जिले में जन्मजात टेढ़े पैर यानी क्लब फुट से पीड़ित बच्चों के लिए राहत की खबर है। अब चूरू में बिना सर्जरी के आधुनिक पोंसेटी तकनीक से फ्री इलाज हो सकेगा। मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में हर सप्ताह ऐसे बच्चों का इलाज होगा। डीईआईसी सेंटर प्रभारी बिजेंद्र भाटी का कहना है कि जिले में हर साल इस विकृति से पीड़ित औसतन 65 से ज्यादा बच्चे सामने आ रहे हैं। इनमें से चिह्नित बच्चों का इलाज ऑपरेशन से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत करवाया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. एमएम पुकार का कहना है कि कॉलेज परिसर में जल्द शुरू होने वाले नए अस्पताल में हर सप्ताह इस तकनीक से बच्चों का इलाज शुरू किया जाएगा। इसके लिए स्वीकृति दे दी है। क्योर इंडिया संस्थान के माध्यम से अमेरिका से ब्रूस स्मिथ और यूके से हेनरी वुड बुधवार को चूरू आए। उन्होंने बताया कि पोंसेटी तकनीक पूरी तरह गैर-सर्जिकल है। इसमें क्रमिक कास्टिंग, प्लास्टर, ड्रेसिंग के उपयोग से धीरे-धीरे पैर को सही स्थिति में लाया जाता है। समय पर इलाज शुरू होने पर चार से छह सप्ताह में स्पष्ट सुधार दिखाई देता है। इस तकनीक की सफलता दर 90 फीसदी से अधिक मानी जाती है। अब तक प्रदेश में 7 हजार से अधिक बच्चों का बिना सर्जरी इलाज किया जा चुका है। देश में करीब सवा लाख बच्चों को इस तकनीक से लाभ मिला है। उनका कहना है कि हमारी कोशिश है कि चूरू के डीबी अस्पताल में क्लब फुट ओपीडी शुरू हो, ताकि जिले के जरूरतमंद बच्चों को बिना ऑपरेशन निशुल्क इलाज मिल सके। उन्होंने बताया कि कम उम्र में ऑपरेशन करने से विकृति ज्यादा होने की आशंका रहती है। वहीं यह तकनीक अधिक सुरक्षित और प्रभावी साबित हुई है। इससे पहले ब्रूस स्मिथ ने मेडिकल कॉलेज सेमीनार हॉल में शिशु रोग व हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ मीटिंग कर इस पद्धति का प्रशिक्षण दिया। ब्रूस स्मिथ ने मेडिकल कॉलेज के डाक्टरों के द्वारा पूछे गए सवाल एवं उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। सेमीनार में प्रिंसिपल डॉ. पुकार के अलावा शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. इकराम सहित अन्य डॉक्टर मौजूद थे। मेडिकल कॉलेज के आर्थोपेडिक विभाग के प्रो. प्रदीप शर्मा का कहना है कि पोंसेटी गैर सर्जिकल लेटेस्ट तकनीक है। इसके तहत जन्मजात पैर की विकृति वाले बच्चों का 7-8 सप्ताह लगातार प्लास्टर की प्रक्रिया चलती है, जबकि ब्रेसिंग 3-4 वर्षों तक जारी रहती है। प्लास्टर हटाने के बाद बच्चे को विशेष जूते-ब्रेस (फुट एब्डक्शन ब्रेस) पहनाए जाते हैं। पहले 3 महीने दिन-रात और बाद में केवल सोते समय करीब 3-4 वर्षों तक पहनाना जरूरी होता है। इस सिस्टम से 90-95 फीसदी मामलों में पॉजिटिव रिजल्ट मिले है। गंभीर मामलों में या जब प्लास्टर से पर्याप्त सुधार न हो, तब सर्जरी करनी पड़ सकती है।


