प्रदेश में कृषि क्षेत्र में सर्वाधिक नवाचार करने वाले महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। हालत यहां तक पहंुच गई है कि विश्वविद्यालय अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को समय पर पेंशन देने में असमर्थ है। वित्तीय कमी का असर विश्वविद्यालय के शोध कार्यों और नई योजनाओं पर भी पड़ रहा है। विश्वविद्यालय में कुल 1440 पेंशनर हैं, जिन्हें पिछले एक माह से पेंशन का भुगतान नहीं हुआ है। हालांकि कर्मचारियों के वेतन आदि की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है, लेकिन पेंशन का पूरा भार विश्वविद्यालय पर ही है। वर्तमान में पेंशन मद में विश्वविद्यालय पर 124.72 करोड़ रुपए की देनदारी है। पेंशन भुगतान के लिए प्रतिमाह 6.90 करोड़ रुपए की आवश्यकता होती है, जबकि उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) से हर माह 5 करोड़ रुपए ही प्राप्त हो रहे हैं। इस प्रकार विश्वविद्यालय पर 1.90 करोड़ रुपए का अतिरिक्त मासिक भार पड़ रहा है। विश्वविद्यालय के सामने यह प्रश्न है कि अतिरिक्त राशि की व्यवस्था कैसे की जाए। पेंशनरों को राहत के लिए स्थायी समाधान जरूरी : सुरेंद्र भटनागर एमपीयूएटी पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र भटनागर ने कहा कि विश्वविद्यालय के 1440 पेंशनरों को पिछले एक माह से पेंशन नहीं मिली है। सातवां वेतनमान लागू करने सहित कई कर्मचारियों की ग्रेच्युटी भी लंबित है। वर्तमान में यूडीए से 5 करोड़ रुपए प्रतिमाह मिल रहे हैं, लेकिन आवश्यकता इससे अधिक है। आने वाले वर्षों में बजट की जरूरत और बढ़ेगी, इसलिए स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए। पेंशनर्स की समस्या के समाधान के प्रयास जारी हैं : कुलपति विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रताप सिंह धाकड़ ने बताया कि पेंशनरों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उदयपुर दौरे पर आए केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी और पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद्र कटारिया से भी इस संबंध में आग्रह किया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार से अलग से बजट मिलने पर समस्या का समाधान संभव हो सकेगा।


