एम्स में नई तकनीक:70 प्लस वालों की नहीं हो सकती बायपास सर्जरी… टावी तकनीक से बुजुर्गों के वाल्व बदले, चारों स्वस्थ

62 साल की महिला रूमेटिक हार्ट डिजीज के कारण एक बार 10 साल पहले ओपन हार्ट सर्जरी हो चुकी थी, लेकिन उन्हें दोबारा सांस फूलने की समस्या हुई। कुछ प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने पहुंचीं। उन्हें दोबारा बायपास के लिए मना कर दिया गया। परेशानी ज्यादा बढ़ने लगी तो एम्स पहुंचे। यहां मॉडर्न, गैर-सर्जिकल और मिनिमल इनवेसिव तकनीक से इलाज किया गया। इसमें पुराने और खराब कृत्रिम हृदय वाल्व को हटाए बिना, नया वाल्व सीधे उसके भीतर ही इम्प्लांट किया गया। अब वह सामान्य जीवन जी रही हैं। बीते छह माह में 70 वर्षीय बुजुर्ग, 80 से ज्यादा उम्र की महिला और एक 86 साल के बुजुर्ग की जान बचाई गई। एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग में अब एडवांस ट्रांसकैथेटर हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट इलाज शुरू हो गया है। यह टीएवीआई प्रक्रिया पैर की धमनी के माध्यम से की गई, यानी छाती को खोले बिना ही हृदय तक पहुंच बनाकर पुराना क्षतिग्रस्त कृत्रिम वाल्व फ्रैक्चर किया गया और उसके भीतर नया वाल्व लगाया गया। इस प्रक्रिया में मेक इन इंडिया से बना से वॉल्व इस्तेमाल किया जा रहा है। यह केवल डेढ़ घंटें में पूरी कर ली गई। ओपन हार्ट सर्जरी में 6 से 8 घंटे का समय लगता है। जोखिम के कारण टाली जाती थी सर्जरी
अब तक गंभीर हार्ट वाल्व बीमारी में मरीजों को ओपन हार्ट सर्जरी करानी पड़ती थी, जो बुजुर्गों के लिए काफी जोखिम भरी होती है। कई मरीज इलाज टाल देते थे या फिर निजी अस्पतालों में महंगे इलाज के लिए दूसरे राज्यों तक जाना पड़ता था। लेकिन अब एम्स भोपाल में यह इलाज बिना सीना खोले संभव हो गया है। निजी अस्पताल में 35 लाख खर्च, एम्स में काफी रियायती दर क्या है टॉवी टॉवी एक नई हार्ट ट्रीटमेंट तकनीक है जो उन मरीजों के लिए लाई गई है जो ओपन हार्ट सर्जरी कराने की स्थिति में नहीं होते। इसमें कैथेटर के जरिए वॉल्व तक पहुंच बनाई जाती है। बिना चीरफाड़ के नया वॉल्व लगाया जाता है। अभी यह तकनीक केवल चुनिंदा मेट्रो शहरों में ही उपलब्ध है। प्राइवेट अस्पतालों में टॉवी टेक्नीक के लिए 20 से 35 लाख रुपए तक खर्च होता है, लेकिन एम्स में यह रियायती दरों पर किया जा रहा है। इस प्रक्रिया की खास बातें भोपाल एम्स में यह सुविधा
हार्ट में चार चैंबर होते हैं और सभी में खून का बहाव होने पर वाल्व खुलते हैं। वाल्व खराब होने पर खून से संबंधित प्रक्रिया में दिक्कत आने लगती है। ऐसे में उत्पन्न होनेवाली समस्याएं खत्म करने के लिए अब तक ओपन हार्ट सर्जरी ही करनी पड़ती थी पर अब टीएवीआइ में स्टेंट की तरह ही कैथेटर के जरिए वाल्व रिप्लेसमेंट होगा। यह सुविधा रेगुलेर बेसिस पर एम्स भोपाल उपलब्ध है।
डॉ. भूषण शाह, कार्डियोलॉजिस्ट, एम्स भोपाल

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