‘सुबह मुझसे कहा था कि जीजा जी से बात कर लेना, दोनों साथ चलकर भतीजी की शादी की मिठाई दे आएंगे। ये कहकर वह फैक्ट्री गया, लेकिन शाम को उसके मरने की खबर आई। मेरे पूरे परिवार को संभालने वाला वो अकेला ही था, हमारा तो सबकुछ बिखर गया।’ जयपुर में ऑक्सीजन सिलेंडर ब्लास्ट में जान गंवाने वाले विनोद गुप्ता के बड़े भाई ओमप्रकाश इतना कहते ही फफक पड़ते हैं। इस हादसे में मैनेजर विनोद सहित 3 लोगों की जान चली गई। हादसे के बाद भास्कर ने घटनास्थल से प्रत्यक्षदर्शियों, पीड़ितों और जिम्मेदारों से बात कर हादसे के कारणों की पड़ताल की। पढ़िए इस रिपोर्ट में… दरअसल, शनिवार शाम करीब 7.45 बजे विश्वकर्मा इंडस्ट्रियल एरिया में रोड नंबर 17 पर करणी विहार कॉलोनी से सटे ऑक्सीजन गैस फिलिंग प्लांट में सिलेंडर ब्लास्ट में 3 लोगों की जान चली गई। विल्सन क्रायो गैसेज ऑक्सीजन प्लांट में हुए धमाके के वक्त प्लांट मैनेजर विनोद गुप्ता (45) भी मौजूद थे। ब्लास्ट इतना तेज था कि विनोद का एक पैर और हाथ का पंजा अलग हो गया। वहीं, 2 मजदूरों के शरीर भी चीथड़ों में बदल गए। भाई बोला- विनोद ने ही संभाल रखी थी परिवार की जिम्मेदारी
विनोद अपने पीछे पत्नी ममता और 13 साल की बेटी प्रियांशी को छोड़ गए हैं। बड़े भाई ओमप्रकाश बताते हैं कि 17 साल पहले मेरी पत्नी के निधन के बाद विनोद ने ही मेरे तीनों बच्चों को पिता की तरह पाला। मेरे बच्चे मुझसे ज्यादा उसकी बात मानते थे। पूरे परिवार की जिम्मेदारी उसी पर थी। 26 जनवरी को बड़ी बेटी की सगाई हुई थी। शादी की तैयारियों की पूरी कमान विनोद ने संभाल रखी थी। हादसे वाली सुबह भी वह यही कहकर फैक्ट्री गया था कि जीजा जी से बात कर लेंगे और साथ जाकर मिठाई दे आएंगे। उनका भतीजा रोज की तरह उन्हें फैक्ट्री छोड़ने गया था। शाम को मंदिर से लौटने पर बेटे ने बताया कि फैक्ट्री में धमाका हुआ। हमने कंपनी मालिक को कॉल किया, लेकिन उसने नहीं उठाया। थोड़ी देर बाद मालिक ने फोन कर कहा- विनोद की हालत गंभीर है। विनोद की पत्नी ममता गांव में थी, जिसे बुलाया गया। रात होते-होते विनोद ने दम तोड़ दिया। एक धमाके ने परिवार की खुशियां छीन ली। दोनों मजदूरों के शरीर टुकड़ों में बंटे
हादसे के वक्त फैक्ट्री में काम कर रहे धनबाद (झारखंड) निवासी मुन्ना राय (30) के शरीर के चीथड़े उड़ गए। उसके अंग अलग-अलग जगहों पर बिखरे मिले। वहीं बोकारो (झारखंड) के रहने वाले शिबू (40) की भी दर्दनाक मौत हो गई। विश्वकर्मा थाना पुलिस के अनुसार, दोनों मृतकों के परिजनों को सूचना दे दी गई है। सबसे बड़ी चुनौती अब यह है कि शवों के बिखरे टुकड़ों की डीएनए जांच कर पहचान सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें सम्मानपूर्वक परिजनों को सौंपा जा सके। प्रत्यक्षदर्शी बोले- सिलेंडर के टुकड़े इधर-उधर बिखरे
प्रत्यक्षदर्शी संजय दरिया ने गैस सिलेंडर के बिखरे टुकड़े दिखाते हुए कहा- ब्लास्ट के बाद ये 200 से 400 ग्राम के टुकड़े उड़कर इधर-उधर बिखर गए थे। अगर इनकी चपेट में कोई आता तो उसे भी गंभीर चोटें आती। ब्लास्ट के बाद छत पर पहुंचे तो शव के टुकड़े, सिलेंडर के पुर्जे, मलबा और 3 शेड बिखरे हुए थे। संजय ने बताया- हम यहां 20-25 सालों से रह रहे हैं। 10-12 साल पहले जब कंपनी लग रही थी, तब भी हमने विरोध किया था। प्रत्यक्षदर्शी लक्ष्मी ने कहा- मौसम खराब होने के कारण हम घर में ही थे। धमाके से पूरा मकान धूज गया। लगा जैसे भूकंप आ गया हो। लक्ष्मी ने बताया- अगस्त-सितंबर 2025 में भी गैस स्टोर करने वाली टंकी की सफाई करने उतरे 3 मजदूरों की मौत हो गई थी। तब भी कंपनी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। कंपनी के ठीक सामने प्रेस का काम करने वाले भागचंद ने बताया- शनिवार रात करीब 7.45 बजे की घटना है। हमने 4 आदमियों को बाहर निकाला। उनमें से किसी का हाथ नहीं तो किसी का धड़ नहीं था। किसी की गर्दन अलग पड़ी थी। इंसानी शरीर के इतने टुकड़े थे कि समझ नहीं आ रहा था कौन सा हिस्सा किसका है। फैक्ट्री के बाहर ही हेयर ड्रेसर की दुकान करने वाले सीताराम ने बताया- धमाके का प्रेशर इतना जबरदस्त था कि मेरी दुकान के सारे कांच टूट गए। एक शीशे का टुकड़ा मेरे पांव में भी लग गया, जिससे खून बहने लगा। बाद में मुझे भी अस्पताल ले जाया गया। अभी दुकान को ठीक करवाने में 25 से 30 हजार का खर्चा आएगा। शुक्र है कि उस वक्त मैं अकेला ही था। दीवार नहीं होती तो ज्यादा लोगों की मौत होती- प्रत्यक्षदर्शी
फैक्ट्री के ठीक सामने रहने वाले बनवारी लाल सोढानिया ने बताया- हादसे के वक्त मैं अपने कमरे में ही था। तेज धमाके से कान सुन्न पड़ गए। मौके पर जाकर देखा तो फैक्ट्री की सीमेंट की चद्दर के टुकड़े, टिन शेड, मजदूरों के मांस के लोथड़े और ईंटों के टुकड़े यहां वहां बिखरे थे। ब्लास्ट हुआ तब हल्की हल्की बारिश हो रही थी और मैच के कारण ज्यादातर लोग घरों में ही थे। रोज की तरह गली से आने-जाने वाली 400-500 लेबर की भीड़ भी नहीं थी, इसलिए बड़ा हादसा टल गया। वहीं, कंपनी की दीवार भी अभी 1 महीने पहले ही बनी थी। इस दीवार की वजह से सामने वाले घरों तक इस ब्लास्ट का असर नहीं पहुंचा। बनवारी ने बताया- जब कंपनी लगाई जा रही थी तो हमें बताया गया था कि ये गोदाम है, गैस फिलिंग नहीं होगी। केवल सिलेंडर स्टोर किए जाएंगे। लेकिन कुछ दिनों बाद ही गैस फिलिंग का काम शुरू कर दिया। यहां मेडिकल ऑक्सीजन के अलावा नाइट्रोजन और एलपीजी गैस भी भरी जाती है। जिम्मेदार कौन- फैक्ट्री मालिक या प्रशासन
सबसे बड़ा सवाल ये है कि इस हादसे की जिम्मेदारी किसकी है? फैक्ट्री मालिक संतोष गुप्ता की या प्रशासन की? फैक्ट्री के आस पास सालों से रह रहे लोगों ने बताया- यहां कभी किसी तरह की सेफ्टी मॉक ड्रिल होते नहीं देखी। स्थानीय लोगों का कहना है कि 10 से 12 हजार रुपए की मामूली तनख्वाह पर जान जोखिम में डालकर काम करने वाले इन मजदूरों को न तो किसी तरह की सुरक्षा ट्रेनिंग दी गई थी और न ही बेसिक सेफ्टी उपकरण। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक काम के दौरान मजदूरों के पास सुरक्षा का कोई इंतजाम ही नहीं था। 2KM तक सुना धमाका, क्या थे हादसे के कारण?
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक 2 किलोमीटर दूर तक धमाके की आवाज सुनी गई। आशंका है कि हादसे में एक नहीं, 3 से 4 सिलेंडर चेन में फटे हैं। ऑक्सीजन के रिसाव ने आसपास की हवा को अत्यधिक प्रेशर वेव में बदल दिया। जिससे शॉक और दबाव इतना जबरदस्त हुआ कि मजदूरों के परखच्चे उड़ गए और घरों में दरारें आ गई। इसके कई और भी संभावित कारण हो सकते हैं… पुराना या री-यूज किया गया सिलेंडर : ऑक्सीजन सिलेंडर की एक फिक्स लाइफ और टेस्टिंग साइकिल होती है। ओवर-प्रेशर पड़ते ही कमजोर सिलेंडर पहले फटा। ज्वलनशील पदार्थ का होना : ऑक्सीजन खुद ज्वलनशील नहीं होती, लेकिन तेल या ग्रीस के संपर्क में आते ही विस्फोट हो जाती है। ओवर प्रेशर : ऑक्सीजन सिलेंडर भरते वक्त ओवर प्रेशर से ज्यादा गैस भरने के कारण भी हादसा हो सकता है। फिलहाल पुलिस आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से बच रही है। जांच जारी है और फैक्ट्री मालिक से पूछताछ की जा रही है। फिलहाल शवों के टुकड़ों की डीएनए पहचान कर उन्हें समुचित रूप से परिजनों को सौंपने की चुनौती है।
वो सवाल जिनके जवाब मिलना बाकी फैक्ट्री मालिक के खिलाफ लापरवाही का मुकदमा दर्ज
डीसीपी वेस्ट हनुमान प्रसाद मीणा ने बताया- हमने फैक्ट्री मालिक के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज कर लिया है। जांच की जा रही है। जहां तक इंडस्ट्रियल एरिया और रिहायशी बस्ती के आस पास होने का सवाल है तो ये अन्य विभागों की जांच का विषय है। उन्होंने बताया- हमने अपनी ओर से सेफ्टी पैरामीटर्स के लिए संबंधित एजेंसियों को लिख दिया है। विश्वकर्मा इंडस्ट्रियल एरिया पहले बसा था और आस-पास की कच्ची बस्तियां बाद में बसी है। आज पूरा वीकेआई एरिया आबादी के बीच आ गया है। यह खबर भी पढ़ेंः जयपुर- ऑक्सीजन प्लांट में धमाका,मैनेजर समेत दो की मौत:युवक के चीथड़े उड़े; एक गंभीर, फैक्ट्री के टिनशेड के टुकड़े कॉलोनी में बिखरे जयपुर के विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र में एक फैक्ट्री में ऑक्सीजन सिलेंडर फट गया। धमाका इतना जोरदार था कि फैक्ट्री के ऊपर का टिन शेड उड़ गया और एक दीवार गिर गई। सिलेंडर ब्लास्ट में काम कर रहे एक युवक के चीथड़े उड़ गए। (पढ़ें पूरी खबर)


