जयपुर के महाराणा प्रताप सभागार में रविवार की शाम एक खास अनुभव लेकर आई, जब “जनम जनम का साथ है” जैसे मशहूर गीतों के संगीतकार जुगल किशोर तिलकराज ने स्वरसाधना की ओर से आयोजित संगीतमय कार्यक्रम में भाग लिया। जयपुर की माटी से गहरा जुड़ाव रखने वाले जुगल किशोर ने कार्यक्रम के दौरान रफी साहब के साथ जुड़े अविस्मरणीय पलों को सभी के साथ साझा किया। उन्होंने अपनी स्मृतियों को याद करते हुए कई बार भावुक हो गए। कार्यक्रम में प्रस्तुत कलाकारों ने रफी साहब के गाए एकल और युगल गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। जनम जनम का साथ है हमारा तुम्हारा, यूं रूठो ना हसीना, आज की रात मेरे, रंग और नूर की बारात, है दुनिया उसी की, माने ना मेरा दिल दीवाना और बाल कलाकारों याषी और काषी की ओर से प्रस्तुत कालजयी गीत मन तरपत हरी दरसन को आज और ओ दुनिया के रखवाले जैसे गीतों पर दर्शकों ने जोरदार तालियों से कलाकारों की हौसला अफजाई की। कार्यक्रम में कैलाश सोलंकी, समीर सेन, सुधीर शर्मा, पूनम शर्मा, जेपी रामावत, अंबे माथुर, धीरेन्द्र उपाध्याय, दीपक अरोड़ा, सूबे सिंह योगी, जी एल पारीक, अभिषेक माथुर, भारत जोशी, दामोदर तोषनीवाल, दीपक अरोड़ा और दीपक ओझा के साथ महिला कलाकारों प्रीती जोशी, अंजू सुखीजा, निशा शर्मा, प्रियंका शर्मा, डॉ. रितु उपाध्याय, स्वप्ना माथुर, बेला माथुर, ममता वर्मा, प्रज्ञा जैन, संध्या असवाल, उर्मिला न्याति और स्नेहा गोयल ने अपनी बेहतरीन गायिकी से माहौल को संगीतमय बना दिया। मंच संचालन उदघोषक धर्मेन्द्र उपाध्याय ने किया, जिन्होंने रफी साहब से जुड़े रोचक किस्सों और बातों से श्रोताओं को अंत तक बांधे रखा। कार्यक्रम की समाप्ति पर संस्था के एन एस मेहता और कैलाश सोलंकी ने सभी श्रोताओं का आभार व्यक्त किया और कहा कि जब तक श्रोताओं का प्रेम और समर्थन मिलता रहेगा, वे इस प्रकार के मनोरंजक और संगीतमय आयोजनों के माध्यम से सभी का मनोरंजन करते रहेंगे।


