नगर परिषद चित्तौड़गढ़ द्वारा हाल ही में 18.27 करोड़ रुपए की घर-घर कचरा संग्रहण का टेंडर जारी किया गया है, जिस पर अब विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के निवर्तमान सभापति संदीप शर्मा और पूर्व पार्षदों ने इस निविदा को तुरंत निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने प्रमुख शासन सचिव, स्थानीय निकाय विभाग रवि जैन को पत्र लिखकर और परिषद के प्रशासक से मिलकर आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ है। आरोप- फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर संदीप शर्मा और पूर्व पार्षदों का कहना है कि हरिओम ट्रेडर्स नाम की फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को नजरअंदाज किया गया। पूर्व सभापति संदीप शर्मा के अनुसार यह फर्म तकनीकी रूप से योग्य नहीं है और उसे इस काम का कोई अनुभव भी नहीं है, फिर भी उपापन समिति ने उसे सफल घोषित कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला राजनीतिक दबाव में लिया गया है और इससे नगर परिषद को करोड़ों रुपए का नुकसान होगा। बोले- ऊंची दर मंजूर करना संदेह पैदा कर रहा कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस निविदा में 141.51 रुपए प्रति घर तय की गई है, जो अब तक राजस्थान में सबसे ज्यादा बताई जा रही है। उनका कहना है कि एकल निविदा होने के बावजूद इतनी ऊंची दर मंजूर करना संदेह पैदा करता है। उन्होंने यह भी कहा कि दिसंबर 2025 में नगर परिषद निंबाहेड़ा ने 3 करोड़ रुपए की निविदा में इसी फर्म को अयोग्य मानकर बाहर कर दिया था, लेकिन अब चित्तौड़गढ़ में उससे छह गुना बड़ी निविदा में उसे सफल मान लिया गया। कांग्रेस का आरोप है कि यह मामला जांच का विषय है और इसमें बड़े स्तर पर गड़बड़ी की आशंका है। उनका कहना है कि यदि इस फर्म को तीन साल के लिए काम दे दिया गया तो शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह खराब हो सकती है और जनता के पैसों का गलत उपयोग होगा। आयुक्त ने आरोप खारिज किए वहीं नगर परिषद आयुक्त कृष्ण गोपाल माली ने इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने बताया कि टेंडर से पहले बिड मीटिंग रखी गई थी, जिसमें छह-सात ठेकेदार शामिल हुए थे। सभी सुझावों को ध्यान में रखकर निविदा की शर्तों में संशोधन किया गया और पोर्टल पर अपलोड भी किया गया। बाद में जब निविदा खोली गई तो सिर्फ एक ही फर्म ने भाग लिया। आयुक्त के अनुसार ठेकेदारों का भाग लेना या न लेना उनका अपना फैसला है। उन्होंने कहा कि तकनीकी मूल्यांकन में फर्म को 75 प्रतिशत अंक मिले हैं और इसकी जांच उपापन समिति ने की है। अंतिम फैसला राज्य स्तरीय समिति करेगी और फाइल जयपुर भेज दी गई है। इस दौरान जो शिकायत भी मिली है फर्म को लेकर वो भी राज्य स्तरीय समिति को भेजी गई है। अगर राज्य सरकार अनुमति देती है तो एक अप्रैल से नया ठेका लागू किया जाएगा, अन्यथा पुराने ठेकेदार की अवधि बढ़ानी पड़ेगी या फिर नए टेंडर खोले जाएंगे। आयुक्त ने कहा कि शहर में कचरा न रुके, इसके लिए परिषद के पास यही दो विकल्प हैं और जो भी फैसला होगा, वह शहर के हित में लिया जाएगा।


