हाईकोर्ट ने एक ही भर्ती में अभ्यर्थियों को सेवालाभ के अलग-अलग मापदंड अपनाने पर माध्यमिक शिक्षा विभाग सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जस्टिस अनूप ढंड की अदालत ने यह आदेश रामनिवास मीणा व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता रघुनंदन शर्मा ने बताया- तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती-2016 के तहत सफल अभ्यर्थियों को विभाग ने 2018 में नियुक्तियां दी थी। लेकिन उस समय विभाग ने वेटिंग लिस्ट नहीं निकाली थी। हाईकोर्ट के आदेश से विभाग ने वेटिंग लिस्ट निकाली और कई विषयों के खाली पदों पर शेष चयनित अभ्यर्थियों को 2022 में नियुक्तियां दी। इसमें अंग्रेजी विषय के अभ्यर्थी यह कहते हुए फिर से हाईकोर्ट चले गए कि उनकी नियुक्ति भी 2018 की मानते हुए नोशनल सेवालाभ दिए जाए। हाईकोर्ट के निर्देश पर अभ्यर्थियों ने बूंदी जिला शिक्षा अधिकारी को प्रतिवेदन दिया। जिसे स्वीकार करते हुए विभाग ने उन्हें नोशनल लाभ जारी कर दिए। इसी तरह से विज्ञान-गणित विषय के चयनित अभ्यर्थियों ने भी बाड़मेर और उदयपुर जिला शिक्षा अधिकारी के समक्ष प्रतिवेदन देकर नोशनल सेवालाभ देने की मांग की। इनके प्रतिवेदन पर विचार नहीं किया गया। इसके बाद हमने हाईकोर्ट में याचिका लगाकर कहा कि विभाग एक ही भर्ती के समान अभ्यर्थियों को सेवालाभ देने में दोहरा मापदंड नहीं अपना सकता है। इस पर अदालत ने विभाग ने जवाब तलब किया है।


