आरएनटी मेडिकल कॉलेज की शहर में पहले से ही पांच निजी मेडिकल कॉलेजों से प्रतिस्पर्धा है। ऐसे में चुनौती रहती है कि यहां आने वाले मरीजों को निजी अस्पतालों के मुकाबले किसी भी रूप में कमतर इलाज न मिले। लेकिन, हकीकत कुछ और ही तस्वीर दिखा रही है। हालात यह हैं कि कॉलेज के कई डॉक्टर पास के कॉम्प्लेक्स में बाकायदा अपने क्लीनिक चला रहे हैं। कुछ ने एमबी हॉस्पिटल के बाहर बड़े-बड़े डिस्प्ले बोर्ड लगाकर इन क्लीनिकों पर परामर्श के नाम पर निजी प्रैक्टिस शुरू कर रखी है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि ज्यादातर क्लीनिक मेडिकल स्टोर्स से सटे हुए हैं। इन क्लीनिकों पर चिकित्सकों ने अपने नाम के डिस्प्ले बोर्ड लगा रखे हैं। नियमानुसार भले ही ये चिकित्सक एनपीए (नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस) और एनसीए (नॉन-क्लिनिकल अलाउंस) नहीं ले रहे हों, लेकिन वे सरकार के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। अस्पताल से बाहर निकलते ही इन क्लीनिकों के बोर्ड नजर आ जाते हैं। यह तो केवल बानगी भर है। ऐसे कई डॉक्टर हैं, जो इस तरह कॉलेज के बाहर क्लीनिक चलाकर मरीजों को गुमराह कर रहे हैं। कई बार डॉक्टर मरीजों को अपने इन कथित परामर्श केंद्रों पर आने के लिए कहते हैं और वहां फीस भी वसूलते हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग के निर्देशों में स्पष्ट है कि चिकित्सक-शिक्षक कार्यालय समय के अतिरिक्त केवल अपने निवास पर ही निजी प्रैक्टिस कर सकते हैं, किसी निजी अस्पताल या अन्य संस्थान में नहीं। यानी वे क्लीनिक संचालित नहीं कर सकते।


