शहर के चारों ओर बन रही रिंग रोड को अब दिल्ली-जम्मू-कटरा एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जाएगा। इससे जालंधर और आसपास के 50 से अधिक गांवों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। एनएचएआई की ओर से तैयार किए जा रहे इस प्रोजेक्ट में संशोधन करते हुए अब अधिक आबादी वाले गांवों के पास एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स देने की योजना बनाई गई है। पहले प्रस्ताव के मुताबिक एक्सप्रेस-वे को रिंग रोड से केवल चुनिंदा स्थानों पर जोड़ा जाना था। इसके चलते कई गांवों के लोगों को हाईवे तक पहुंचने के लिए 5 से 10 किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़नी थी। ग्रामीणों और स्थानीय प्रतिनिधियों की ओर से बेहतर कनेक्टिविटी की मांग उठने के बाद विभाग ने दोबारा सर्वे शुरू किया है। अब ट्रैफिक लोड, आबादी और रोजाना की आवाजाही को आधार बनाकर एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स तय किए जाएंगे। अधिकारियों का मानना है कि इस बदलाव से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों को राहत मिलेगी, बल्कि शहर के भीतर वाहनों का दबाव भी कम होगा। भारी वाहन सीधे रिंग रोड और एक्सप्रेस-वे का उपयोग कर सकेंगे, जिससे शहर की अंदरूनी सड़कों पर ट्रैफिक जाम की समस्या घटेगी। गांवों की बदलेगी तस्वीर चहेड़ू, महेड़ू, परागपुर, तल्हण, किशनगढ़, लांबड़ा और नकोदर रोड पर स्थित गांव, जालंधर-भोगपुर हाईवे से जुड़े गांव, जालंधर-अमृतसर हाईवे पर स्थित सुरानुस्सी, विधिपुर, करतारपुर, सुभानपुर तथा करतारपुर से कपूरथला की ओर जाने वाली सड़क पर बसे गांव भी लाभान्वित होंगे। एनएचएआई से रिटायर्ड अधिकारी सुकेत वर्मा के अनुसार नया जुड़ाव जालंधर को एक बड़े ट्रांजिट हब के रूप में स्थापित कर सकता है। न केवल यातायात व्यवस्था सुधरेगी, बल्कि रोजगार और निवेश के नए अवसर भी पैदा होंगे। इसी रूट पर फ्लाईओवर और अंडरपास भी बनेंगे जहां दिल्ली-जम्मू-कटरा एक्सप्रेस-वे से रिंग रोड जुड़ेगी, वहां जरूरत पड़ने पर फ्लाईओवर और अंडरपास भी बनाए जाएंगे। यदि कोई वाहन शहर की ओर से गांवों के बीच से होकर गुजर रहा है और उसे एक्सप्रेस-वे पर चढ़ना है, तो अब उसे लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर एंट्री पॉइंट उपलब्ध होगा। समय और ईंधन बचेगा। रिंग रोड और एक्सप्रेस-वे जुड़ने से शहर का आउटर ट्रैफिक डायवर्ट हो सकेगा। अंदरूनी बाजारों और रिहायशी क्षेत्रों में ट्रैफिक का दबाव घटेगा।


