उम्मीद बढ़ी:नए वर्ष में प्रोजेक्ट पर काम आगे बढ़ने के आसार, ग्रामीणों की मांग नए क्षेत्र से निकाली जाए नई रेलवे लाइन

उज्जैन-झालावाड़ रेलवे लाइन की डीपीआर इसी माह बनेगी, दिल्ली पहुंचने का समय एक घंटा कम होगा उज्जैन-आगर-झालावाड़ तक नई रेलवे लाइन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे (एफएलएस) के आधार पर फाइनल डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार किए जाने की 31 दिसंबर 2024 की डेडलाइन तय कर ली है। ये डेडलाइन पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल ने तय की है। यदि ऐसा हुआ तो नए वर्ष में प्रोजेक्ट पर काम आगे बढ़ने की उम्मीद हैं।
सांसद अनिल फिरोजिया की मांग पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उज्जैन-आगर-झालावाड़ तक नई रेल लाइन की डीपीआर के लिए एफएलएस को स्वीकृत दी थी। इस सर्वे व डीपीआर के लिए केंद्र सरकार ने 4.75 करोड़ रुपए मंजूरी किए थे। इसी क्रम में पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल ने एफएलएस का वर्कऑर्डर हैदराबाद की फर्म को जारी किया था। हाल ही में कोटा में हुई पश्चिम मध्य रेलवे कोटा मंडल के अधिकारियों, सांसदों व उनके प्रतिनिधियों की बैठक में उक्त डीपीआर की डेडलाइन सामने आई। सांसद फिरोजिया के प्रतिनिधि के रूप में बैठक में मौजूद रहे महेंद्र गादिया ने जब जीएम से जब पूछा कि सर्वे के बाद डीपीआर कब तक तैयार हो जाएगी? तो उन्होंने 31 दिसंबर की डेडलाइन बताई। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि पश्चिम मध्य रेलवे मंडल का कोटा मंडल इस डेडलाइन में डीपीआर तैयार करके रेलवे बोर्ड को प्रस्तुत कर देगा। यदि ऐसा हुआ तो नए वर्ष 2025 में इस रेल लाइन के लिए काम आगे बढ़ने लगेगा। हालांकि वित्तीय स्वीकृ​ति के बाद ही मौके पर काम दिखाई देगा। डीपीआर में मुख्य रूप से पटरी बिछाने, पुल-पुलिया-अंडर पास व स्टेशनों के निर्माण आदि के लिए जरूरी व उपयुक्त जमीन का पता चलेगा, लागत की स्थिति भी स्पष्ट होगी। उज्जैन से आगर तक सड़क के एक तरफ की बसाहट रेलवे की पुरानी लाइन पर वर्तमान में उज्जैन से आगर की पुरानी रेलवे लाइन के स्थान पर कई तरह के निर्माण हो गए हैं। बसाहट के अलावा बाजार, जंगल व खेत भी हैं। इन सभी के बीच मौके पर अभी भी पुरानी रेलवे लाइन के स्ट्रक्चर उज्जैन से आगर तक कई स्थानों पर देखे जा सकते हैं। बताया जाता है कि इस लाइन पर चलने वाली ट्रेन के लिए मकोड़ियाआम, घट्टिया, ढाबलाहर्दू, तनोड़िया में स्टेशन भी थे। घट्टिया, पिपलिया व मकोड़ियाआम नाका में टिकट घर भी हुआ करते थे। ये लाइन वर्तमान के फोरलेन-टू-लेन सड़क से सटी हुई ही थी। यानी उज्जैन से आगर तक सड़क के एक तरफ की बसाहट रेलवे की इस पुरानी लाइन वाले स्थान पर ही है। घट्टिया व घौंसला के रहवासी मांग करते आ रहे हैं कि नई रेलवे लाइन को इस तरह से बिछवाया जाए कि आबादी क्षेत्र प्रभावित न हो, नुकसान न हो। 1930-40 के दशक में उज्जैन-आगर रेलवे लाइन डाली गई बताया जाता है कि 1930 से 1940 के दशक के बीच उज्जैन से आगर तक रेलवे लाइन डाली गई थी। इस पर चलने वाली नैरो गेज ट्रेन प्रमुख रूप से गांव वालों के लिए आवागमन का प्रमुख साधन थी। क्योंकि तब बसें भी कम चलती थी और सड़कें भी अभी की तरह डेवलप नहीं थी। बाद में ये रेल लाइन 1975 से 1977 के आसपास बंद कर दी गई। उज्जैन में बढ़ती पर्यटक-श्रद्धालुओं की संख्या, सिंहस्थ व व्यापार-व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए इस लाइन को पुन: शुरू करने की जरूरत महसूस होती रही है। ​​​​​​​ नई रेल लाइन डलने से यह फायदा जीएम ने तय की डेडलाइन ^उज्जैन-आगर-झालावाड़ रेलवे लाइन के लिए डीपीआर 31 दिसंबर तक तैयार हो जाएगी। ये डेडलाइन कोटा में हुई पश्चिम मध्य रेलवे मंडल की बैठक में जीएम ने बताई है। मैं, सांसद के प्रतिनिधि के रूप में बैठक में शामिल हुआ था और इस बारे में सवाल किया था। बहरहाल उम्मीद हैं कि नए वर्ष में इस प्रोजेक्ट के लिए काम आगे बढ़ेगा।
– महेंद्र गादिया, सांसद प्र​तिनिधि

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