अधिवक्ताओं के लिए विकसित रामराज नगर योजना में एक आवेदन को जेडीए ने पहले तो एक ऐसा भूखंड आवंटित कर दिया, जिस पर अतिक्रमण हो रखा था और जब आवेदक ने इस संबंध में अधिकारियों को बताया, तो एक साल बाद दूसरा भूखंड आवंटित किया। हैरानी की बात तो ये भी रही कि दूसरी बार आवंटित भूखंड पहले से छोटा तो था ही, साथ ही साथ जेडीए ने उसके बदले में ज्यादा राशि भी वसूल ली। इसी मामले में सुनवाई करते हुए राज्य उपभोक्ता आयोग की जोधपुर बेंच ने जेडीए द्वारा अतिक्रमित भूखंड देने को सेवा दोष माना, साथ ही आवेदक से वसूली गई राशि को भी ब्याज सहित लौटाने के आदेश जारी किए हैं। भूखंड पर अतिक्रमण था अधिवक्ता महेंद्र पारीक ने बताया कि मूलतया जैसलमेर के मोहनगढ़ हाल पाल रोड रूपरजत टाउनशिप निवासी अधिवक्ता जेठाराम लोहिया ने अधिवक्ता पारीक के माध्यम से राजस्थान राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, सर्किट बेंच, जोधपुर के समक्ष अपील की। इसमें बेंच के सदस्य (न्यायिक) निर्मलसिंह मेड़तवाल व सदस्य लियाकत अली के समक्ष 10 फरवरी को हुई सुनवाई में अपीलार्थी लोहिया ने जिला उपभोक्ता आयोग जोधपुर द्वारा अस्वीकार किए गए परिवाद के विरूद्ध अपील कर बताया कि जेडीए की रामराज नगर योजना में 35 हजार रुपए जमा करवाकर आवेदन किया था। वर्ष 2018 में लोहिया को कॉर्नर भूखण्ड संख्या 294 आवंटित हुआ और मई 2018 इसका आवंटन पत्र जारी किया। इसकी आरक्षित दर 5940 प्रति वर्ग मीटर रखी गई। परिवादी को मौका देखने पर पता चला कि भूखंड पर अतिक्रमण था। परिवादी ने तत्काल इसकी सूचना जेडीए को देकर राशि जमा करने की अवधि बढ़ाने का भी निवेदन किया। राज्य आयोग में अपील की थी इस पर जेडीए ने परिवादी की सहमति पर अन्य भूखंड संख्या 142 आवंटित किया, जो पूर्व में 457.75 वर्ग मीटर के स्थान पर 414.25 वर्ग मीटर का ही था। परिवादी को इस दूसरे भूखंड का आवंटन पत्र भी 1 वर्ष 7 माह बाद दिया गया। जिसकी आरक्षित दर तो 5940 ही रखी गई, लेकिन आवंटन दर 10% अधिक 7722 के स्थान पर 8494 के अनुसार जोड़ते हुए परिवादी से 3 लाख 51 हजार 781 रुपए अधिक वसूल लिए। परिवादी ने आवंटन पत्र के अनुसार राशि अंडर प्रोटेस्ट जमा करवाते हुए कब्जा ले लिया। तत्पश्चात अधिक वसूली गई राशि के विरुद्ध जिला आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया, जिसे अस्वीकार कर दिया गया। जिला आयोग जोधपुर द्वितीय के आदेश के विरुद्ध अपीलार्थी ने राज्य आयोग में अपील प्रस्तुत की। जेडीए ने कहा – अनुचित व्यापारिक व्यवहार नहीं आयोग के समक्ष जेडीए की ओर से अधिवक्ता सीएस पुरोहित ने बहस में बताया कि उपभोक्ता की आपत्ति पर दिसंबर 2019 को दूसरा आवंटन पत्र जारी कर दिया गया। जेडीए की ओर से कोई अनुचित व्यापारिक व्यवहार नहीं किया गया। परिवादी ने भूखंड की राशि देर से जमा करवाई, इसलिए ब्याज और जुर्माना राशि प्राप्त की गई है। इसलिए अपील अस्वीकार की जाए। आयोग का फैसला: दोहरा सेवा दोष आयोग ने दोनों पक्षों की सुनकर एवं उपलब्ध दस्तावेजों का अवलोकन करते हुए अपने निर्णय में कहा की अपीलार्थी को दूसरा आवंटन पत्र एक वर्ष सात माह बाद दिया गया है, जबकि परिवादी ने 10 दिन में ही अपनी आपत्ति प्रस्तुत कर दी थी। जेडीए ने जो कीमत में बढ़ोतरी की है, उसका कोई आधार नहीं है। जेडीए ने भूखंड की साइज भी कम कर दी और राशि भी ज्यादा ले ली, जो जेडीए का सेवा दोष है। इतना ही नहीं, अपीलार्थी के वैकल्पिक भूखंड देने के प्रार्थना पत्र पर निर्णय करने में भी देरी की गई, जो जेडीए का सेवा दोष है। राज्य आयोग ने जिला आयोग के आदेश को अपास्त करते हुए जेडीए को आदेश दिया कि अपीलार्थी से अधिक वसूले गए 3,51,781 रुपए ब्याज सहित अदा करें।


