काला पानी दा मोर्चा ने पीपीसीबी अफसरों पर डाइंग इंडस्ट्रीज को अवैध रूप से लाभ पहुंचाने और तथ्य छुपाने का आरोप लगाया है। विधानसभा कमेटी को भी गुमराह किया गया है। मोर्चा ने विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवा को पत्र भेजकर इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। बताया कि विस अध्यक्ष ने 25 जुलाई 2022 को बुड्ढा दरिया एवं घग्गर नदी के संबंध में कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने बुड्ढा दरिया और घग्गर में गिरने वाले गंदे पानी की जांच कर 11 मार्च 2024 को अपनी अंतरिम रिपोर्ट सदन में पेश की। 13 अगस्त को सीपीसीबी द्वारा एनजीटी में कहा गया कि लुधियाना के डाइंग इंडस्ट्री द्वारा चलाए जा रहे 3 ट्रीटमेंट प्लांट अवैध रूप से बनाए गए हैं। उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से 2013 और 2014 को मिली पर्यावरणीय मंजूरी पेश की, जिसके अनुसार इन प्लांटों को कभी भी अपने ट्रीटेड पानी को बुड्ढा दरिया में छोड़ने की अनुमति नहीं थी। स्पष्ट शर्त थी कि उद्योग अपने ट्रीटेड पानी को बुड्ढा दरिया में नहीं बहा सकते। समिति की 81 पन्नों की रिपोर्ट में महत्वपूर्ण तथ्य का जिक्र नहीं था। एनजीटी ने बुड्ढा दरिया मामले में एमिकस क्यूरी नियुक्त किया था। उनकी रिपोर्ट से पता चला कि 50 एमएलडी ट्रीटमेंट प्लांट के 12 इंच और 8 इंच के दो अवैध पाइप नगर निगम लुधियाना की संयुक्त टीम द्वारा पकड़े गए थे। उनकी टीम को भी अंदर नहीं घुसने दिया। इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की और न ही केस दर्ज किया। पीपीसीबी के अध्यक्ष, सदस्य सचिव और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर राजद्रोह का केस दर्ज होना चाहिए। गंदे पानी को बुड्ढा दरिया में न डालें वहीं, लोकल बॉडीज मिनिस्टर डॉ. रवजोत सिंह व राज्यसभा मेंबर संत सीचेवाल के साथ गौशाला आईपीएस साइट के पास अस्थाई पंपिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया। अस्थाई पंपिंग स्टेशन का उद्देश्य गौशाला पॉइंट से एसटीपी जमालपुर तक सीवरेज पानी को पंप करना है जब तक गौशाला के स्थान पर स्थाई आईपीएस स्थापित नहीं हो जाता। आईपीएस स्थापित करने की परियोजना अदालत में चल रहे मामले के कारण लंबित है। उन्होंने गोबर व इंडस्ट्री के गंदे पानी को बुड्ढा दरिया में न डालने की अपील की। डेली गिर रहे 500 टन गोबर की बात क्यों नहीं करते पंजाब डाइंग एसोसिएशन ने काला पानी दा मोर्चा के आरोपों पर पलटवार किया है। पीडीए डायरेक्टर कमल देव चौहान ने कहा कि काला पानी दा मोर्चा वाले 54 डाइंग और लार्ज डाइंग वालों को लेकर कोई बात नहीं करते हैं जबकि उनका ऑर्डर भी 27 नवंबर 2024 को आया है। सिर्फ उन्हें ही क्यों टारगेट किया जा रहा है। बुड्ढा दरिया में डेली 500 टन गोबर जा रहा है। उसकी बात क्यों नहीं कर रहा काला मोर्चा? बद्दी में जो सीईटीपी प्लांट दवाइयां एंड डाइंग इंडस्ट्री का लगा हुआ है, उसकी बात क्यों नहीं कर रहा काला मोर्चा, उसका पानी भी सतलुज में आ रहा है? 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने भारत में सीईटीपी और एसटीपी लगाने के लिए आदेश दिए थे। एसटीपी सरकार को लगाने थे। इंडस्ट्रीज वालों ने करोड़ों खर्च कर सीईटीपी तैयार किए। पर्यावरण समिति ने कहा था कि सीईटीपी और एसटीपी का पानी मिक्स होकर 80 हजार एकड़ जमीन में सिंचाई के लिए इस्तेमाल होगा। 1988 में बाढ़ के कारण पानी सतलुज में डाल दिया था। पहले बुड्ढा दरिया मोगा की तरफ जाता था, जिसको लोअर बुड्ढा दरिया कहते हैं। लोअर बुड्ढा दरिया चालू नहीं किया गया है। सरकार को चैनल बनाने थे लेकिन कई वर्ष बीतने के बाद भी नहीं बनाए गए। ड्रेनेज विभाग ने नाले की सफाई के लिए पीपीसीबी से 36 करोड़ की मांग की थी लेकिन इसमें भी कोई प्रगति नहीं हुई। समाधान ये है कि लोअर बुड्ढा दरिया में ट्रीट पानी डाला जाए। एनजीटी में हमने पक्ष रखा है, जिसकी सुनवाई 20 फरवरी को है। भ्रष्टाचार, नेताओं के दबाव में अफसर कार्रवाई नहीं कर रहे: संत सीचेवाल इधर, राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने बुड्ढा दरिया में प्रदूषण कम नहीं होने पर कहा कि भ्रष्टाचार और पॉलीटिकल प्रेशर के कारण पीपीसीबी अफसर इंडस्ट्रीज पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। हम इंडस्ट्रीज का विरोध नहीं कर रहे हैं लेकिन डाइंग इंडस्ट्रीज वाले निर्धारित पैरामीटर पूरा करें। इंडस्ट्रियल वेस्ट सीवरलाइन में आ रहा है, इससे 225 एमएलडी एसटीपी भी फेल हो जाएगा। बुड्ढा दरिया में प्रदूषण के लिए इंडस्ट्रीज और डेयरी वाले जिम्मेदार है।


