उदयपुर में आयड़ और मामेर चौकी को बनाया जाएगा थाना:नए थानों में भूपालपुरा, सुखेर, हिरणमगरी और प्रतापनगर के कुछ इलाके हो सकते हैं शामिल

राजस्थान बजट में मिली सौगातों के बाद उदयपुर में पुलिस-प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। जिले में दो नए थानों (आयड़ और मामेर) की स्थापना की जाएगी, जिससे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिसिंग व्यवस्था मजबूत होगी। आयड़ चौकी को थाना बनाया जाएगा, जबकि कई मौजूदा थानों की सीमाओं का पुनर्गठन कर नए क्षेत्रों का गठन किया जाएगा। आयड़ थाने के लिए भूपालपुरा, प्रतापनगर, सुखेर और हिरणमगरी में आने वाले कुछ इलाकों को कम किया जाएगा। वहीं, जिले के कोटडा समेत अन्य थानों के कई इलाकों को अलग कर उन्हें मामेर थाने में रखा जाएगा। इस कदम से पुलिस की रिस्पॉन्स क्षमता बढ़ने और अपराध नियंत्रण में सुधार की उम्मीद है। SP की रिपोर्ट के बाद गृह विभाग से जल्द मिलेगी अंतिम मंजूरी सीमांकन को लेकर जल्द जिला पुलिस अधीक्षक (SP) की रिपोर्ट के बाद गृह विभाग से अंतिम मंजूरी मिलेगी। इसके बाद ही वार्ड और सड़क के अनुसार थानों की नई सीमाएं तय की जाएगी। थाने के शुरू होने में करीब 4 से 6 महीने का समय लग सकता है। हालांकि थाने के लिए बिल्डिंग और अन्य कामों के लिए लंबा वक्त लगेगा। आयड़ चौकी के थाना बनने का सबसे ज्यादा असर सुखेर थाने पर पड़ेगा एक्सपर्ट की माने, तो आयड़ चौकी के नए थाने में तब्दीली से सुखेर और भूपालपुरा जैसे बड़े थाना क्षेत्रों का भूगोल बदल जाएगा। हालांकि प्रतापनगर और हिरणमगरी के कुछ हिस्से भी आयड़ थाना क्षेत्र में जा सकते है। आयड़ चौकी के थाना बनने का सबसे ज्यादा असर सुखेर थाने पर पड़ेगा। इसमें न्यू भूपालपुरा, शोभागपुरा, न्यू आरटीओ, बोहरा गणेश जी, यूनिवर्सिटी रोड के साथ दुर्गा नर्सरी रोड, सेवाश्रम, ठोकर, बीएन कॉलेज, सुभाषनगर और कुम्हारों के भट्टें को शामिल किया जा सकता है। एक अनुमान के मुताबिक, सुखेर थाना से यह एरिया जाने से 20 से 25 फीसदी काम कम हो सकता है। ये शहर के सबसे बड़े और व्यस्त थानों में से एक है। वही भूपालपुरा से करीब 10 से 15 फीसदी और प्रतापनगर, हिरणमगरी से भी 5-7 फीसदी एरिया में काम का बंटवारा हो सकता है। हिरणमगरी और प्रतापनगर के कुछ सीमावर्ती इलाके आयड़ थाने में जुड़ेंगे माना जा रहा है कि भूपालपुरा में फिलहान आने वाले मुख्य बाजार, वीआईपी इलाके और बड़े व्यावसायिक केंद्र अभी भी भूपालपुरा थाने के पास ही रहेंगे। प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने के लिए हिरणमगरी और प्रतापनगर के कुछ सीमावर्ती इलाकों को भी आयड़ थाने से जोड़ा जा सकता है। आमजन को अपनी समस्याओं के लिए नहीं जाना पड़ेगा दूर पुलिस अधिकारियों का मानना है कि आयड़ क्षेत्र में पिछले कुछ सालों में आबादी बहुत तेजी से बढ़ी है। यहां विश्वविद्यालय, बड़े अस्पताल और नई कॉलोनियां बनने से आपराधिक गतिविधियां और शिकायतें भी बढ़ी हैं। नया थाना बनने से आम जनता को अपनी समस्याओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। वहीं, कोटड़ा के मामेर इलाके में भी नया थाना बनने से पुलिस की ताकत बढ़ेगी। पानरवा और कोटड़ा के कुछ इलाकों को जोड़कर यह थाना बनेगा। मामेर चौकी गुजरात सीमा के पास है और यह मार्ग तस्करी के लिए बदनाम रहा है। पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि इस रूट का इस्तेमाल शराब, डोडा-चूरा और गांजा तस्करी के लिए किया जाता रहा है। अब यहां फुल-फ्लेज्ड थाना होने से पुलिस बल की संख्या बढ़ेगी और नियमित नाकाबंदी हो सकेगी। इससे सीमा पार से होने वाली तस्करी और वाहन चोरी जैसी वारदातों पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सकेगा।

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