भास्कर न्यूज | जालंधर कंज्यूमर कमिशन ने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) को 30 हजार रुपए हर्जाना देने का आदेश दिया है। कमिशन ने पाया कि बैंक ने उपभोक्ता के एजुकेशन लोन को गलत तरीके से पर्सनल लोन में बदल दिया, अधिक ब्याज वसूला और खाते को एनपीए घोषित कर दिया था। मकसूदां निवासी एक छात्र ने 10 जनवरी, 2023 को कंज्यूमर कमिशन में केस दायर किया। शिकायत में बताया गया कि उसने वर्ष 2012 में सीएमसी मेडिकल कॉलेज, पठानकोट से एमबीबीएस डिग्री कोर्स के लिए 4 लाख रुपए का एजुकेशन लोन लिया था। इसके लिए सभी आवश्यक दस्तावेज बैंक में जमा कराए गए थे। लोन की शर्तों के अनुसार, मोराटोरियम अवधि (पाठ्यक्रम पूरा होने के 12 माह बाद) के बाद किस्तों की अदायगी शुरू होनी थी और पूरा भुगतान 15 वर्षों में किया जाना था। लेकिन जब बैंक ने खाते से किस्त काटनी शुरू की तो शिकायतकर्ता को पता चला कि बैंक ने एजुकेशन लोन की जगह पर्सनल लोन स्वीकृत कर दिया है। उपभोक्ता ने कई बार बैंक से अनुरोध किया कि पर्सनल लोन खाते को एजुकेशन लोन खाते में बदला जाए, क्योंकि उसने आवेदन एजुकेशन लोन के लिए किया था। मामला बैंकिंग लोकपाल तक पहुंचा। इसके बावजूद बैंक ने अधिक ब्याज वसूला और 15 वर्ष की बजाय केवल साढ़े तीन वर्ष का भुगतान शेड्यूल बना दिया। साथ ही ब्याज सब्सिडी का लाभ भी नहीं दिया गया और सीआईबीआईएल रिकॉर्ड में सुधार नहीं किया गया। कमिशन ने माना कि शिकायतकर्ता को एजुकेशन लोन दिया गया था, न कि पर्सनल लोन। ऐसे में अधिक ब्याज वसूलना और खाते को एनपीए घोषित करना गलत है। कमिशन ने एसबीआई को निर्देश दिया कि एजुकेशन लोन योजना के अनुसार ब्याज की दोबारा गणना की जाए, अधिक वसूली गई राशि और ब्याज समेत लौटाई जाए तथा सिबिल रिपोर्ट से एनपीए टैग हटाया जाए। साथ ही मानसिक प्रताड़ना के लिए 20 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपए वकील खर्च के रूप में देने का आदेश दिया।


