बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार आशीष विद्यार्थी जयपुर में दीपांकर प्रकाश के निर्देशन में बन रही फिल्म हॉक्स की शूटिंग कर रहे हैं। नारायण निवास में शूटिंग से ब्रेक लेकर उन्होंने दैनिक भास्कर के साथ बातचीत की। उन्होंने कहा- मैंने 350 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। 11 भाषाओं में काम किया है। ऐसे में मेरे अनुभव को बांटने के लिए मैं मोटिवेशनल स्पीकर बना। कोविड के खालीपन ने ब्लॉगर बना दिया। यहां से जिंदगी का नजरिया बदल गया। मैं साधारण लोगों की कहानियां दुनियाभर में पहुंचाना चाह रहा हूं, जिनका खाना और काम दूसरों को इंस्पायर कर सकूं। ऐसे में फूड ब्लॉगर के रूप में आगे बढ़ रहा हूं, मैं फूड क्रिटिक नहीं हूं। सवाल: जयपुर में दीपांकर के साथ फिल्म कर रहे हैं, किस तरह की फिल्म है और किस तरह का किरदार है? आशीष विद्यार्थी: मैं पहली बार जयपुर के दीपांकर प्रकाश के साथ फिल्म कर रहा हूं। देखा जाए तो यह एक पूरी कॉमर्शियल फिल्म ही लग रही है। साथ काम कर रहा हूं तो देख पा रहा हूं कि यह बहुत रियलिस्टिक तरीके से फिल्म को शूट कर रहे हैं। उनके साथ काम करने में बड़ा मजा आ रहा है। सवाल: इन दिनों आप फूड ब्लॉगर भी हैं, फूड टेस्टिंग का एक नया ट्रेंड आप बतौर बॉलीवुड सेलिब्रिटी लेकर आए हैं, इसकी शुरुआत से लेकर कुछ खास लम्हों के बारे में बताएं? आशीष विद्यार्थी: यह सब बाय चांस हुआ। जब लॉकडाउन खत्म हुआ था तो घर में रहते हुए क्या करें ऐसा विचार मन में था। ऐसे में मेरे एक यंग साथी है, 27 साल के स्वप्निल। उसने कहा- आप नई चीज खाते हैं। इन दिनों मार्केट में एक नई चीज आई है रील। आप वड़ा पाव खाइए और मैं उसे वर्टिकली शूट करूंगा। मैं ठीक है बोला। उसने शूट भी कर लिया। वह रील काफी चली और काफी चर्चा में रही। सच कहूं मैं फूड क्रिटिक के तौर पर काम नहीं करता हूं। मैं कभी किसी फूड को अच्छा या बुरा या उससे बेहतर नहीं बताता हूं। मैं पूरा इंडिया घूमता हूं। बतौर एक्टर, मोटिवेशनल स्पीकर, फूड ब्लॉगर और स्टैंड अप कॉमेडियन के रूप में। मैं जहां घूमता हूं, वहां पर कुछ समय निकलता हूं। उस जगह की बहुत ही साधारण और अमेजिंग चीजों को ढूंढने निकल जाता हूं। मजा तब आता है, जब सो कॉल्ड साधारण जगह पर मुझे अमेजिंग महसूस होता है। जो लोग कम चीजों का सहारा लेकर दुकान चलाते हैं, मुझे उन जगहों पर जाने में बड़ा मजा आता है। अब मैं उनकी कहानियों को बताता हूं। सवाल: ऐसी कोई कहानी जो आपको स्ट्रीट पर मिली और आपके लिए भी यादगार बन गई, उसके बारे में जरा बताएं? आशीष विद्यार्थी: मुझे यहां पर बहुत सारी ऐसी अच्छी कहानियां मिली, जो प्रेरणादाई भी रही। सेकेंड लॉकडाउन जब खत्म हुआ था, धीरे-धीरे सब चीज खुल रही थीं। मैं धर्मपुर गया था, वहां पास में सोलन के रास्ते में बाइक के जरिए जा रहा था। वहां एक रास्ते पर मैगी की नई दुकान खुली थी बिंदु के नाम से। उसे खुले हुए कुछ एक हफ्ते के करीब हुआ था। वहां पति-पत्नी और उनका बेटा बना रहे थे। उन्होंने बताया कि हमारा कुछ और काम था। लॉकडाउन के बाद अब खुद का शुरू किया है। मैं वहां खाया उन्हें बनाते हुए कैप्चर किया। वह बहुत टेस्टी था। हल्की सी ठंड थी। गरम-गरम मैगी का स्वाद चखा। वहां आसपास का जो माहौल था, मैंने उसे वीडियो में दिखाए। वह चीज बहुत जबरदस्त तरीके से हिट हुई। उसके बाद में दो-तीन बार वहां गया हूं। अब हालात यह है कि वह संडे को ऑफ रखते हैं। वह काफी सक्सेसफुल हो गया है। ऐसी बहुत सी कहानी है, जो मेरे दिमाग में आज भी जिंदा है। सवाल: बतौर फूड ब्लॉगर अपने जयपुर को किस तरह से एक्सप्लोर किया? आशीष विद्यार्थी: मैं यहां पर कई सालों से लगातार आता रहा हूं, लेकिन इस बार यह काफी अमेजिंग रहा। मेरे एक नए मित्र बने हैं पवन झा साहब। पवन के साथ में सुबह 6:30 बजे निकला था। हमारे साथ में एक्टर राजेंद्र गुप्ता जी भी थे। सुबह 9:30 बजे तक हम जयपुर की गलियों में घूमते रहे। फिर उसके बाद में रात को हम दोबारा घूमे। ऐसी नई-नई चीज मैंने अनुभव की, जिसमें खाने से लेकर गोविंददेव जी के दर्शन भी शामिल थे। हम यहां पर गुलाब जी चाय वाले के यहां भी गए जहां पर सुबह-सुबह सैकड़ों लोग चाय पीने पहुंचते हैं। साहू चाय वाले के भी हमने चाय पी। एक सज्जन के पास हमने गोलगप्पे भी खाए, हालांकि उसकी लोकेशन मुझे याद नहीं है। यहां पर एक गजब के अंडे की दुकान है। उसका नाम संजय आमलेट है। उसकी कहानी भी सुनी। संजय ने काफी चैलेंज के बाद इस दुकान को जयपुर की हिट दुकान बनाया। मोहम्मदी पैलेस भी गया, वहां की नली निहारी और खमीर की रोटी का कोई जवाब नहीं है। इसके साथ ही आजकल मैं स्टैंड अप कॉमेडी कर रहा हूं। इसे भी 1 साल हो गया है। इसके तकरीबन 80 से ज्यादा शो हो चुके हैं। यहां से मैं कल सुबह इंदौर जा रहा हूं। उसके बाद कोलकाता में शो करूंगा। उसके बाद भुवनेश्वर में शो है। उसके बाद में बेंगलुरु में एक टॉक के लिए जा रहा हूं क्योंकि मैं एक मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में भी काम कर रहा हूं। सवाल: एनएसडी से निकले आशीष विद्यार्थी से लेकर आज आप स्टैंड अप कॉमेडियन, मोटिवेशनल स्पीकर, फूड ब्लॉगर सहित कई तरह की भूमिका में है। खुद की जर्नी को किस तरह देखते हैं? आशीष विद्यार्थी: एक चीज को हमेशा जान लीजिए कि किसी भी दो शख्स की जिंदगी एक जैसी नहीं होती है। ऐसे एक तरह की लाइफ कभी परफेक्ट नहीं होती है। दूसरी बात यह है कि आप खुद को री इन्वेंट करने की तरह कम करें। क्योंकि समय लगातार बदल रहा है। जब आप खुद में इन्वेंट करते हैं, खुद को अलग-अलग तरीके से प्रयोगवान बनाते हैं तो लाइफ को जीने का एक नजरिया बदल जाता है। लोगों को यह चाहिए होता है कि आप उनके लिए काम आए। मैं हिन्दी में एक्टर के तौर पर लोगों के दिलों को जीता। फिर मैंने देखा कि मैं दूसरी भाषाओं में भी काम कर सकता हूं। ऐसे में मैं 11 अलग-अलग भाषाओं में काम किया। 350 फिल्मों में अब तक काम कर चुका हूं। ऐसे में फिल्मों के जरिए लोगों के काम आया। 12-13 साल पहले मैंने सोचा कि मेरे पास बहुत सारे एक्सपीरिएंस हैं। ऐसे में लोगों को अपनी जिंदगी के बारे में बहुत कुछ शेयर कर सकता हूं, जिसे वह मोटिवेट भी हो सकते हैं। इसलिए मैं मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में काम करने लगा। मैं लीडरशिप कन्वर्सेशन करता हूं। कम्युनिकेशन को लेकर वर्कशॉप करता हूं। यह सब मेरी चाहती चीज हैं। एक डेढ़ महीने के अंदर मेरा एक वर्चुअल एक्टिंग कोर्स भी शुरू कर रहा हूं। वह भी लोगों के लिए खास होने वाला है। इसमें मैं यह बताने वाला हूं की एक्टिंग आसान है, हम लोग कई बार किसी चीज को मुश्किल बना देते हैं। ताकि लोग नहीं कर पाए। मेरा यह मानना है कि कोई भी एक्टिंग कर सकता है। मैने इस एक्टिंग वर्कशॉप को ऐसे डिजाइन किया है कि देश के किसी भी कोने में आप बैठे हो आप इस कोर्स का हिस्सा बन सकते हैं। इसमें उम्र की भी कोई सीमा नहीं है हर उम्र के लोग इसमें हिस्सा ले सकते हैं। सवाल: स्टैंड अप कॉमेडी को लेकर देश में एक अलग तरह का माहौल चल रहा है। कुछ कलाकार विवाद में भी आए हैं। ऐसे युवा कलाकारों को आप कुछ सलाह देना चाहे तो बताएं? आशीष विद्यार्थी: मैं किसी को सलाह नहीं देता हूं। हर व्यक्ति अपनी जर्नी निर्धारित करता है। मैं सिर्फ यही बात कहूंगा कि आपको वही चीज करनी चाहिए जिस पर आपको खुद को यकीन है। दूसरी बात यह है कि आपको यह मानकर चलना चाहिए कि जब भी सोसाइटी में कुछ करेंगे तो पुश बैक होगा। यही लाइफ का हिस्सा है। जिंदगी में बदलाव आएगा और उसे पर रिएक्शन होगा। हमें समिति का हिस्सा बने रहना है। कभी-कभी कुछ फिसलन आ जाती है, लेकिन अपने आप को कंट्रोल कर लेना चाहिए। सोसाइटी को भी यह मानना चाहिए कि जो क्रिएटिव लोग होते हैं, वह अपनी लिमिट्स को पुश करते हैं। ऐसे में वे बुरे लोग नहीं हैं अच्छे लोग भी हैं। हो सकता है कुछ ऐसी चीज हैं जो आप लोगों को पसंद नहीं आए, लेकिन हम सभी को मौका चाहिए, ऐसे किसी को गिरा कर, खत्म करना सही नहीं है। ऐसे में जिंदगी में खुद को मौका देना चाहिए, दूसरों को भी मौका देना चाहिए और खुद पर यकीन रखना चाहिए, दुनिया में अच्छाई है।


