मप्र हाई कोर्ट ने बुधवार को नीट पीजी में एनआरआई (अप्रवासी भारतीय) कोटे की सीटें भरने पर अंतरिम रोक लगाई। इस बीच, भास्कर पड़ताल में सामने आया कि मप्र के निजी मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटे के तहत दाखिलों में बड़ा फर्जीवाड़ा हो रहा है। एमबीबीएस की जो सीटें सबसे काबिल छात्रों को मिलनी चाहिए थी, उसे सबसे पैसे वालों के लिए आरक्षित किया जा रहा है। चिकित्सा शिक्षा संचालनालय की नीट यूजी काउंसलिंग-2024 के रिजर्वेशन चार्ट के मुताबिक, इसी साल प्रदेश के 13 निजी मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई उम्मीदवारों के लिए 381 सीटें (15%) आरक्षित हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद दूसरी और तीसरी राउंड की काउंसलिंग में एनआरआई स्पॉन्सर्ड कोटे से 332 छात्रों को प्रवेश दिए गए। यानी ऐसे छात्रों को प्रवेश दिए गए, जिनके दूर के रिश्तेदार एनआरआई हैं। हर एमबीबीएस में एनआरआई कोटे की फीस 27 लाख रुपए से लेकर 50 लाख रु./वर्ष तक है। उज्जैन के आरडी गार्डी कॉलेज की फीस 27 लाख रु. सालाना, भोपाल के एलएन मेडिकल कॉलेज की फीस 49.74 लाख रु. है। ‘माया’जाल : एक्ट में बदलाव कर दूर के रिश्तेदारों को प्रवेश का प्रावधान जोड़ा डीएमई 10 दिन में भी नहीं बता पाए संशोधन 9 दिसंबर… सुप्रीम कोर्ट का आदेश अभी हमें प्राप्त नहीं हुआ है। आदेश आएगा तो इसका विश्लेषण कराकर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। 19 दिसंबर… गजट में अगर कोई संशोधन हुए हैं तो हम इसे काउंसलिंग कमेटी में रखकर परीक्षण करा लेते हैं। फिर निर्णय लेंगे।’
-डॉ. एके श्रीवास्तव, संचालक, चिकित्सा शिक्षा


