उदयपुर जिले के प्राइमरी शिक्षा विभाग में टीचरों की भारी कमी है। यहां कुल 8777 पदों में से 7710 ही भरे हैं, जबकि 1067 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। सरकार भले ही दावा करे कि रिक्त पदों को भर रही है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जिले में 2175 प्राइमरी स्कूल हैं, और सबसे ज्यादा कमी सेकंड ग्रेड टीचरों की है, जो इन स्कूलों में हेडमास्टर की भूमिका निभाते हैं। धरियावद विधायक थावरचंद के पिछले दिनों विधानसभा में लगाए सवाल पर सरकार की और से दिए जवाब में ये आंकड़े सामने आए है। इसके तहत उदयपुर जिले के प्रारंभिक शिक्षा विभाग में 8777 पद में से 7710 भरे है और 1067 पद खाली पड़े है। इसके जवाब में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बताया था कि माध्यमिक शिक्षा में लेक्चरर और सीनियर टीचर के पद 50% पदोन्नति और 50% सीधी भर्ती से भरे जाते हैं। सेवा नियमों के अनुसार, प्रारंभिक शिक्षा में लेवल-1 और लेवल-2 टीचर (विभिन्न विषयों) के 100% पद डायरेक्ट रिक्रूटमेंट से भरे जाते हैं। पूरे प्रदेश में लगभग 72 हजार स्कूल हैं, जिनमें उदयपुर में प्राइमरी और माध्यमिक मिलाकर 3994 स्कूल शामिल हैं। शिक्षक संगठनों के नेता कहते हैं कि शिक्षकों की नियुक्ति छात्र-शिक्षक अनुपात के आधार पर होनी चाहिए। शहरों के कई स्कूलों में 20-25 छात्रों पर 4 शिक्षक हैं, जबकि गांवों में कई स्कूल सिर्फ 1-2 शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। इससे पढ़ाई का स्तर बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा, शिक्षक संगठन लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगे शिक्षकों को वापस स्कूलों में तैनात किया जाए। उनका तर्क है कि डेपुटेशन पर दूसरी जगहों पर भेजने से पद खाली रहते हैं और छात्रों की शिक्षा पर सीधा असर पड़ता है।


