करीब 11 साल पुराने एकल पट्टा मामले में अब नया मोड़ सामने आया है। मामले के लिए बनी कमेटी की जांच में ये सामने आया कि जेडीए ने खुद ही डॉक्युमेंट गायब कर दिए थे। क्योंकि जांच में आज दिन तक पता नहीं चला कि ये डॉक्युमेंट कैसे और कब गायब हो गए। अधिकारियों की ओर से इस मामले में गलत तथ्य देकर गुमशुदगी का झूठा मामला दर्ज करवाया गया था। अब 24 दिसंबर को एकल पट्टा जांच समिति के सचिव रवि शर्मा ने अशोक नगर थाने में मामला दर्ज करवाया है। रिपोर्ट में बताया गया कि तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों ने केस से संबंधित डॉक्युमेंट को षड्यंत्रपूर्वक गायब किया था और गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा सुनवाई के दिए थे निर्देश
दरअसल, 11 दिन पहले एकल पट्टा केस में हाईकोर्ट ने एक बार फिर से सुनवाई शुरू की थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मुख्य न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव की एकलपीठ में मामले की सुनवाई शुरू हुई थी। मामले में विधायक शांति धारीवाल सहित यूडीएच विभाग के तीन पूर्व अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को मामले में अतिरिक्त दस्तावेज पेश करने और आरटीआई एक्टिविस्ट अशोक पाठक को इंटरवेनर बनने के लिए प्रार्थना पत्र पेश करने को कहा था। कोर्ट ने जनवरी के अंतिम सप्ताह में मामले को फाइनल सुनवाई के लिए रखा है। दरअसल, अशोक पाठक की एसएलपी पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के 2 आदेशों को रद्द करते हुए फिर से मामले की सुनवाई करने के निर्देश दिए थे। कमेटी की जांच में पता चला डॉक्युमेंट जेडीए ने ही गायब कर दिए
दोबारा सुनवाई होने के बाद इस मामले को लेकर एक समिति बनाई गई। समिति ने नगरीय विकास और आवासन विभाग को मूल पत्रावली देने के आदेश दिए थे। इस पर शासन उप सचिव ने बताया कि ये डॉक्युमेंट ऑफिस में उपलब्ध ही नहीं है। इस पर एक सर्च पत्र जारी किया गया। सचिव ने रिपोर्ट में बताया- 8 अगस्त 2013 को अशोक थाने में डॉक्युमेंट गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई गई थी। इस दौरान दिए गए डॉक्युमेंट की समिति ने जांच की तो पता चला कि जेडीए ने खुद ही डॉक्युमेंट गायब कर दिए थे। क्योंकि जांच में आज दिन तक पता नहीं चला कि ये डॉक्युमेंट कैसे और कब गायब हो गए। अधिकारियों ने इस मामले में गलत तथ्य देकर गुमशुदगी का झूठा मामला दर्ज करवाया था। 24 दिसंबर को एकल पट्टा जांच समिति के सचिव रवि शर्मा ने यूडीएच के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। रिपोर्ट में बताया कि षड्यंत्रपूर्वक इस पूरे मामले में गलत शिकायत दी गई थी। आरटीआई कार्यकर्ता बोले- शिकायत दर्ज करवाने के लिए झूठ बोला गया
आरटीआई कार्यकर्ता अशोक पाठक ने बताया- पट्टा घोटाला में मुख्य आरोपी पूर्व मंत्री और वर्तमान में विधायक शांति धारीवाल हैं। धारीवाल को बचाने के लिए अशोक नगर थाने में मिलीभगत से थाने के परिवाद रजिस्टर में फेरबदल कर नगरीय विकास विभाग, सचिवालय जयपुर में गुम हुई पत्रावलियों का परिवाद दर्ज करवाने के लिए षड्यंत्र रचा गया। इस घोटाले की जांच के लिए बनी राजस्थान हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज आरएस राठौड़ की समिति ने जांच में यह षड्यंत्र पकड़ा है। पहले हाईकोर्ट ने केस वापस लेने को माना था सही
सुप्रीम कोर्ट ने 5 नवंबर 2024 को हाईकोर्ट के 17 जनवरी 2023 और 15 नवंबर 2022 को दिए दोनों आदेश रद्द कर दिए थे। 17 जनवरी के आदेश से हाईकोर्ट ने तत्कालीन एसीएस जीएस संधू, डिप्टी सचिव निष्काम दिवाकर और जोन उपायुक्त ओंकारमल सैनी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई को बंद कर दिया था। दरअसल, एसीबी की दो क्लोजर रिपोर्ट को एसीबी कोर्ट ने खारिज करते हुए 18 अप्रैल 2022 को कुछ बिंदुओं पर डीआईजी स्तर के अधिकारी से जांच कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद एसीबी की ओर से 19 जुलाई 2022 को तीसरी क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई थी। इसमें भी एसीबी ने एकल पट्टा प्रकरण में किसी भी तरह अनियमितताएं नहीं पाई थीं। इस पर एसीबी ने कोर्ट से इन आरोपियों के खिलाफ दायर चार्जशीट को वापस लेने की एप्लिकेशन लगाई थी। इसे एसीबी कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इनकी अपील पर 17 जनवरी 2023 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के संधू, दिवाकर और सैनी के खिलाफ केस वापस लेने को सही माना था। धारीवाल को भी हाईकोर्ट से मिली थी राहत
इस पूरे मामले में परिवादी की ओर से शांति धारीवाल को भी आरोपी बनाने का प्रार्थना पत्र लगाया गया था। इसके खिलाफ धारीवाल ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। इस पर हाईकोर्ट ने धारीवाल को राहत देते हुए 15 नवंबर 2022 को एसीबी कोर्ट में चल रही प्रोटेस्ट पिटीशन सहित अन्य आपराधिक कार्रवाई को रद्द कर दिया था। धारीवाल की ओर से कहा गया था कि उनका एफआईआर से लेकर चालान में कहीं भी नाम नहीं है। एसीबी की ओर से पेश क्लोजर रिपोर्ट में भी उनके खिलाफ कोई अपराध प्रमाणित नहीं माना गया। लेकिन, उसके बाद भी एसीबी कोर्ट ने प्रकरण में अग्रिम जांच के आदेश दिए, जो कि गलत है। अब हाईकोर्ट को 6 महीने में देना है फैसला
अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाईकोर्ट ने फिर से मामले की सुनवाई शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश खुद इस मामले की सुनवाई करे। वहीं 6 महीने के अंदर अपना फैसला दे। इसके बाद अब मामले की फिर सुनवाई शुरू हो गई है।


