महासमुंद| जिले के राइस मिलर फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके) की खरीदी को लेकर लागू नई व्यवस्था से खासे परेशान हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता और राइस मिलर रमेश साहू ने वर्तमान व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि चुनिंदा फर्मों से ही एफआरके खरीदने की अनिवार्यता मिलरों पर भारी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि बाजार में एफआरके ₹40 प्रति किलो उपलब्ध है, जबकि अधिकृत आपूर्तिकर्ता इसे ₹60 की दर से बेच रहे हैं। इससे मिलरों को डेढ़ गुना अधिक भुगतान करना पड़ रहा है। मांग के अनुसार समय पर एफआरके नहीं मिलने से चावल की मिलिंग और सप्लाई का काम प्रभावित हो रहा है। प्रतिस्पर्धा खत्म होने और ऊंची दरों के कारण मिलरों की लागत बढ़ गई है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। शासन से मांग की है कि एफआरके की दरों का तार्किक निर्धारण हो और आपूर्ति सुचारू बनाई जाए, ताकि कुपोषण मुक्ति की इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ जनता को मिले और मिलरों पर भी अनावश्यक भार न पड़े।


