एक छोटा सा बोर्ड जिसमें लिखा था – “द ग्रेड जाटव” और यूजीसी को लेकर बांटे गए कुछ पर्चे। इन दो बातों से देखते-देखते ही पूरा गांव दो हिस्सों में बंट गया। 12 दिनों तक माहौल तनावपूर्ण रहा। यह गांव था भिंड जिले के मेहगांव क्षेत्र का कोंहार गांव। यहां सवर्ण समाज और जाटव समाज के बीच ऐसी खटास पड़ी , जिसने सामाजिक रिश्तों की डोर तोड़ दी। रोज साथ उठने-बैठने वाले लोग आमने-सामने हो चुके थे। हालात इतने बिगड़े कि पंचायत में जाटव समाज के सामाजिक बहिष्कार की शपथ तक ले ली गई। 4 महीने में भिंड का यह दूसरा गांव था, जहां इस तरह का मामला सामने आया। पुलिस-प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती दोनों समाजों के भरोसे को फिर से एक बार जोड़ने की थी। अधिकारियों ने कई दौर की बैठक के बाद आखिरकार हालात कंट्रोल में आए। आखिर कैसे एक छोटे से बोर्ड ने दो समाज को आमने-सामने लाकर खड़ा कर दिया? इसकी असली वजह जानने के लिए दैनिक भास्कर टीम कोंहार गांव पहुंची। यहां चौपाल से लेकर खेत तक पहुंचकर ग्रामीणों से बात की। पढ़िए रिपोर्ट… जानिए कैसे बिगड़े थे हालात…विरोध के बाद हुए शांत पूरे विवाद की शुरुआत 14 फरवरी को भिंड जिले के मेहगांव क्षेत्र के कोंहार गांव से हुई। भास्कर टीम गांव पहुंची और अलग-अलग वर्गों के लोगों से बातचीत की। बातचीत में सामने आया कि विवाद की जड़ एक सरकारी बिजली पोल पर लगाया गया बोर्ड था। इस बोर्ड पर “द ग्रेड जाटव” शब्द लिखे हुए थे। आरोप है कि इसे भीम आर्मी से जुड़े लोगों के द्वारा लगाया गया था। इसी बोर्ड ने गांव में हलचल पैदा कर दी, लेकिन कोई खुलकर विरोध दर्ज करवाने सामने नहीं आया। तनाव 17 फरवरी की दोपहर उस समय बढ़ गया, जब गांव की सवर्ण बस्ती में कुछ लोग भीम आर्मी से जुड़े कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे। गांव के विपिन जाटव के साथ मिलकर वे यूजीसी के समर्थन में पर्चे बांटने लगे। इस पर सवर्ण समाज के युवाओं ने आपत्ति जताई। विरोध के दौरान कहासुनी हुई जो धीरे-धीरे हाथापाई तक पहुंच गई। बड़े-बुजुर्गों ने बीच-बचाव कर मामले को तब शांत करवा दिया। दोनों पक्षों ने किया थाने का घेराव तब तो मामला शांत हो गया, लेकिन बात खत्म नहीं हुई। भीम आर्मी के जिला स्तरीय सदस्यों को जब इस विवाद की जानकारी मिली तो वे मेहगांव थाने पहुंचे और एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व भीम आर्मी के पूर्व पदाधिकारी सौरभ जाटव ने किया। इसके बाद पुलिस ने सुमित भदौरिया, अमित दांतरे और कान्हा भदौरिया के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। जब ग्रामीणों को इसकी जानकारी लगी तो आक्रोश फैल गया। सर्व समाज से एकजुट होने का आह्वान किया गया। 18 फरवरी की दोपहर मेहगांव थाने का घेराव किया गया, जिसमें परशुराम सेना, करणी सेना, सवर्ण आर्मी सहित अन्य सवर्ण समाज के संगठनों ने भाग लिया। करीब 5 घंटे तक थाने पर प्रदर्शन चला। पुलिस ने सुमित भदौरिया की शिकायत पर मारपीट की धाराओं में चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। दो तस्वीरों में देखिए प्रदर्शन और समझाइश… पंचायत में जाटव समाज का बहिष्कार 19 फरवरी की सुबह गांव में एक बड़ी पंचायत बुलाई गई। पंचायत में यह निष्कर्ष निकाला गया कि जाटव समाज के युवकों की गतिविधियों से गांव का सद्भाव बिगड़ा है। ग्रामीणों का कहना था कि गांव में सभी समाज के लोग लंबे समय से मिल-जुलकर रहते आए हैं। बिजली पोल पर लगाए गए बोर्ड पर किसी ने आपत्ति नहीं की थी, लेकिन इसके बाद सवर्ण समाज की बस्ती में जाकर पर्चा बांटना और विरोध पर एससी-एसटी एक्ट के तहत एफआईआर कराना, गांव की परंपराओं के खिलाफ है। पंचायत ने इसके बाद जाटव समाज के सामाजिक बहिष्कार का फैसला सुना दिया। अब पढ़िए ग्रामीणों से बातचीत… भिंड में दूसरी बार बहिष्कार, प्रशासन ने संभाला मोर्चा पंचायत में जाटव समाज के बहिष्कार की सूचना पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही भोपाल तक पहुंची। विधानसभा सत्र के दौरान इस पर जवाबदेही तय करने की स्थिति बन गई। शासन स्तर से रिपोर्ट मांगी गई। पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों ने मोर्चा संभाला। गांव के अलग-अलग वर्गों के साथ अलग-अलग बैठकों का दौर शुरू हुआ। समझाइश, संवाद और विश्वास बहाली की कोशिशें की गईं। करीब 12 दिन की मेहनत के बाद अधिकारी तनाव को दूर करने में सफल हो सके। समझाइश के बाद ग्रामीणों ने एक-दूसरे से बातचीत शुरू किया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार ऐसा देखा, जब एक बोर्ड ने पूरे गांव को बांट दिया। पुलिस की पहल ने उस रिश्ते को दोबारा जोड़ा है। भिंड जिले में दो बार लिया गया बहिष्कार का फैसला कोंहार गांव में 19 फरवरी को सर्व समाज की पंचायत बुलाई गई थी। पंचायत में सवर्ण समाज ने जाटव समाज के बहिष्कार का निर्णय लिया था। इसके पहले भिंड जिले के सुरपुरा गांव में भी 23 अक्टूबर को सर्व समाज की पंचायत हुई थी। तब सवर्ण समाज ने एक मामले को फर्जी बताते हुए, झूठी FIR के विरोध में जाटव समाज के बहिष्कार की शपथ ली थी।


