोधी गुट ने कहा कि इन्होंने आरोपी अधिवक्ता के घर में तोड़फोड़ कर वीडियो-फोटो नष्ट करने का प्रयास जरूर किया है, लेकिन आज नहीं तो कल, वीडियो-फोटो जरूर बाहर आएंगे, यानी वायरल होंगे। इससे पार्टी की छवि खराब हो सकती है। अब पार्टी के आला अधिकारी असमंजस में हैं कि अगर अभी हटा दिया तो पार्टी के बारे में लोग क्या सोचेंगे? कहीं, वीडियो जारी हो गए तो मामला फिर दिल्ली के हाथ पहुंच जाएगा और प्रदेश स्तरीय नेताओं पर सवाल उठाए जाएंगे। बहरहाल, पार्टी पदाधिकारी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके हैं। बांसवाड़ा सांसद रोत सरकार और पुलिस पर बरसे बांसवाड़ा सांसद राजकुमार रोत ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रदेश सरकार और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सांसद रोत ने आरोप लगाते हुए लिखा है कि यह लोकतंत्र नहीं, पुलिसिया दमन का क्रूरतम चेहरा है। इस सरकार ने उदयपुर संभाग की हालत औपनिवेशिक काल से भी बदतर बना दी है। कानून की रक्षक पुलिस को यहां की कानून व्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं है। उसका काम सिर्फ सत्ताधारियों के काले कारनामों को ढकने और उनके लिए संसाधन लूट के कार्य में सहयोग करना रह गया है। यहां पुलिस एक गिरोह की तरह कार्य कर रही है। अब आधी रात को हथौड़े-सब्बल लेकर गुंडों के साथ वकील के घर दबिश दे रही है। यही कानून का राज है? बेलगाम सत्ताधारियों ने यहां के आम नागरिक का जीना दूभर कर दिया है। कानून का राज खत्म हो चुका है और उसकी जगह सरकारी क्रूरता ने ले ली है। संसाधनों की लूट और जनता का दमन, यहां उदयपुर संभाग में तो इस सरकार का यही असली रिपोर्ट कार्ड है। हमारे पूर्वजों के सपने को साकार कर भील प्रदेश का गठन ही इस क्रूरता से मुक्ति का मार्ग है।


