एक्सीडेंट में बीमित वाहन की लापरवाही साबित नहीं, बीमा कंपनी के खिलाफ 8 साल की देरी से दायर याचिका खारिज

जयपुर मेट्रो-प्रथम की एमएसीटी मामलों की विशेष कोर्ट-2 ने आठ साल देरी से दायर क्लेम याचिका में बीमित वाहन की लापरवाही साबित नहीं होने पर नेशनल इंश्योरेंस कंपनी व अन्य के खिलाफ आठ साल देरी से दायर याचिका खारिज कर दी, लेकिन कोर्ट ने मामले में जीप चालक कमलेश कुमार मीणा व मालिक भूपेन्द्र सिंह की जवाबदेही मानते हुए उन्हें प्रार्थी को 1.77 लाख रुपए क्षतिपूर्ति के लिए जिम्मेदार माना है। कोर्ट ने इन्हें निर्देश दिया है कि वे प्रार्थी को यह राशि याचिका दायर करने के दिन से 6 प्रतिशत ब्याज सहित दें। कोर्ट ने यह आदेश प्रार्थी नारायण की क्लेम याचिका पर दिया। मामले से जुड़े अधिवक्ता भागचंद भारद्वाज ने बताया कि प्रार्थी ने बीमा कंपनी सहित अन्य के खिलाफ घटना के आठ साल बाद 84.50 लाख रुपए क्षतिपूर्ति की याचिका दायर की थी। इसमें कहा कि 22 मई 2005 को दोपहर करीब एक बजे एक जीप सवाईमाधोपुर से उनियारा जा रही थी। इस दौरान ही उसने उनियारा की ओर से आ रही एक इंडिका कार को जोरदार टक्कर मारी, जिसमें कार चालक व उसमें बैठे हुए प्रार्थी के चोटें आई। वहीं जीप में बैठी कुछ सवारियों के भी चोटें आई। इसलिए उसे बीमा कंपनी व अन्य से क्षतिपूर्ति दिलवाई जाए। जवाब में बीमा कंपनी ने कहा कि मामले में याचिका दायर होने से लेकर साक्ष्यों तक बयानों में कई बार बदलाव हुआ है। क्लेम याचिका आठ साल की देरी से दायर हुई है और इसमें बीमित वाहन की लापरवाही साबित नहीं हो पाई है। इसलिए क्लेम याचिका खारिज की जाए।

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