उदयपुर-चित्तौड़गढ़ रेलवे ट्रैक पर चलती ट्रेन पर पथराव करने वाले दो नाबालिगों को रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने निरूद्ध किया है। इन किशोरों ने ट्रेन पर पत्थर फेंके थे। इससे एक युवती बुरी तरह घायल हो गई थी। पकड़े जाने के बाद दोनों को बाल सुधार गृह भेज दिया गया है। घटना 5 फरवरी की है। उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन से उदयपुर-मदार ट्रेन रवाना हुई थी। उदयपुर से अजमेर जा रही लोकल ट्रेन पर देबारी के पास झरनों की सराय इलाके में ट्रेन जैसे ही पहुंची, अचानक बाहर से पत्थर आने लगे। ये पत्थर ट्रेन की खिड़की से टकराए और अंदर बैठी 22 साल की युवती शंभूल शेख के चेहरे पर जा लगे। शंभूल फतहसागर इलाके की रहने वाली हैं। पत्थर इतनी तेजी से लगा कि उनके चेहरे पर गंभीर चोटें आईं और काफी खून बहने लगा। चलती ट्रेन में हुए इस हमले से यात्री सहम गए थे। टीम ने ऐसे बिछाया जाल
रेलवे ने इस घटना को बहुत गंभीरता से लिया। आरपीएफ प्रभारी सुरेंद्र सिंह राठौड़ और जीआरपी प्रभारी गोरधन सिंह भाटी के नेतृत्व में एक खास टीम बनाई गई। टीम ने घटनास्थल के आसपास के इलाकों और बस्तियों में जाकर पूछताछ शुरू की। काफी छानबीन के बाद पुलिस को सुराग मिला कि घटना के समय कुछ लड़के ट्रैक के पास देखे गए थे। तलाश करते हुए टीम बेडवास की गुरु नानक कॉलोनी कच्ची बस्ती पहुंची। यहां जब दो नाबालिगों से पूछताछ की गई, तो उन्होंने अपनी मां के सामने ही जुर्म कबूल कर लिया। उन्होंने माना कि उन्होंने ही 5 फरवरी को चलती ट्रेन पर पत्थर फेंके थे। इसके बाद आरपीएफ ने दोनों को डिटेन कर लिया। कानून की गिरफ्त में आरोपी
दोनों नाबालिगों को किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया गया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें बाल सुधार गृह भेजने के आदेश दिए हैं। आरपीएफ अधिकारियों का कहना है कि रेलवे एक राष्ट्रीय संपत्ति है और इसके साथ खिलवाड़ करना भारी पड़ सकता है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि कुछ लोग रेलवे ट्रैक के पास घूमते हैं या पटरियों पर पत्थर और लोहे के सरिए रख देते हैं। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि रेलवे ट्रैक पर बिना वजह घूमना या ट्रेन पर पत्थर मारना एक गैर-जमानती अपराध है। इसमें सख्त सजा का प्रावधान है। ———————————– इससे जुड़ी खबर भी पढे़ं… चलती ट्रेन पर फेंकी कांच की बोतल, युवती घायल:नाक, मुंह और सिर पर गंभीर चोटें आई; उदयपुर से अजमेर जा रही थी ट्रेन


