बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा बैठक में कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि संजीवनी और महतारी एक्सप्रेस एंबुलेंस को कॉल मिलते ही तुरंत मरीजों तक पहुंचना होगा। देरी या कॉल नहीं उठाने पर निजी कंपनियों का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। कलेक्टर ने चिरायु योजना के तहत सभी स्कूली और आंगनबाड़ी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य किया है। पिछले वित्तीय वर्ष में करीब 20 प्रतिशत बच्चे स्वास्थ्य परीक्षण से वंचित रह गए थे। इस योजना के तहत गत वर्ष लगभग साढ़े 3 हजार बच्चों का गंभीर बीमारियों का मुफ्त इलाज किया गया। बैठक में आयुष्मान कार्ड की पहुंच बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया। जिले के सभी 42 कॉलेजों में शिविर लगाकर छात्रों की मदद से आयुष्मान कार्ड बनाए जाएंगे। स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों में होने वाले पालक सम्मेलन में एनीमिया की जांच भी की जाएगी। बैठक में सीएमएचओ डॉ. प्रमोद तिवारी, सिविल सर्जन डॉ. अनिल गुप्ता, डीईओ डॉ. अनिल तिवारी और डीपीओ सुरेश सिंह मौजूद रहे। वय वंदन योजना की प्रगति पर जताया असंतोष कलेक्टर ने प्रधानमंत्री वय वंदन योजना में 70 वर्ष से ज्यादा उम्र के सभी बुजुर्गों के कार्ड निर्माण की प्रगति पर असंतोष जाहिर किया। उन्होंने कहा कि आयुष्मान कार्ड से सरकारी अस्पताल में इलाज करने पर अस्पताल सहित डॉक्टरों और स्टाफ को भी फायदा है। इसलिए विनम्र व्यवहार और सेवाभाव से ज्यादा से ज्यादा मरीजों को अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास किया जाना चाहिए। कोटा, मस्तुरी, तखतपुर में जन औषधि केंद्र खुलेंगे उन्होंने कोटा, मस्तुरी और तखतपुर सामुदायिक अस्पताल में भी जन औषधि केन्द्र खोलने के प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए। बरसात के साथ ही मौसमी बीमारियों के प्रति उन्होंने अमले को अलर्ट रहने कहा। जिला प्रशासन को इस तरह के किसी बीमारी की सूचना सरकारी तंत्र से तुरंत प्राप्त होना चाहिए। डायलिसिस में जिला अव्वल बैठक में सिविल सर्जन डॉ. गुप्ता ने बताया कि जीवनधारा योजना के क्रियान्वयन में जिला अस्पताल अव्वल स्थान पर है। प्रतिदिन 13 मशीनों से लगभग 50 मरीजों का डायलिसिस किया जाता है। कलेक्टर ने स्वास्थ्य डॉक्टरों और कर्मचारियों की समस्याएं भी सुनी और निराकरण का भरोसा दिलाया।


