एक ही नंबर की दो लग्जरी बसें, रूट अलग-अलग:भास्कर पड़ताल में खुला फर्जीवाड़ा; RC सस्पेंड हुई तो मालिक ने बदली नंबर प्लेट

राजस्थान में एक ही नंबर से दो लग्जरी स्लीपर बसें अलग-अलग रूट पर चल रही थीं। भास्कर टीम ने जब इस फर्जीवाड़े की पड़ताल शुरू की तो भनक लगते ही RTO अधिकारी ने आनन-फानन में फर्जी नंबर प्लेट लगाकर चल रही उस बस को सीज कर दिया। दोनों बसें एक ही मालिक की हैं। हमारी पड़ताल में सामने आया था कि प्राइवेट ट्रैवल कंपनी की एक बस जयपुर से बठिंडा (पंजाब) रूट पर चल रही है। इसी नंबर प्लेट का इस्तेमाल उदयपुर से झालावाड़ रूट पर चल रही एक और बस के लिए हो रहा है। सच्चाई जानने के लिए भास्कर टीम ने दोनों बसों की ऑनलाइन बुकिंग की। एक ही नंबर की दोनों बसों में हमारी सीट भी बुक कर दी गई। चौंकाने वाली बात यह थी कि जिस बस को कंपनी मालिक झालावाड़ से उदयपुर चला रहा था, उसे कुछ दिन पहले तक जयपुर से उदयपुर चलाया जा रहा था। तब जयपुर RTO ने यात्रियों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मानते हुए उसकी आरसी सस्पेंड कर दी थी। बावजूद इसके आम नागरिकों की जान से खिलवाड़ करते हुए कंपनी मालिक ने दूसरे रूट पर इसी बस का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। ऐसे सामने आया पूरा मामला
बस नंबर MP44ZE4311 जयपुर से बठिंडा के लिए चलती है। यह रूट आरटीओ से स्वीकृत है। इसी नंबर का इस्तेमाल उदयपुर टू झालावाड़ रूट पर किया जा रहा था। 20 फरवरी को हमने दोनों बसों का स्टेट्स जाना। दोनों जगह हमारे रिपोर्टर मौजूद थे। MP44ZE4311 नंबर की बस जयपुर से रात 9.30 बजे बठिंडा के लिए रवाना हुई। इससे कुछ देर पहले रात 8.21 बजे इसी नंबर की बस (MP44ZE4311) झालावाड़ से उदयपुर के लिए रवाना हुई। पड़ताल में सामने आया कि कंपनी की एक बस MP70ZD4311 (जयपुर टू उदयपुर) की आरसी सस्पेंड की गई थी। उसी बस को MP44ZE4311 की नंबर प्लेट लगाकर चलाया जा रहा है। ऑनलाइन माध्यम से चेक करने पर दोनों ही बसों में अलग-अलग ट्रैवल कंपनी दिखाकर टिकट बुकिंग भी ली जा रही थी। जयपुर-बठिंडा के लिए बस को न्यू मेट्रो ट्रेवल्स के नाम से ऑनलाइन रजिस्टर्ड किया हुआ था, जबकि झालावाड़-उदयपुर के लिए राजलक्ष्मी ट्रैवल्स (MR ट्रैवल्स) के नाम पर रजिस्टर्ड किया हुआ था। इससे साफ हुआ कि एक ही नंबर से दो अलग-अलग रूट पर बसें संचालित हो रही हैं। मौके पर भास्कर रिपोर्टर को देख ड्राइवर ने बदली नंबर प्लेट
फर्जीवाड़ा कन्फर्म होने के बाद अगले दिन 19 और 21 फरवरी को हमने एक ही नंबर की दोनों बसों में टिकट बुक किए। यही बस अगले दिन उदयपुर से झालावाड़ के लिए उपलब्ध थी। हमारी टीम रेती बस स्टैंड पर पहुंची जहां बस सवारियां ले जाने के लिए तैयार खड़ी थी। रिपोर्टर ने जब ड्राइवर से बस के सस्पेंड होने को लेकर सवाल पूछे तो वह वीडियो बनाने पर आनाकानी करने लगा। ड्राइवर ने बताया कि यह बस कोटा के लिए चलती है, जबकि उसी बस में हमारी उदयपुर से झालावाड़ के लिए बुकिंग थी। आनन-फानन में ड्राइवर ने अपनी बस से उस नंबर प्लेट को हटा लिया और फिर से सस्पेंडेड बस का नंबर MP70ZD4311 लगा लिया। RTO को लगी भनक, देर रात हुई कार्रवाई
हमारी पड़ताल की भनक लगते ही उदयपुर RTO टीम ने देर रात उसी बस को सीज कर दिया। बस उदयपुर से रवाना हो चुकी थी। उसमें 26 सवारियां थीं। प्रतापनगर थाने के सामने ही उदयपुर RTO ज्ञानदेव विश्वकर्मा के निर्देश पर डीटीओ मुकेश डाड ने बस को रुकवाया। बस पर सस्पेंड हो चुकी RC का नंबर MP70ZD4311 ही लगा हुआ था। बस को सीज कर उसका चालान किया गया। 9 फरवरी को ही सस्पेंड हो चुकी थी आरसी
बस नंबर MP70ZD4311 की आरसी 9 फरवरी को सस्पेंड कर दी गई थी। यह बस जयपुर से उदयपुर रूट पर चलती थी। आरटीओ सेकेंड जयपुर के डीटीओ अतुल शर्मा ने बताया कि बस नंबर MP70 ZD 4311 (स्लीपर बस) के खिलाफ 28 जनवरी 2026 को चालान किया गया था। मुख्य उल्लंघन बस बॉडी कोड AIS 119/52 का था। इसके बाद मामला एमएम (मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट) कोर्ट 13 जयपुर में पेश हुआ, जहां 2 फरवरी 2026 को बस को 50 लाख रुपए के जमानतनामे और सुपुर्दगीनामे पर छोड़ा गया। हालांकि 9 फरवरी 2026 को बस की आरसी सस्पेंड कर दी गई थी। साथ ही, स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि तय मानकों का पालन किए बिना बस का संचालन नहीं किया जाएगा। बस में गंभीर सुरक्षा कमियां मिलने की वजह से आरसी सस्पेंड की गई थी। जांच में पाया गया कि बस की लंबाई और आगे-पीछे का हिस्सा (ओवर हैंग) तय नियमों से ज्यादा बढ़ा हुआ है, यानी गाड़ी को मूल डिजाइन से बदल दिया गया था। आपातकालीन दरवाजा (इमरजेंसी गेट) और छत पर बने एस्केप हैच (छत पर खुलने वाली ऐसी जगह, जहां से इमरजेंसी में बाहर निकला जा सके) तय साइज के नहीं थे। कुछ जगहों पर सीढ़ियां और स्लीपर (सोने वाली जगह) इस तरह लगाए गए थे कि इमरजेंसी में बाहर निकलना मुश्किल हो सकता था। स्लीपर सीट की ऊंचाई भी नियमों से ज्यादा थी। बस की बॉडी में बदलाव कर लगेज स्पेस बढ़ाया गया था। गैंगवे (बस के बीच का पैसेज) में रुकावटें थीं। स्लीपर के पास कांच तोड़ने के लिए जरूरी हैमर नहीं लगे थे और इमरजेंसी रास्तों तक पहुंच दिखाने वाले संकेत भी नहीं थे। यहां तक कि आरसी में दर्ज रंग और असल रंग भी अलग पाया गया। इन सभी कमियों को यात्रियों की सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए आरटीओ ने कार्रवाई की थी। इन्ही खामियों के चलते जैसलमेर में हुआ था भयानक हादसा
बस में जो खामियां थीं, ऐसी ही कमियों के चलते अक्टूबर 2025 में जैसलमेर में स्लीपर बस में आग लग गई थी। 25 सवारियां जिंदा जल गई थीं। इसके बाद परिवहन विभाग ने स्लीपर बसों पर सख्ती बढ़ाई थी। बस बॉडी कोड का पालन नहीं करने वाली बसों के खिलाफ अभियान चलाया गया। जुर्माने वसूले गए और कई बसों की आरसी सस्पेंड की गई। ऐसे में इस तरह का संचालन नियमों को दरकिनार करने जैसा है। इस बस से हादसा होता तो एक भी यात्री को नहीं मिलता इंश्योरेंस का फायदा
आरटीओ सेकेंड जयपुर के डीटीओ अतुल शर्मा ने बताया कि चेकिंग के दौरान बस को जब्त कर न्यायालय में पेश किया गया था। उन्होंने बताया कि अगर कोई बस इस तरह सड़कों पर चल रही है तो यह कानून का उल्लंघन है। ऐसी स्थिति में बस में सफर कर रहे पैसेंजर्स की सुरक्षा की जिम्मेदारी तय नहीं होती। अगर कोई हादसा होता है तो इंश्योरेंस क्लेम में भी दिक्कत आ सकती है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि सस्पेंड आरसी और स्पष्ट निर्देशों के बावजूद बसें किस तरह सड़कों पर चल रही हैं और यात्रियों की सुरक्षा को किस स्तर पर नजरअंदाज किया जा रहा है। फर्जी नंबर प्लेट लगाने की होगी जांच
बस पर कार्रवाई करने वाले डीटीओ मुकेश डाड ने बताया – हमने सूचना के आधार पर जांच की तो पता लगा कि यह वही बस है, जिसकी आरसी आरटीओ जयपुर ने सस्पेंड कर रखी है। ऐसे में इस बस का चालान कर सीज किया गया है। इस बस पर कितना जुर्माना लगेगा, इसका फैसला बाद में होगा। इस बस पर रजिस्ट्रेशन के अनुसार, बस ऑनर की डिटेल, एड्रेस, मोबाइल नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर, पुलिस नंबर, और वूमेन हेल्पलाइन नंबर वाली प्लेट भी नहीं थी। नियमानुसार आरसी सस्पेंड होने के बाद बस संचालन करने का जुर्माना 5 हजार बनता है। वहीं, एक ही नंबर प्लेट दो बसों पर लगने का मामला हमारे सामने आया है। इसकी भी जांच की जाएगी। साबित होने पर बीएनस की धाराओं में मुकदमा दर्ज होगा। खबर में सहयोग : सतीश शर्मा, उदयपुर

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