बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर पैरेलल टैक्सी ट्रैक के लिए 2024 में 86 करोड़ रुपए (जीएसटी इनक्लूड) का टेंडर हुआ था। निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया था, लेकिन टेंडर लेने वाली गुजरात की कंपनी ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (बीसीएएस) को सिक्योरिटी क्लियरेंस नहीं मिलने के कारण काम बंद हो गया। अब इस ट्रैक की जरूरत को देखते हुए फिर से टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। ट्रैक के बनने से अराइवल और डिपार्चर के बीच गैप काफी कम हो जाएगा। मालूम हो कि अभी यह गैप 7 से 10 मिनट का है। पैरेलल टैक्सी ट्रैक बनने के बाद रनवे पर लैंड होने के एक मिनट बाद ही विमान इस ट्रैक पर आ जाएगा और रनवे जल्द खाली हो जाएगी। इससे हर दो-तीन मिनट के अंतराल पर विमान का उतरना संभव हो सकेगा। यात्रियों का भी करीब 10 मिनट तक बचेगा। एयरपोर्ट डायरेक्टर विनोद कुमार ने कहा कि जल्द ही टेंडर पूरा हो जाएगा। रांची एयरपोर्ट में पैरलल टैक्सी ट्रैक बनाना जरूरी है। अभी विमान के उतरने के बाद रन-वे से काफी दूर जाकर यू टर्न लेना पड़ता है। इसमें काफी वक्त लग जाता है। पैरेलल टैक्सी ट्रैक बनने के बाद ये होंगे लाभ एयरपोर्ट के विस्तारीकरण में जमीन सबसे बड़ी बाधा एयरपोर्ट के विस्तारीकरण में इस समय जमीन सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। अधिग्रहण प्रक्रिया में लंबे समय से अड़चनें आ रही हैं और इस मुद्दे पर राज्य सरकार, अधिकारी व एयरपोर्ट प्रबंधन के बीच दर्जनों बैठकें हो चुकी हैं, फिर भी अब तक एक इंच जमीन हस्तांतरित नहीं हुई है। एयरपोर्ट प्रबंधन का कहना है कि 301 एकड़ जमीन मिलनी है, जिस पर ग्रामीणों का कब्जा है और इसे अतिक्रमण मुक्त कराना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। चहारदीवारी का निर्माण अधूरा है। जमीन नहीं मिलने से कैट-टू लाइटिंग सिस्टम और रन-वे विस्तार कार्य भी रुका हुआ है। जमीन मिली तो कैट-टू लाइट सिस्टम भी लग सकेगा: इसी सप्ताह एयरपोर्ट प्रबंधन और राज्य सरकार के अधिकारियों की अहम बैठक होगी। एयरपोर्ट डायरेक्टर विनोद कुमार ने बताया कि इस बार जमीन अधिग्रहण पर ठोस पहल होने की संभावना है। रन-वे विस्तार और कैट-टू लाइट लगाने के लिए जमीन अत्यंत जरूरी है। नए ट्रैक पर एक साथ कई विमान खड़े रह सकेंगे: अभी जो विमान लैंड करते हैं, वे रन-वे के अंतिम छोर तक जाते हैं। पैरेलल टैक्सी ट्रैक बनने के बाद ये विमान रैपिड एक्जिट से पैरेलल टैक्सी ट्रैक पर आ जाएंगे और एप्रन तक पहुंचेंगे। ऐसा होने से रन-वे जल्दी खाली हो जाएगा, जिससे दूसरे प्लेन भी जल्द लैंड कर सकेंगे।


