एम्स बठिंडा के बाल शल्य मेडिकल विभाग ने एक नवजात शिशु की दुर्लभ जन्मजात मूत्र मार्ग बीमारी का सफल इलाज कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) रतन गुप्ता के मार्गदर्शन में, जन्म के तुरंत बाद एक जटिल मूत्र मार्ग विकार से ग्रस्त शिशु का समय पर निदान और विशेषज्ञ ऑपरेशन के माध्यम से इलाज किया गया। जन्म के समय, शिशु के शरीर में केवल दाहिनी ओर एक कार्यशील गुर्दा था, जो रीनल फाइब्रो-मस्कुलर डिस्प्लेसिया से प्रभावित था। गर्भावस्था के दौरान ही दाहिने यूरेट्रो-पेल्विक जंक्शन अवरोध और मध्य यूरेटर संकुचन का निदान किया गया था। शिशु के जीवन के पहले दिन आपातकालीन परक्यूटेनियस नेफ्रोस्टॉमी (पीसीएन) की गई। इसके उपरांत, मूत्र के उचित निकास को सुनिश्चित करने के लिए एंडरसन-हाइन्स पायलोप्लास्टी के साथ डबल-जे स्टेंट स्थापित किया गया। सर्जरी के बाद नवजात शिशु स्वस्थ ऑपरेशन के बाद शिशु की स्थिति संतोषजनक रही और सातवें दिन उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। छह सप्ताह बाद डबल-जे स्टेंट को सुरक्षित रूप से हटा दिया गया। वर्तमान में, शिशु पूरे तरीके से स्वस्थ है और किसी भी जटिलता से मुक्त जीवन जी रहा है। इस सफल उपचार का श्रेय डॉ. नवदीप सिंह ढोट और बच्चों की सर्जरी करने वाले विभाग की समर्पित टीम को जाता है। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. अंजू ग्रेवाल, नवजात विशेषज्ञ डॉ. मनीष, तथा ऑपरेशन थिएटर और नर्सिंग टीम का भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण सहयोग रहा। यह मामला एकल कार्यशील गुर्दे वाले बच्चों में जन्मजात विकृतियों के प्रबंधन के लिए शीघ्र निदान, संक्रमण नियंत्रण और विशेषज्ञ शल्य चिकित्सा हस्तक्षेप के महत्व को रेखांकित करता है।


