मैं अकेला ही चला था जानिब ए मंजिल, मगर लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया। इस कहावत को महवा की एक रुपया रोज सेवा समिति ने चरितार्थ कर दिखाया है। महज पांच लोगों से शुरू की गई इस समिति में आठ दिन में ही कस्बे तथा आसपास के सैकड़ो लोग जुड़ गए हैं, जो मात्र एक रुपया रोज की सेवा के लिए अपना योगदान दे रहे हैं। समिति के संयोजक डॉ. दीनदयाल शर्मा ने बताया कि यहां के लोगों की धर्म एवं जीवों के कार्यों के प्रति गहरी आस्था है। इसी का परिणाम है कि कम समय में ही सैकड़ो लोग जुड़कर सेवा कार्यों में उमंग और जोश के साथ जीवों को भोजन कराकर पुण्य अर्जन कर रहे हैं। विशेष पर्वों के अवसर पर सिद्ध बाबा की पहाड़ी पर समिति के सहयोगकर्ताओं द्वारा सैकड़ो बंदरों को प्रसादी एवं चीटियों को चुग्गा प्रसादी ग्रहण कराई गई। इसके बाद नयागांव स्थित जलाशय पर मछलियों को भी बिस्किट खिलाए गए। समिति द्वारा गर्मियों में बेजुबान पक्षियों के दाना पानी की व्यवस्था के लिए सैकड़ो परिंडे लगाए जाएंगे। इस अवसर पर रामावतार शर्मा, दीनदयाल गहनौली, सतीश शर्मा, मेघराम मीना, विनोद सैन, रविंद्र मीना, संतोष बघेल, पिंटू निकटपुर सहित कई सहयोगी मौजूद रहे।


