पढ़ाई का तनाव हो, एग्जाम में फेल होने पर मम्मी-पापा की डांट का डर…स्टूडेंट्स खुलकर अपने मन की बात बता पाएंगे। आमने-सामने बात करने में हिचक है तो फोन करके अपनी प्राॅब्लम बता पाएंगे। कोटा में स्टूडेंट्स की समस्याओं को समझने, दूर करने और काउंसलिंग के लिए स्टूडेंट डेडिकेटेड इमोशनल वेलबीइंग सेंटर शुरू किया गया है। राजीव गांधी नगर में इस सेंटर का संचालन एलन की तरफ से किया जा रहा है। इसमें शहर में किसी भी कोचिंग के स्टूडेंटस अपनी परेशानी लेकर आ सकते हैं। सेंटर देश का पहला स्टूडेंट डेडिकेटेड वेलबिंग सेंटर है। यहां एक ही जगह पर अलग-अलग काउंसलर्स, स्टूडेंटस की समस्या के समाधान के लिए मौजूद रहते हैं। इसके अलावा यहां हेल्पलाइन सेंटर भी है। अलग-अलग परेशानी के लिए अलग काउंसलर
वेलबीइंग सेंटर के एचओडी डॉ. हिमांशु शर्मा ने बताया कि सेंटर में 10 साइक्लोजिकल काउंसलर, 4 एकेडेमिक काउंसलर, 9 टेलिफोनिक काउंसलर और 2 साइकेट्रिस्ट तैनात रहते हैं। बच्चा या तो खुद या स्टाफ की मदद से काउंसलिंग सेंटर तक पहुंचेगा। स्टूडेंट्स अगर करियर को लेकर तनाव में है तो एकेडमिक काउंसलर के पास भेजा जाएगा। अगर बच्चा डिप्रेशन में है तो साइकेट्रिस्ट की मदद दिलाई जाएगी। आमने-सामने बात करने में झिझक तो 24 घंटे की हेल्पलाइन
स्टूडेंट को आमने-सामने बात करने में हिचक है या किसी दूसरे स्टूडेंट के बारे में जानकारी देना चाहता है तो हेल्पलाइन सेंटर के नंबर पर कॉल कर सकते हैं। समस्या के आधार पर काउंसलर्स या फिर स्टूडेंट वेलफेयर सोसाइटी को सूचित किया जाएगा और टीम स्टूडेंट की मदद के लिए पहुंचेगी। कभी भी स्टूडेंट्स इस हेल्पलाइन पर कॉल कर सकते हैं। सोशल वाॅलेंटियर आइडेंटिटी छिपाकर पहुंचेंगे स्टूडेंट्स के बीच
सेंटर से जुड़े वॉलेंटियर अपनी आइडेंटिटी छिपाकर स्टूडेंट्स के बीच पहुंचेंगे। उनसे बात करेंगे। इसका फायदा ये होगा कि क्राउड के बीच अंजान लोगों से चर्चा के समय बच्चे आसानी से कोटा में रहने के दौरान आ रही परेशानी बता सकेंगे। स्टूडेंट्स के साथ पेरेंट्स की भी काउंसलिंग और सेमिनार
वेलबीइंग सेंटर की तरफ से ही काउंसलर्स बच्चों के पेरेंट्स की भी काउंसलिंग करेंगे। पेरेंट्स काउंसलिंग-सेमिनार में बच्चों के साथ रह रही मां को भी जोड़ा जा रहा है। इसमें उन्हें बच्चों की इच्छाओं को समझने और बिहेवियर को लेकर जानकारी दी जा रही है। अगर बच्चा तनाव में है तो क्या लक्षण है। कैसे बच्चे को समझना है…के बारे में बताया जा रहा है। 30 फीसदी वाले स्टूडेंट्स को करेंगे चिह्नित, होगी काउंसलिंग
स्टूडेंट्स वेलबीइंग सेंटर से कैसे जुड़ेंगे… ये बड़ा सवाल है क्योंकि बच्चे अपनी समस्या बताने से भी कतराते हैं। डॉ हिमांशु ने बताया कि स्टूडेंट्स खुद समस्या लेकर सेंटर तक आएं, ये कम होता है। ऐसे में सेंटर स्टाफ को ही बच्चे तक पहुंचना होगा। कोचिंग संस्थान में अगर कोई स्टूडेंट एबसेंट हो रहा है, किसी के नंबर कम आ रहे है तो ऐसे स्टूडेंटस से टीम संपर्क करती है। क्लास टेस्ट में अगर किसी स्टूडेंट के तीस प्रतिशत से कम नंबर है तो उसे मॉनिटर किया जाता है। इसके अलावा गेटकीपर ट्रेनिंग कर चुके हॉस्टल कर्मियों का भी सहयोग लेते हैं। उन्हें बच्चों के तनाव पहचानने की ट्रेनिंग दी गई है। स्टूडेंट्स की बेहतरी के लिए और भी कई पहल… स्टूडेंट्स को कोटा बुलाने के लिए कलेक्टर का ओपन लेटर
कोटा कलेक्टर डॉ.रविन्द्र गोस्वामी ने 26 दिसंबर 2024 को एक लेटर जारी किया था। उन्होंने स्टूडेंट्स को कोटा आने के लिए आमंत्रित किया। स्टूडेंट्स के लिए कोटा में क्या कुछ काम किए जा रहे हैं, देखभाल कैसे की जा रही है, इसे लेकर जानकारी दी। पेरेंट्स को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि उनके बच्चों का कोटा में ख्याल बेहतर तरीके से रखा जाएगा। एसपी का स्टूडेंट्स-पेरेंट्स के नाम वीडियो मैसेज
30 दिसंबर 2024 को कोटा शहर एसपी अमृता दुहन ने एक वीडियो मैसेज जारी किया। इस मैसेज में उन्होंने स्टूडेंटस और उनके पेरेंट्स को संबोधित किया। कोटा में स्टूडेंटस के लिए पुलिस की तरफ से उठाए जा रहे कदम के बारे में जानकारी दी गई। पेरेंट्स को भरोसा दिलाया कि बच्चों की सुरक्षा के लिए कोटा में कई नवाचार हो रहे हैं। पेरेंट्स के लिए 1 दिन हॉस्टल में रुकने की व्यवस्था
कोटा हॉस्टल एसोसिएशन अध्यक्ष नवीन मित्तल ने बताया कि इस बार निर्णय लिया गया है कि जो भी पेरेंट्स बच्चों के साथ कोटा में कोचिंग की जानकारी लेने या एडमिशन के लिए आ रहे हैं उनके एक दिन के रहने और खाने की व्यवस्था हॉस्टल की तरफ से की जाएगी। पहले स्टूडेंट्स के साथ पेरेंट्स एक भी दिन नहीं रुक सकते थे। अलग से चार्ज देना पड़ता या होटल में रूकना पड़ता था। हॉस्टलों के रूम के रेंट भी कम किए गए हैं ताकि बच्चों को परेशान न होना पडे़। हॉस्टल एसोसिएशन एक म्यूजिकल क्लब को लेकर भी काम कर रहा है। इस क्लब को परमिशन का इंतजार है। मित्तल ने बताया कि इस क्लब में उन स्टूडेंटस को जोडे़ंगे जो म्यूजिक, सिंगिंग में इंटरेस्ट रखते हैं। सब्जी विक्रेताओं, ऑटो चालकों को बिहेवियर की ट्रेनिंग
कोटा में प्रशासन की तरफ से कोटा केयर कैंपेन शुरू किया जा रहा है। कैंपेन से शहर के हॉस्टल, पीजी संचालकों के अलावा, सब्जी बेचने वाले, ऑटो रिक्शा चलाने वालों को भी जोड़ा जाएगा। उन्हें कोटा आने वाले स्टूडेंट्स के साथ अच्छे बिहेवियर की ट्रेनिंग दी जाएगी। सप्ताह में एक बार इन्हें स्टूडेंट्स के साथ बिठाया जाएगा। समस्याएं जानी जाएंगी। सारी कवायद इसलिए : 6 हजार करोड़ की है कोटा की अर्थव्यवस्था, सुसाइड के मामलों ने गिराई साख


