झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में सांसदों और विधायकों से जुड़े लंबित आपराधिक मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सीबीआई को मौखिक रूप से कहा कि एमपी-एमएलए के आपराधिक मामलों का शीघ्र निष्पादन किया जाए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ट्रायल में देरी का गवाहों पर सीधा असर है और उनकी गवाही प्रभावित होती है। सोमवार को एमपी-एमएलए के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों के त्वरित निपटारे को लेकर कोर्ट के स्वत: संज्ञान पर सुनवाई हुई। यह सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई। इस दौरान सीबीआई की ओर से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कुछ समय मांगा गया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 11 फरवरी 2026 तय की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि राज्य में एमपी-एमएलए से जुड़े दो आपराधिक मामले हैं। इनमें एक मामला पूर्व मंत्री बंधु तिर्की से संबंधित है, जिसे सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया है। इस मामले में विजिलेंस स्पेशल केस संख्या 66/2010 दर्ज थी। दूसरा मामला बीज घोटाले से जुड़ा है, जिसमें पूर्व विधायक नलिन सोरेन और सत्यानंद भोक्ता आरोपी हैं। यह मामला स्पेशल विजिलेंस केस संख्या 15/2009 के तहत विजिलेंस कोर्ट में लंबित है। सीबीआई ने बताया था… एमपी-एमएलए के 11 आपराधिक मामले लंबित पिछली सुनवाई में सीबीआई ने कोर्ट को जानकारी दी थी कि झारखंड में एमपी-एमएलए के कुल 11 आपराधिक मामले विभिन्न अदालतों में लंबित हैं। वहीं, एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को अवगत कराया था कि कई मामलों में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद भी आरोप गठन में छह साल तक का समय लग रहा है, जिससे ट्रायल पूरा होने में वर्षों लग जाते हैं। इस पर कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि सीबीआई जैसी संस्था भी गवाहों को समय पर पेश कराने में असफल साबित हो रही है।


