उदयपुर में रहस्यमयी बीमारी, पिता की मौत, बेटे ICU में:चेहरे, हाथ-पैर काले पड़ रहे; घर की महिलाओं-बच्चों में भी दिख रहे लक्षण

उदयपुर से 10 किमी दूर कलड़वास गांव में इन दिनों एक रहस्यमयी बीमारी की दहशत है। पिछले 2 महीनों में इस बीमारी के लगातार बढ़ने से रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी की जान चली गई है। उनके दोनों बेटे अस्पताल के ICU में जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहे हैं। वे अपने पिता के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो पाए। सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ होने पर उन्हें कभी-कभी वेंटिलेटर पर रखना पड़ता है। घर की महिलाओं और बच्चों में भी लक्षण नजर आ रहे हैं। उदयपुर और अहमदाबाद के प्रतिष्ठित अस्पतालों में लाखों रुपए खर्च करने के बावजूद, अभी तक पता नहीं चल पाया कि बीमारी क्या है।
नवंबर में सोहनलाल डांगी की त्वचा काली पड़ने लगी
कलड़वास गांव के रहने वाले पृथ्वीराज डांगी ने बताया- मेरा छोटा भाई सोहनलाल डांगी (61) पिछले साल 30 जून को पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट (PHED) से पंपमैन के पद से रिटायर्ड हुए थे। रिटायर्ड के केवल 6 महीने बाद नवंबर में सोहनलाल की त्वचा काली पड़ने लगी। सोहनलाल को आयुर्वेद पर विश्वास था, इसलिए लगभग डेढ़ महीने तक इलाज करवाया, लेकिन बीमारी बढ़ती रही। इसके बाद उदयपुर के एमबी अस्पताल सहित निजी अस्पतालों में इलाज करवाया। एक के बाद एक कई जांचें हुईं, जिनमें अलग-अलग संक्रमण पाए गए। 18 फरवरी को इलाज के दौरान दम तोड़ा
पृथ्वीराज डांगी ने बताया- लंबे समय तक भर्ती रहने के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद सोहनलाल अहमदाबाद के जायंडस अस्पताल में भर्ती कराया गया। चेस्ट इंफेक्शन, किडनी इंफेक्शन और त्वचा के इलाज के लिए विदेशों से महंगे इंजेक्शन और दवाइयां मंगवाई गईं, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। 18 फरवरी को इलाज के दौरान सोहनलाल की मौत हो गई। रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन का स्तर 5.5 बताया
सोहनलाल के बेटे लीलाशंकर और प्रकाश भी इसी बीमारी से पीड़ित है। परिवार की तीन महिलाएं, सोहनलाल की पत्नी प्रेमी बाई, बहू कौशल्या और भारती में भी इस बीमारी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। तीनों के शरीर का रंग काला पड़ रहा है। डॉक्टरों ने उनकी रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन का स्तर 5.5 बताया है। इसके चलते उनका हीमोग्लोबिन बढ़ाने का इलाज चल रहा है, लेकिन दिन-ब-दिन स्थिति बिगड़ती जा रही है। अब तक बीमारी का पता नहीं चला पृथ्वीराज डांगी ने बताया- 15 लाख रुपए से ज्यादा खर्च होने के बाद भी आज तक भाई की बीमारी का पता नहीं चल पाया। बस एक के बाद एक इंफेक्शन के ट्रीटमेंट दिए गए। वही स्थिति आज दोनों भतीजों की है। हम भी उसी मोहल्ले में रहते हैं, वही पानी पीते हैं और खेत के वही गेहूं खाते हैं। यदि पानी या खाने से इंफेक्शन होता, तो दूसरे घरों में क्यों नहीं हुआ? मामला गंभीर होने पर हमने स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी। टीम ने आकर पानी और तेल के सैंपल भी लिए, लेकिन 1 महीना बीतने के बाद भी आज तक कोई ठोस जवाब या जांच की रिपोर्ट नहीं दी गई है। परिवार की काउंसलिंग तक नहीं की गई
रिश्तेदार दिनेश डांगी ने बताया- प्रशासन ने सिर्फ सैंपल लेकर औपचारिकता पूरी कर ली है। बीमारी या सही इलाज को लेकर काउंसलिंग तक नहीं की गई। यदि उदयपुर और अहमदाबाद में वजह पकड़ में नहीं आ रही है, तो बाकी लोग भी सोहनलाल की तरह इस गुमनाम बीमारी की भेंट चढ़ जाएंगे। उदयपुर में विशेष डॉक्टर्स का पैनल बनाकर परिवार को दिल्ली एम्स भेजना चाहिए, ताकि बीमारी का पता चले और इलाज हो सके। पानी में केमिकल की आशंका
ग्रामीणों और परिजनों को शक है कि इस बीमारी की जड़ में दूषित पानी है। कलड़वास औद्योगिक क्षेत्र के पास होने के कारण आशंका है कि फैक्ट्रियों का रासायनिक कचरा भूजल में मिल गया है। हैंडपंप और नलकूप के पानी में केमिकल होने की वजह से परिवार बीमार पड़ा है। स्वास्थ्य विभाग ने नमूने तो लिए हैं, लेकिन रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है। एक जान जाने के बाद भी ठोस कदम नहीं उठाए गए। अगर समय रहते समाधान नहीं निकला, तो स्थिति और भयानक हो सकती है। फिलहाल पूरे गांव में डर है और कई परिवारों ने नलकूप का पानी पीना बंद कर दिया है। पानी-तेल की जांच रिपोर्ट सामान्य आई
उदयपुर CMHO डॉ. अशोक आदित्य ने बताया- पानी और तेल की जांच रिपोर्ट सामान्य आई है। मामले में दो संभावनाएं थीं और विभाग के उच्च अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है। आगे के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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