एमजीएम; 17 दिन बाद भी कुर्सी खाली:4 दिन पहले डीन बने डॉ. पांडेय छुट्‌टी पर; डॉ. यादव ने ऑफिस पर जड़ा ताला, फिर खोला

एमजीएम मेडिकल कॉलेज से 30 नवंबर को डॉ. संजय दीक्षित के रिटायरमेंट के बाद तीन डॉक्टर डीन का प्रभार ले चुके हैं, लेकिन स्थायी डीन की नियुक्ति अब तक नहीं हो सकी है। इस बीच सोमवार को मामले में नया मोड़ आ गया। हाई कोर्ट के आदेश से डीन का प्रभार लेने वाले डॉ. वीपी पांडेय जॉइन करने के 3 दिन बाद ही एक हफ्ते के अवकाश पर विदेश चले गए। वे डीन का प्रभार एमटीएच अस्पताल के अधीक्षक डॉ. नीलेश दलाल को सौंप गए। इसी बीच एमवायएच अधीक्षक और पूर्व प्रभारी डॉ. अशाेक यादव ने डीन ऑफिस में ताला जड़ दिया। डॉ. दलाल जब पहुंचे तो कमरा बंद मिला। जब बात बिगड़ी तो सोमवार दोपहर 12.30 बजे उन्होंने ताला खोला। वजह बताने लगे कि कोई नहीं था, इसलिए ताला लगा दिया। पुनर्विचार याचिका पर कोर्ट ने लगाई फटकार
डॉ. वीपी पांडेय के प्रभार लेने के खिलाफ एमवायएच अधीक्षक डॉ. अशाेक यादव ने कोर्ट में पुनर्विचार के लिए आवेदन कर दिया। सोमवार को सुनवाई के दौरान इस रवैये को लेकर जज विजय कुमार शुक्ला ने नाराजगी जताते हुए सरकारी वकील से कहा कि आपके पक्षकार मीडिया में वर्शन दे रहे कि शासन से आदेश नहीं मिला है। शासन कोर्ट से बड़ा है क्या? कोर्ट इसे संज्ञान में रखेगी। असल वजह… सीनियर-जूनियर की जंग में खाली है कुर्सी डॉ. दीक्षित द्वारा डॉ. यादव को चार्ज सौंपे जाने के खिलाफ डॉ. पांडेय ने हाई कोर्ट में अपील की थी। उसमें हवाला दिया था कि वे सीनियर हैं। उनसे 15 साल जूनियर को कैसे चार्ज दिया गया। इस पर हाई कोर्ट ने वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. वीपी पांडेय को एमजीएम मेडिकल कॉलेज का डीन नियुक्त करने का आदेश दिया था। पांडेय की इंदौर में डीन के पद पर सीधी भर्ती से नियुक्ति को चुनौती देने वाली यह याचिका लगी हुई है। इसमें जस्टिस शुक्ला ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा कि डॉ. पांडेय से जूनियर डॉ. अशोक यादव को किस आधार पर डीन का प्रभार सौंपा गया। चिंता ये… अब दिनोदिन ‘जटिल’ होती जा रही एमजीएम में डीन पद की ‘सर्जरी’ सीधी बात
डॉ. अशोक यादव कोर्ट का सम्मान है, लेकिन, हर चीज की प्रक्रिया होती है Q. कोर्ट के आदेश के बाद भी आप विरोध में हैं?
A. हाई कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन, हर चीज की प्रक्रिया होती है। Q. आप डॉ. पांडेय को चार्ज सौंपना नहीं चाहते थे?
A. मैं शुक्रवार चार्ज देने के लिए उपलब्ध नहीं था। डॉ. पांडेय मेरे लिए सम्माननीय हैं। उनके आते ही मेरी फोन पर उनसे चर्चा हुई थी। मैंने कहा था कि मुझे आदेश दे दीजिए। मैं इसे फॉरवर्ड कर देता हूं। सरकार जो भी आदेश दे, चाहे टेलिफोनिक भी हो तो मान्य करूंगा। Q. आपने शासन को पत्र लिखा, क्या जवाब आया?
A. मेरे पत्र के जवाब में शासन का जवाब अभी आया नहीं है।

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