उदयपुर में काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए एक अच्छी खबर है। उदयपुर शहर को ‘Z’ कैटेगरी से अपग्रेड कर ‘Y’ कैटेगरी में शामिल करने की मांग अब रंग लाती दिख रही है। केंद्र सरकार ने इस दिशा में सकारात्मक संकेत दिए हैं। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने उदयपुर के सांसद डॉ. मन्ना लाल रावत को एक पत्र लिखकर बताया है कि उदयपुर को ‘Y’ श्रेणी में डालने का प्रस्ताव फिलहाल वित्त मंत्रालय के विचाराधीन है। माना जा रहा है कि अगर उदयपुर ‘Y’ श्रेणी का शहर बन जाता है, तो यहां काम करने वाले केंद्र और राज्य सरकार के हजारों कर्मचारियों की सैलरी बढ़ जाएगी। उन्हें मिलने वाला मकान किराया भत्ता (HRA) और दूसरे भत्ते पहले के मुकाबले ज्यादा मिलेंगे। सांसद की पहल पर मिला जवाब
दरअसल, उदयपुर के सांसद डॉ. मन्ना लाल रावत ने 21 जनवरी को केंद्र सरकार को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने तर्क दिया था कि उदयपुर अब सिर्फ एक छोटा शहर नहीं रह गया है। यह एक बड़ा टूरिज्म हब है, यहां बड़े एजुकेशनल इंस्टीट्यूट हैं और यह प्रशासनिक केंद्र भी है। शहर तेजी से फैल रहा है, इसलिए यहां तैनात कर्मचारियों को बड़े शहरों की तर्ज पर सुविधाएं मिलनी चाहिए। सांसद के इसी पत्र के जवाब में केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने 10 फरवरी को अपनी प्रतिक्रिया दी है। मंत्री ने साफ किया कि सांसद द्वारा भेजे गए दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर विभाग जांच कर रहा है। विभाग अब इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या उदयपुर की वर्तमान स्थिति ‘Y’ कैटेगरी के मानकों को पूरा करती है। क्यों जरूरी है श्रेणी का बदलना?
शहरों की श्रेणियों के आधार पर ही सरकारी कर्मचारियों के भत्ते तय होते हैं। उदयपुर अभी ‘Z’ श्रेणी में आता है, जहां सुविधाएं और भत्ते कम मिलते हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में उदयपुर में महंगाई और मकानों के किराए तेजी से बढ़े हैं। यहां हर साल लाखों देसी-विदेशी पर्यटक आते हैं, जिससे लिविंग कॉस्ट यानी रहने का खर्च बढ़ गया है।
कर्मचारी संगठन लंबे समय से मांग कर रहे थे कि उदयपुर को ऊंची श्रेणी का दर्जा दिया जाए ताकि उन्हें आर्थिक राहत मिल सके। अब वित्त मंत्रालय की सक्रियता से उम्मीद जगी है कि जल्द ही शहर का पुनर्वर्गीकरण (री क्लासिफेकेशन) हो जाएगा। विकास की गति को मिलेगा फायदा
सांसद डॉ. रावत ने केंद्र सरकार का आभार जताते हुए कहा कि उदयपुर की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इसे ‘Y’ श्रेणी में शामिल करना शहर के हक में होगा। उन्होंने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार जल्द ही इस पर अंतिम मुहर लगा देगी। अगर ऐसा होता है, तो न केवल कर्मचारियों की जेब भरेगी, बल्कि शहर की साख भी एक बड़े मेट्रो सिटी की तर्ज पर बढ़ेगी।


